इनकम टैक्स

ITR: पुरानी टैक्स व्यवस्था से नई टैक्स व्यवस्था में कैसे करें शिफ्ट

Income Tax Return Filing: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नया इनकम टैक्स बिल 2025 संसद में पेश कर दिया है। इससे पहले 12 लाख तक की आय को इनकम टैक्स फ्री कर दिया है। आइए जानते हैं पुरानी टैक्स रिजीम से नए टैक्स रिजीम में शिफ्ट करने के लिए क्या-क्या करना होगा।

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पुरानी टैक्स व्यवस्था से नई टैक्स में कैसे जाएं (तस्वीर-Canva)

Income Tax Return Filing: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा फाइनेंस बिल 2025 में पेश किए गए प्रस्तावों को हितधारकों द्वारा उनके टैक्स-अनुकूल दृष्टिकोण के लिए व्यापक रूप से सराहा गया है, विशेष रूप से इनकम टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 115BAC के तहत टैक्स लगाने वालों के लिए। नए इनकम टैक्स बिल में किए गए प्रस्ताव अधिक आकर्षक लगते हैं क्योंकि उन्होंने टैक्स दरों को सीमित कर दिया है जो कि AY2026-27 से व्यापक टैक्स ब्रैकेट पर लागू होंगे।

एक्सपर्ट के मुताबिक हालांकि किसी को इनकम टैक्स के सेक्शन 115BAC के तहत टैक्स लगाने का विकल्प चुनने पर छूट देने वाली कटौतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए सावधान रहने की जरुरत है। कुछ परिदृश्यों में पुरानी टैक्स व्यवस्था अभी भी नई व्यवस्था की तुलना में तुलनात्मक लाभ प्रदान कर सकती है। दूसरी ओर एक परिदृश्य ऐसा भी होगा जिसमें प्रस्तावित नई टैक्स व्यवस्था के तहत टैक्स योग्य आय टैक्सपेयर्स के लिए फायदेमंद होगी। इस संबंध में निम्नलिखित प्रमुख स्टेप्स हैं जिनका पालन किसी व्यक्ति को अपनी इनकम टैक्स लायबलिटी को ऑप्टिमाइज करने के लिए करना चाहिए:-

  • स्टेप-1: वित्तीय वर्ष के दौरान किए जाने वाले निवेश और व्यय की लिस्ट बनाएं।
  • स्टेप-2: उन खर्च या निवेश की राशि का मूल्यांकन करें जो पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत कटौती/छूट पाने के योग्य हैं, लेकिन नई टैक्स व्यवस्था के तहत नहीं।
  • स्टेप-3: पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत ऑप्टिमम टैक्स लायबलिटी का मूल्यांकन करने के लिए एक तुलनात्मक चार्ट तैयार करें। इस संबंध में कोई व्यक्ति इनकम टैक्स वेबसाइट के तहत उपलब्ध टैक्स कैलकुलेटर का उपयोग करना चुन सकता है।

अंत में, यह उजागर करना महत्वपूर्ण है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115BAC, जो नई टैक्स व्यवस्था से संबंधित है, डिफॉल्ट रूप से लागू होती है जब तक कि टैक्सपेयर्स विशिष्ट परिदृश्यों के तहत बाहर निकलने का विकल्प नहीं चुनता:-

बिजनेस इनकम वाले टैक्सपेर्स के लिए: उन्हें पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने के लिए एक निर्धारित फॉर्म दाखिल करना होगा। अगर वे नई व्यवस्था से बाहर निकलते हैं, तो वे जरूरी फॉर्म दाखिल करके केवल एक बार वापस आ सकते हैं।

बिना बिजनेस इनकम वाले टैक्सपेयर्स के लिए: वे अपना आईटीआर दाखिल करते समय पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन कर सकते हैं और हर वर्ष दोनों व्यवस्थाओं के बीच चयन करने की सुविधा रखते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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