जमीन या प्लॉट खरीदना हर व्यक्ति का बड़ा सपना होता है, लेकिन कई बार यही खरीद आपके लिए परेशानी भी बन सकती है। अगर आपने 30 लाख रुपये से ज्यादा कीमत की जमीन खरीदी है, तो इनकम टैक्स विभाग की नजर आप पर जरूर रहती है। इसकी वजह यह है कि रजिस्ट्रार ऑफिस जमीन खरीद-बिक्री से जुड़ी बड़ी डील की जानकारी सीधे टैक्स विभाग को भेज देता है। यह पूरी जानकारी आपके वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में भी दर्ज हो जाती है। इसके बाद विभाग चेक करता है कि आपकी आय इस बड़े निवेश को सपोर्ट करती है या नहीं। अगर कुछ गड़बड़ दिखती है, तो आपको नोटिस भेजा जा सकता है।
जब कोई व्यक्ति 30 लाख रुपये से ऊपर की जमीन खरीदता है, तो यह ट्रांजैक्शन अपने आप टैक्स सिस्टम में रिकॉर्ड हो जाता है। पिछले कुछ सालों में इनकम टैक्स की मॉनिटरिंग काफी सख्त हो गई है, और बड़े निवेश को तुरंत स्कैन किया जाता है। अगर आपकी इनकम के हिसाब से यह खरीद बड़ी दिख रही है या अचानक खर्च बढ़ा है, तो विभाग आपसे “Source of Funds” यानी पैसे का स्रोत पूछ सकता है।
कई बार लोग जमीन खरीदने के लिए वर्षों की बचत, रिश्तेदारों से मिले पैसे, पर्सनल लोन, या किसी संपत्ति को बेचकर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अगर यह जानकारी ITR में नहीं दिख रही होती, तो नोटिस आ सकता है।
इनकम टैक्स का नोटिस ज्यादातर तब आता है जब आपकी घोषित आय और किए गए बड़े निवेश के बीच कोई बड़ा अंतर दिखाई देता है। कई लोग जमीन खरीदते समय पुराने बचत के पैसे, माता-पिता या रिश्तेदारों से मिली रकम, विरासत में मिली संपत्ति या सोना–शेयर बेचकर मिली राशि का रिकॉर्ड ITR में नहीं दिखाते, जिससे विभाग को शक होता है। अगर जमीन की खरीद कीमत स्टांप ड्यूटी वैल्यू से बहुत कम दिखाई गई है, तो यह भी जांच का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में टैक्स विभाग आपकी पिछले 3 साल तक की इनकम की जांच कर सकता है और यदि खरीद 50 लाख रुपये से अधिक की हो, तो यह जांच 10 साल तक पीछे जा सकती है। इतना ही नहीं, यदि स्टांप वैल्यू खरीद कीमत से 10% से ज्यादा है, तो उस अंतर को “Income from Other Sources” मानकर आप पर टैक्स भी लगाया जा सकता है।
नोटिस आने पर घबराने की जरूरत नहीं होती, बस समय पर और सही तरीके से जवाब देना जरूरी है। सबसे पहले नोटिस को ध्यान से पढ़ें और समझें कि इनकम टैक्स विभाग किस बात का सबूत या दस्तावेज मांग रहा है। इसके बाद जरूरी कागज़ जैसे बैंक स्टेटमेंट, लोन एग्रीमेंट, गिफ्ट डीड, सोना या शेयर बेचने के सबूत, परिवार से मिली रकम के दस्तावेज और विरासत में मिली संपत्ति के कागज़ एक जगह इकट्ठा कर लें। अगर नोटिस का जवाब देने के लिए समय कम पड़ रहा है, तो कम से कम एक acknowledgment फाइल करके समय बढ़ाने की रिक्वेस्ट कर दें। और अगर मामला थोड़ा जटिल लगे, तो किसी CA या टैक्स एक्सपर्ट की मदद जरूर लें, क्योंकि नोटिस को नजरअंदाज करने पर पेनल्टी भी लग सकती है।
अगर जमीन शहर की सीमा के अंदर है, तो उसे कैपिटल एसेट माना जाता है और इसकी पूरी रिपोर्टिंग जरूरी है। ग्रामीण जमीन पर नियम थोड़े अलग होते हैं, लेकिन अगर खरीद रकम बड़ी है या सोर्स साफ नहीं है, तो वहां भी टैक्स विभाग सवाल पूछ सकता है।
आज के समय में जब हर लेन-देन रिकॉर्ड हो जाता है, तो बेहतर है कि पहले से तैयारी रखें।
1. मनी ट्रेल रखें – हर बड़ी रकम का डिजिटल रिकॉर्ड रखें।
2. दस्तावेज सही रखें – गिफ्ट, लोन या परिवार से मिली मदद, हर चीज की लिखित प्रूफ रखें।
3. ITR अपडेट रखें – अगर आपको कोई बड़ी रकम मिली है, उसे ITR में दिखाना न भूलें।
4. बड़ी खरीद से पहले सलाह लें – जमीन खरीद से पहले अपने CA से बात करना समझदारी है।
5. इनकम सोर्स साफ रखें – अगर आपकी आय के स्रोत कई हैं, तो पेशेवर सलाह लेना और भी जरूरी है।