जब भी किसी बैंक की माली हालत खराब होती है या उसके बंद होने की खबरें आती हैं, तो सबसे पहले लोगों को अपने बचत खाते (Savings Account) में जमा खून-पसीने की कमाई की चिंता सताने लगती है। लेकिन एक बड़ा डर उन लोगों के मन में भी होता है जिन्होंने बैंक के सेफ डिपॉजिट लॉकर (Safe Deposit Locker) में अपने पुरखों के सोने के गहने, पुश्तैनी जेवर या जमीन-जायदाद के जरूरी कागज रखे हुए हैं। लोगों के मन में यह सवाल बार-बार आता है कि अगर बैंक कंगाल हो गया, तो क्या लॉकर में रखा सोना भी बैंक के घाटे की भेंट चढ़ जाएगा?
बैंक और ग्राहक का रिश्ता
बैंक में लॉकर और बैंक खाते के बीच एक बहुत बड़ा बुनियादी और कानूनी अंतर होता है। जब आप बैंक के बचत खाते या एफडी (FD) में पैसा जमा करते हैं, तो आप बैंक को पैसा 'उधार' दे रहे होते हैं और वह बैंक की देनदारी (Liability) बन जाता है। लेकिन लॉकर के मामले में बैंक और आपके बीच का रिश्ता 'मकान मालिक और किराएदार' जैसा होता है। बैंक आपको सिर्फ एक सुरक्षित लोहे की अलमारी किराए पर देता है। लॉकर के अंदर क्या रखा है, इसकी जानकारी बैंक को नहीं होती और न ही उस सामान पर बैंक का कोई मालिकाना हक होता है। इसलिए, कानूनन अगर बैंक डूबता है या दिवालिया होता है, तो वह आपके लॉकर में रखे गहनों को हाथ नहीं लगा सकता। वह आपकी निजी संपत्ति है और बैंक के लेनदार (जिनका बैंक पर कर्ज है) उस पर अपना दावा नहीं कर सकते।
₹5 लाख का बीमा
अक्सर लोग इस बात को लेकर भ्रमित रहते हैं कि बैंक डूबने पर सरकार सिर्फ ₹5 लाख ही वापस करती है। यह नियम (DICGC Insurance) केवल आपके बैंक खाते में जमा नकद राशि, बचत और एफडी पर लागू होता है। लॉकर इस नियम के दायरे में आता ही नहीं है। चूंकि लॉकर में रखा सोना बैंक की संपत्ति की लिस्ट में शामिल ही नहीं होता, इसलिए इसे बैंक के किसी भी नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। अगर कोई बैंक पूरी तरह बंद भी हो जाता है, तो नियुक्त किया गया लिक्विडेटर (बैंक की संपत्ति का निपटारा करने वाला अधिकारी) आपको आधिकारिक सूचना देगा और आपको अपना लॉकर खाली करके सामान ले जाने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा।
चोरी, आग या लापरवाही पर क्या है नियम?
भले ही बैंक डूबने पर आपका सोना सुरक्षित रहे, लेकिन अगर बैंक में चोरी हो जाए या आग लग जाए, तो क्या होगा? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियमों ने अब ग्राहकों को बहुत बड़ी सुरक्षा दी है। अब बैंकों की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। अगर बैंक की लापरवाही, स्टाफ की मिलीभगत, चोरी या आग जैसी घटनाओं के कारण लॉकर को नुकसान पहुंचता है, तो बैंक को ग्राहक को लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना तक मुआवजा देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर आपके लॉकर का सालाना किराया ₹3,000 है, तो बैंक को आपको ₹3 लाख तक का हर्जाना देना पड़ेगा। हालांकि, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में बैंक की सीधी जिम्मेदारी नहीं होती, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखना उनकी ड्यूटी है।
कुछ सावधानियां जो आपको रखनी चाहिए
कानून आपकी तरफ है, लेकिन आपकी सतर्कता भी जरूरी है। सबसे पहले, अपने लॉकर में रखे सामान की एक सूची (List) अपने पास जरूर रखें। दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपने लॉकर में हमेशा एक नॉमिनी (Nominee) का नाम जरूर दर्ज करवाएं। यह इसलिए जरूरी है ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में आपके परिवार को सामान हासिल करने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई या अदालती चक्कर न काटने पड़ें। इसके अलावा, अपने महंगे गहनों का अलग से पर्सनल इंश्योरेंस (Jewellery Insurance) करवाना भी एक समझदारी भरा कदम है, क्योंकि बैंक का मुआवजा केवल किराए के आधार पर तय होता है, जो शायद आपके गहनों की वास्तविक कीमत से बहुत कम हो।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। बिज़नेस (Business News) अपडेट और आज का सोने का भाव (Gold Rate Today), आज की चांदी का रेट (Silver Rate Today) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
