दुनिया के बीच भारत की अर्थव्यवस्था चमकी! IMF ने 2025 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.3% किया
- Authored by: रिचा त्रिपाठी
- Updated Jan 19, 2026, 04:06 PM IST
IMF ने भारत की आर्थिक तस्वीर को लेकर बड़ी राहत भरी खबर दी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वर्ष 2025 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7.3% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा समय में भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है।
India GDP Growth
दुनिया की नजरें इस वक्त भारत की इकोनॉमी पर टिकी हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के आर्थिक विकास के अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किया है। IMF ने अपने विश्व आर्थिक पूर्वानुमान (World Economic Outlook) में कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025 में 7.3 फीसदी की दर से बढ़ेगी, जो पहले अनुमान से 0.7 फीसदी ज्यादा है। इस बदलाव से यह साफ़ होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत गति पकड़े हुए है और वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बेहतर प्रदर्शन कर रही है।
IMF के अनुसार भारत में तीसरी तिमाही (Q3) में कंपनियों की कमाई अपेक्षा से बेहतर रही, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बल मिला। साथ ही चौथी तिमाही (Q4) में भी सकारात्मक रुझान दिखे, जिसका असर अगला पूरा साल पर पड़ेगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि दुनिया में टैरिफ (आयात शुल्क) और व्यापार तनाव जैसे मुद्दे हैं, IMF ने कहा कि इन प्रभावों को वैश्विक अर्थव्यवस्था ने काफी हद तक सहन कर लिया है। यही वजह है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत स्थिर दिख रही है, जिससे उभरती बाजारों को भी फायदा मिला।
IMF ने क्या कहा?
IMF की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक विकास लगभग 3.3 प्रतिशत रहेगा, जिसमें अमेरिका और चीन की भूमिका प्रमुख रहेगी। इससे पता चलता है कि दुनिया की बड़ी इकोनॉमी भी कुछ हद तक स्थिर हो रही हैं, जो भारत जैसे बड़े उभरते बाजार के लिए अच्छा संकेत है।
भारत के इस नये अनुमान को कई अर्थशास्त्री “ग्रीन शूट्स” यानी विकास के शुरुआती संकेतों के रूप में देखते हैं। जब कंपनियों की कमाई मजबूत होती है, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ता है, जिससे शेयर बाजार में स्थिरता आती है और नई पूंजी प्रवाह संभव होती है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था में विश्वास पैदा करती है, जो कि दीर्घकालिक विकास के लिए जरूरी है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा
IMF ने यह भी माना कि कुछ अल्पकालिक और चक्रीय कारण (cyclical and temporary factors) आगे चलकर कमजोर हो सकते हैं, जिससे 2026 और 2027 की वृद्धि दर थोड़ा धीमी हो सकती है। इसका मतलब है कि 2025 के बाद विकास की गति सामान्य स्तर पर लौट सकती है, लेकिन अभी के लिए यह एक सकारात्मक बदलाव है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में इस मजबूत ग्रोथ के पीछे घरेलू मांग, सेवाओं का विस्तार, निजी निवेश और निर्यात में सुधार जैसे कारक काम कर रहे हैं। जब घरेलू बाजार और खपत दोनों मजबूत रहते हैं, तो यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर आधार प्रदान करता है। इस वजह से भारत विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की सूची में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।
AI और टेक्नोलॉजी से अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा
वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में टेक्नोलॉजी, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एक अहम भूमिका निभा रही है। IMF के मुताबिक, अगर AI का सही तरीके से उपयोग किया गया और इस क्षेत्र में निवेश लगातार बढ़ता रहा, तो यह दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत जैसे उभरते देशों के लिए भी बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।
भारत में टेक्नोलॉजी से जुड़ा निवेश और डिजिटल ट्रेडिंग तेजी से बढ़ रही है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है। हालांकि, इसके साथ एक जोखिम भी जुड़ा हुआ है। अगर AI को लेकर बनाई गई ऊंची उम्मीदें पूरी नहीं हो पाईं, तो निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है और इसका असर बाजार व अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे सकता है।
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