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WORLD BANK : 75 साल बाद भी अमेरिकियों से कम होगी भारतीयों की इनकम, जानें कितना कमाएंगे

India Vs USA Per Capita Income: विश्व बैंक की रिपोर्ट में पिछले 50 वर्षों के अनुभव के आधार पर पाया गया है कि जैसे-जैसे देश अमीर होते जाते हैं, वे आम तौर पर प्रति व्यक्ति वार्षिक अमेरिकी जीडीपी के लगभग 10 प्रतिशत के 'जाल' में फंस जाते हैं। यह 10 प्रतिशत राशि आज 8,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

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इनकम पर विश्व बैंक रिपोर्ट

India Vs USA Per Capita Income:भारत समेत 100 से अधिक देशों को अगले कुछ दशकों में उच्च आय वाला देश बनने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ेगा। और भारत को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय के एक-चौथाई तक पहुंचने में भी लगभग 75 साल लग सकते हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।विश्व बैंक की 'विश्व विकास रिपोर्ट 2024: मध्यम आय जाल' के मुताबिक, चीन को प्रति व्यक्ति अमेरिकी आय के एक-चौथाई तक पहुंचने में 10 साल से अधिक और इंडोनेशिया को लगभग 70 साल लगेंगे। इस समय भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 2200 डॉलर है। जबकि अमेरिका की करीब 37000 डॉलर है। यानी अमेरिकियों की तुलना में केवल 6 फीसदी ही भारतीय कमाते हैं। और विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार 25 फीसदी तक पहुंचने में भारत को 75 साल लग जाएंगे।

प्रति व्यक्ति इनकम का जाल

इस रिपोर्ट में पिछले 50 वर्षों के अनुभव के आधार पर पाया गया है कि जैसे-जैसे देश अमीर होते जाते हैं, वे आम तौर पर प्रति व्यक्ति वार्षिक अमेरिकी जीडीपी के लगभग 10 प्रतिशत के 'जाल' में फंस जाते हैं। यह 10 प्रतिशत राशि आज 8,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

वर्ष 2023 के अंत में विश्व बैंक ने 108 देशों को मध्यम आय वर्ग के रूप में वर्गीकृत किया था। इनकी प्रति व्यक्ति वार्षिक जीडीपी 1,136 अमेरिकी डॉलर से लेकर 13,845 अमेरिकी डॉलर के बीच थी।इन देशों में छह अरब लोग रहते हैं, जो वैश्विक आबादी का 75 प्रतिशत है। दुनिया में हरेक तीन में से दो लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

पुरानी रणनीति से नहीं चलेगा काम

विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और विकास अर्थशास्त्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरमीत गिल ने कहा कि अगर ये देश पुरानी रणनीति पर ही टिके रहते हैं, तो इनमें से ज्यादातर विकासशील देश इस सदी के मध्य तक समृद्ध समाज बनाने की दौड़ में पीछे रह जाएंगे।रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों के लिए आगे की राह में कई चुनौतियां हैं। इनमें तेजी से उम्रदराज हो रही जनसंख्या और बढ़ता कर्ज, तेज भू-राजनीतिक और व्यापार गतिरोध और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आर्थिक प्रगति में मुश्किलें शामिल हैं।इन चुनौतियों के बावजूद मध्यम आय वाले कई देश अभी भी पिछली सदी की रणनीति पर चल रहे हैं और मुख्य रूप से निवेश बढ़ाने के लिए बनाई गई नीतियों पर निर्भर हैं। यह कार को पहले गियर में रखकर उसे तेज चलाने की कोशिश जैसा है।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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