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Diesel Petrol के दाम बढ़ने का किस सेक्टर के शेयरों पर क्या असर, कौन देगा झटका, कहां से राहत संभव

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने शुक्रवार से पूरे देश में डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए हैं। यहां चेक करें ईंधन की बढ़ी हुई कीमत का अलग-अलग सेक्टर पर क्या असर होगा?

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डीजल पेट्रोल के दामों का क्या होगा असर

देश में Diesel Petrol की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर महंगाई, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट और कॉर्पोरेट मार्जिन पर नई चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में पेट्रोल ₹97.77 और डीजल ₹90.67 पर पहुंच गया है, जबकि वैश्विक कच्चे तेल में भी हालिया उछाल बना हुआ है। ऐसे माहौल में शेयर बाजार में सेक्टर-वाइज रिएक्शन साफ दिख सकता है।

सबसे पहले किस सेक्टर पर चोट

सबसे सीधा झटका ऑटो, ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सेक्टर को लग सकता है। पेट्रोल महंगा होने से निजी वाहनों की चलाने की लागत बढ़ती है, जबकि डीजल की बढ़ोतरी ट्रकिंग, सप्लाई चेन और मालभाड़े पर दबाव डालती है। महिंद्रा, टाटा मोटर्स, आयशर, मारुती सुजुकी, हुंडई जैसे ऑटो खिलाड़ियों ने पहले ही कमोडिटी कॉस्ट और ईंधन महंगाई से मार्जिन प्रेशर की चेतावनी दी है, और एंट्री-लेवल सेगमेंट पर जोखिम बढ़ा है।

एयरलाइंस पर भी दबाव बढ़ना तय है, क्योंकि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) जैसे ईंधन-लिंक्ड खर्च बढ़ते ही कंपनियों को किराया बढ़ाना पड़ता है या आउटलुक घटाना पड़ता है। एयरलाइंस ईंधन लागत के उछाल से किराया बढ़ाने और गाइडेंस घटाने तक की रणनीति अपना रही हैं। इंडिगो जैसे लिस्टेड शेयरों पर इसका असर दिख सकता है।

पेंट, केमिकल और FMCG स्टॉक्स पर भी दबाव

कच्चे तेल से जुड़े इनपुट महंगे होने पर पेंट, केमिकल, पैकेजिंग और कई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की लागत बढ़ती है। तेल के दाम में बढ़ोतरी पेंट से सीमेंट और फ्लाइट से फ्रेट कॉस्ट तक बढ़ा रही है, जबकि कुछ क्रूड-लिंक्ड इनपुट की कीमतें पहले ही तेजी से ऊपर गई हैं। इसका असर मार्जिन पर आता है और कंपनियों को कीमत बढ़ाने की मजबूरी बन सकती है।

किन शेयरों को मिल सकती है राहत

सीधी राहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) यानी IOC, BPCL और HPCL जैसे स्टॉक्स को मिल सकती है, क्योंकि सरकार और कंपनियों ने खुद माना है कि रिटेल फ्यूल कीमतें लंबे समय से लागत से नीचे थीं और नुकसान झेलना पड़ रहा था। पेट्रोल-डीजल में बढ़ोतरी से अंडर रिकवरी कम हो सकती है। इसके साथ ही अपस्ट्रीम ऑयल प्रोड्यूसर जैसे Oil India को ऊंचे क्रूड रेशनलाइजेशन का फायदा मिल सकता है। Oil India का मुनाफा हाई रियलाइजेशन से बढ़ा है और एनालिस्ट्स को अपस्ट्रीम फर्म्स के लिए फायदा दिख रहा है।

बाजार को राहत कहां से मिल सकती है

राहत की सबसे बड़ी चाबी कच्चे तेल के नरम पड़ने, रुपये की स्थिरता और सरकारी टैक्स राहत में है। भारत 90 फीसदी तक क्रूड आयात करता है। लिहाजा, क्रूड में गिरावट आते ही घरेलू महंगाई और रुपये पर दबाव घट सकता है। दूसरी तरफ, अप्रैल में रिटेल और होलसेल महंगाई में इजाफा हुआ है। जब क्रूड कम होगा, तो ये महंगाई के आंकड़े भी नरम पड़ सकते हैं, जिन्हें बाजार पॉजिटिव लेगा। लेकिन, इसका असर आने में पूरी एक तिमाही लग सकती है। बहरहाल, अगर क्रूड के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर ही बने रहते हैं, तो RBI पर भी ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है।

इस तरह यह ईंधन के दाम बढ़ने से बाजार में विनर और लूजर्स की एक नई कहानी बनते हुए दिख सकती है, जहां लॉजिस्टिक्स, एविएशन, ऑटो और पेंट जैसे सेक्टर दबाव में रह सकते हैं, जबकि OMC और ऑयल एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन से जुड़ी कंपनियों को आंशिक राहत मिल सकती है। हालांकि, असली ट्रेंड सेटर अब भी क्रूड के दाम रहेंगे।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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