बिजनेस

6 लाख बैरल कच्चा ईरानी तेल लेकर गुजरात आ रहा 'पिंग शुन'; सात साल बाद पहली बार आपूर्ति! पहले इतनी होती थी खरीद

‘पिंग शुन’ नाम का जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। यह आपूर्ति मई 2019 के बाद पहली खेप हो सकती है।

Image

सांकेतिक तस्वीर।

करीब सात साल के बाद फिर से भारत को ईरान से कच्चा तेल जल्द मिलने की संभावना है। ईरानी तेल से लदा एक जहाज गुजरात के वाडिनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है। जहाजों की निगरानी करने वाली फर्म के मुताबिक,'पिंग शुन'नामक यह जहाज लगभग छह लाख बैरल कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ बढ़ रहा है।

जिंस विश्लेषण फर्म केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि मई,2019 के बाद भारत को ईरानी तेल की पहली आपूर्ति हो सकती है। उन्होंने बताया कि हाल में 'समुद्र में मौजूद'ईरानी तेल की खरीद के लिए अमेरिकी सरकार द्वारा 30 दिन की छूट दिए जाने के बाद ही यह आपूर्ति संभव हुई है। रितोलिया ने कहा कि मार्च महीने की शुरुआत में 'पिंग शुन'जहाज ने ईरान के खार्ग द्वीप से तेल भरा था। इसके चार अप्रैल को वाडिनार बंदरगाह पर आने पर अनुमान है।

कौन खरीदेगा तेल अभी साफ नहीं

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस जहाज में मौजूद कच्चे तेल का खरीदार कौन है, लेकिन इस जहाज का गंतव्य वाडिनार में स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी हो सकती है। वाडिनार बंदरगाह भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बीना रिफाइनरी सहित अन्य इकाइयों के लिए भी आपूर्ति का केंद्र है।

पेट्रोलियम मंत्रालय अब तक यह कहता रहा है कि ईरान से तेल खरीद दोबारा शुरू करने का फैसला तकनीकी एवं व्यावसायिक व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा।

2019 से पहले भारत था ईरानी तेल का बड़ा खरीदार

भारत ऐतिहासिक तौर पर ईरानी तेल का बड़ा खरीदार रहा है। एक समय भारत के कुल आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 11.5 प्रतिशत थी। वर्ष 2018 में भारत ने प्रतिदिन करीब 5.18 लाख बैरल ईरानी तेल का आयात किया था, जो मई, 2019 तक घटकर 2.68 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। फिर ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरानी तेल का आयात पूरी तरह बंद हो गया था।

19 अप्रैल को खत्म हो जाएगी अमेरिकी छूट

अमेरिका ने हाल में ईरानी तेल की समुद्र में मौजूद खेप की खरीद पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी थी जो 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी। यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण बढ़ी कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास के तहत उठाया गया। अनुमान है कि समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की कुल मात्रा करीब 9.5 करोड़ बैरल है, जिसमें से लगभग 5.1 करोड़ बैरल भारत को बेचा जा सकता है, जबकि बाकी तेल चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के खरीदारों के लिए अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

तेल खरीद के भुगतान की व्यवस्था अभी भी एक बड़ी चुनौती

हालांकि, इस तेल खरीद के भुगतान की व्यवस्था अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। दरअसल,ईरान वैश्विक बैंकिंग नेटवर्क 'स्विफ्ट'से बाहर है। पहले भारत ने तुर्किये के एक बैंक के जरिये यूरो में भुगतान किया था,लेकिन अब वह विकल्प भी उपलब्ध नहीं है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

और पढ़ें
End of Article