IEC 2025: द टाइम्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन ने इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2025 में अपने मुख्य संबोधन के दौरान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और रणनीतिक स्थिति को रेखांकित किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिकारों की मौजूदगी में विनीत जैन ने वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच भारत की मजबूती पर जोर दिया। प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विनीत जैन ने कहा कि आज की दुनिया 'सिर्फ आपस में जुड़ी हुई नहीं, बल्कि यह परस्पर निर्भर और तेजी से प्रतिस्पर्धात्मक होती जा रही है।' उन्होंने कहा कि इस तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत एक 'निर्णायक, स्थिरता प्रदान करने वाली और भविष्य की ओर देखने वाली शक्ति' के रूप में उभरा है।
विनीत जैन ने कहा, 'हमारी जीडीपी के ताजा आंकड़े भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करते हैं।' उन्होंने आगे कहा कि भारत की संरचनात्मक वृद्धि, विनिर्माण क्षेत्र की गति, मजबूत वित्तीय क्षेत्र, विस्तारित बुनियादी ढांचे और सशक्त उद्यमशीलता पर आधारित है। इस मौके पर विनीत जैन ने संरक्षणवादी टैरिफ, वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे वैश्विक दबावों को स्वीकार करते हुए कहा कि इसके बावजूद भारत ने स्पष्टता और दृढ़ संकल्प के साथ अपनी आर्थिक दिशा बनाए रखी है।
उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा कारण भारत की स्वतंत्र विदेश नीति है, जो देश को किसी एक गुट से जोड़े बिना सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखने की अनुमति देती है। भारत की रणनीतिक और सैन्य क्षमताओं को क्षेत्र में स्थिरता का एक महत्वपूर्ण आधार बताते हुए विनीत जैन ने कहा कि 'ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव तेजी से आर्थिक संकट में बदल सकते हैं, भारत की तैयारी और संकल्प, सुरक्षा और पूर्वानुमेयता का एक मजबूत आधार के रूप में कार्य करते हैं।'
जलवायु नेतृत्व पर बोलते हुए विनीत जैन ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा पहल, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रणनीतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये प्रयास ऐसे विकास मॉडल का हिस्सा हैं जो 'न सिर्फ उच्च प्रदर्शन वाला है, बल्कि भविष्य के लिए भी सुरक्षित है।' कॉन्क्लेव की थीम ‘नैविगेटिंग जियोइकोनॉमिक्स’ पर बोलते हुए जैन ने कहा कि आज के दौर में अर्थशास्त्र और भू-राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और व्यापार गठबंधन अब सैन्य निर्णयों के बराबर रणनीतिक महत्व रखते हैं।
उन्होंने आगे कहा, 'जो देश आर्थिक दूरदर्शिता को भू-राजनीतिक समझ के साथ जोड़ पाएंगे, वही आने वाले वैश्विक अध्याय को परिभाषित करेंगे। भारत निस्संदेह उन्हीं देशों में से एक है।' विनीत जैन ने-2047, भारत की आजादी के 100 वर्ष की ओर देखते हुए देश की दीर्घकालिक दृष्टि को भी सामने रखा। उन्होंने कहा, 'हमारा लक्ष्य स्पष्ट और अडिग है, और यह लक्ष्य है भारत को एक पूर्ण विकसित, एक वैश्विक प्रभावशाली राष्ट्र, आर्थिक रूप से मजबूत, रणनीतिक रूप से सुरक्षित, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और विश्व स्तर पर एक सम्मानित राष्ट्र बनाना है।'
विनीत जैन ने कहा कि इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य इस बात पर विचार करने का मंच है कि भारत अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, विनिर्माण महत्वाकांक्षा, सुधारों की गति और कूटनीतिक कुशलता का उपयोग कर कैसे एक वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है। विनीत जैन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उनके नेतृत्व के लिए भी धन्यवाद दिया और चर्चा को आकार देने के लिए सभी विशिष्ट वक्ताओं, साझेदारों और प्रतिनिधियों का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'भारत का समय आने वाला नहीं है, बल्कि वह आ चुका है, और हम मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत न सिर्फ इस नए भू-आर्थिक युग को समझे, बल्कि इसका नेतृत्व भी करे।'
भाषण का पूर्ण पाठ (हिंदी अनुवाद)
'माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सम्मानित नीति-निर्माताओं, वैश्विक रणनीतिकारों, उद्योग जगत की हस्तियों और सभी प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों—इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।'
'हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है। आर्थिक शक्ति संतुलन बदल रहे हैं, टैरिफ युद्ध व्यापार की दिशा तय कर रहे हैं, तकनीकी श्रेष्ठता प्रभाव की नई मुद्रा बन चुकी है और ऊर्जा भू-राजनीति महाद्वीपों के बीच गठबंधनों को नया आकार दे रही है।'
'आज की दुनिया केवल आपस में जुड़ी हुई नहीं है, बल्कि परस्पर निर्भर और तेजी से प्रतिस्पर्धात्मक हो चुकी है। और इसी अस्थिर व प्रतिस्पर्धी माहौल में भारत एक निर्णायक, स्थिरता प्रदान करने वाली और भविष्यदृष्टा शक्ति के रूप में उभरा है। हमारे नवीनतम जीडीपी आंकड़े भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करते हैं। यह वृद्धि विनिर्माण की गति, मजबूत वित्तीय आधार, विस्तारित भौतिक और डिजिटल अवसंरचना तथा उभरती दुनिया में अद्वितीय उद्यमशीलता के साथ संरचनात्मक रूप से गहराई में स्थित है।'
'वैश्विक दबावों, संरक्षणवादी टैरिफ, वस्तुओं की कीमतों में अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत ने स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ अपनी दिशा बनाए रखी है। इस आत्मविश्वास का एक बड़ा कारण भारत की स्वतंत्र विदेश नीति है, जो रणनीतिक स्वायत्तता का एक आदर्श बन चुकी है। साथ ही, भारत की सैन्य क्षमता और निर्णायक रणनीतिक रुख ने उसे एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
भारत किसी एक गुट से जुड़े बिना वह सभी प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संवाद और सहयोग करता है और उसकी यह योग्यता वैश्विक बहसों को आकार देते हुए अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करने के योग्य बनाता है।'
'समान रूप से, भारत की सैन्य क्षमता और निर्णायक रणनीतिक रुख ने उसे एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में और अधिक सुदृढ़ किया है। ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक तनाव तेजी से आर्थिक व्यवधान में बदल सकते हैं, भारत की तैयारी और दृढ़ संकल्प सुरक्षा और स्थिरता के एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में कार्य करते हैं।'
'इसी वक्त, भारत ने हमारे समय की प्रमुख चुनौतियों खासकर जलवायु परिवर्तन पर अपनी नेतृत्व की क्षमता दिखाई है। हमारी आक्रामक नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी रणनीति और सीओपी मंचों पर हमारी प्रतिबद्धताएं दर्शाती हैं कि भारत वैश्विक जलवायु एजेंडे में केवल भागीदार नहीं है बल्कि उसे प्रभावित भी कर रहा है। हम वृद्धि का एक मॉडल तैयार कर रहे हैं जो कि केलव उच्च प्रदर्शन वाला नहीं बल्कि भविष्य के लिहाज से सुरक्षित भी है।'
'इस वर्ष की थीम ‘नैविगेटिंग जियोइकोनॉमिक्स’ बिल्कुल उपयुक्त है। दुनिया आज ऐसे युग में प्रवेश कर चुकी है जहां अर्थशास्त्र और भू-राजनीति एक-दूसरे से अलग नहीं रह गए हैं। जो राष्ट्र आर्थिक दूरदर्शिता को भू-राजनीतिक समझ के साथ जोड़ पाएंगे, वही भविष्य को आकार देंगे, और भारत निश्चित रूप से उनमें से एक है।'
'इस कॉन्क्लेव के दौरान, हमारा उद्देश्य इन परिवर्तनों को समझना और यह तलाशना है कि भारत अपनी जनसांख्यिकीय शक्ति, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र, विनिर्माण महत्वाकांक्षा, सुधारों की गति और कूटनीतिक कुशलता का उपयोग कर एक अग्रणी वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को कैसे और मजबूत कर सकता है।'
'टाइम्स नेटवर्क की ओर से, मैं हमारी मुख्य अतिथि, माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस निर्णायक समय में अपनी उपस्थिति से हमें गौरवान्वित किया और भारत की आर्थिक संरचना को सशक्त दिशा देने में अपने दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया। मैं यहां उपस्थित सभी प्रतिष्ठित वक्ताओं, साझेदारों और प्रतिनिधियों का भी स्वागत करता हूं, जो भारत की अगली छलांग से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्श को आकार देने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं।'
'देवियो और सज्जनो, जैसे ही हम 2047 — हमारी स्वतंत्रता के 100 वर्ष — की ओर देखते हैं, हम एक ऐतिहासिक परिवर्तन के मुहाने पर खड़े हैं। हमारा मिशन स्पष्ट और अडिग है: यह लक्ष्य है स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को एक पूर्णतः विकसित, वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाना। भारत को आर्थिक रूप से सशक्त, रणनीतिक रूप से सुरक्षित, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार और वैश्विक रूप से सम्मानित राष्ट्र बनाना है। भारत का समय आ नहीं रहा बल्कि यह आ चुका है और हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत न केवल इस नए भू-आर्थिक युग में आगे बढ़े, बल्कि उसका नेतृत्व भी करे।'
'धन्यवाद, और मैं आप सभी को एक अत्यंत सार्थक और ज्ञानवर्धक इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव की शुभकामनाएं देता हूं।'
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