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8th Pay Commission में बदलेगा HRA का गणित, समझिए सैलरी पर होने वाला सीधा असर

देशभर के लाखों कर्मचारी 8वें वेतन आयोग लागू होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके लागू होने से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

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8वां वेतन आयोग

8th Pay Commission लागू होने की प्रक्रिया तेज हो गई है। वेतन आयोग ने कर्मचारी संगठनों से मिले सुझावों और विचारों पर विचार कर रहा है। नए वेतन आयोग में एक अहम मांग जो जोर पकड़ रही है, वह है हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में बड़े बदलाव का है। नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के HRA को मौजूदा हाउसिंग स्थितियों के अनुरूप बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों और संशोधनों का सुझाव दिया है। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, HRA का मौजूदा ढांचा अब कई बड़े शहरों में बढ़ते किराए या तेजी से बढ़ती महंगाई के साथ तालमेल बिठाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस स्थिति से निपटने के लिए, कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कई सुझाव दिए हैं।

HRA के नियमों में 5 बदलावों की मांग

प्रस्तावविवरण
वास्तविक किराए से जुड़ा HRAकर्मचारियों को मिलने वाले HRA और बाजारके बीच के अंतर को कम किया जाए
जनसंख्या के आधार पर संशोधित HRA दरेंX श्रेणी (50 लाख या अधिक आबादी) के शहरों के लिए 40% HRA, Y श्रेणी (5 लाख से 50 लाख आबादी) के शहरों के लिए 35% HRA और Z श्रेणी (5 लाख से कम आबादी) के शहरों के लिए 30% HRA
DA से जुड़ा HRAHRA को महंगाई भत्ते (DA) से जोड़ा जाए ताकि महंगाई के अनुसार इसमें स्वतः वृद्धि हो सके
हर 5 साल में शहरों की समीक्षा और वर्गीकरणजनसंख्या वृद्धि और आवास लागत के आधार पर शहरों का समय-समय पर पुनर्वर्गीकरण किया जाए
पेंशनभोगियों को HRAसेवानिवृत्ति के बाद अधिक किराया खर्च करने वाले पेंशनभोगियों को भी HRA का लाभ दिया जाए।

एचआरए नियम में बदलाव की मांग क्यों?

कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले कुछ सालों में घर के खर्च और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई तेजी से बढ़ी है। HRA में किए गए बदलाव और सुधार महंगाई के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रहे हैं। उनका मानना है कि अगर HRA को DA (महंगाई भत्ता) से जोड़ दिया जाए और साथ ही शहरों के वर्गीकरण को भी समय-समय पर अपडेट किया जाए, तो भत्ते तेजी से बदलती आर्थिक स्थितियों के हिसाब से बेहतर ढंग से तय हो सकेंगे।

रेलवे सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर सोसाइटी ने भी शहरी इलाकों में तेजी से बढ़ती जीवन-यापन की लागत और महंगाई का हवाला देते हुए HRA और दूसरे संबंधित भत्तों की नियमित समीक्षा का समर्थन किया है। इसका मुख्य मकसद केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और वेतन को आज की हकीकत के अनुरूप बनाना है। अगर इन प्रस्तावों पर विचार करके इन्हें मंजूरी दी जाती है, तो ये 8वें वेतन आयोग के तहत HRA के ढांचे में काफी बदलाव ला सकते हैं, जिससे देश भर में बढ़ती महंगाई का सामना कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मदद मिल सकती है।

कम से कम वेतन ₹69,000 करने की मांग

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि महंगाई, घर के बढ़ते खर्च और पिछले दशक में खर्च करने के तरीकों में आए बदलावों को देखते हुए कम से कम वेतन ₹69,000 की जानी चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस बार कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वेतन में बदलाव के अलावा, NC-JCM मेमोरेंडम में पेंशन से जुड़ी कई मांगें भी शामिल हैं। बता दें कि कर्मचारी यूनियनों की तरफ से दी गई सिफारिशें सिर्फ प्रस्ताव हैं, न कि मंजूर किए गए बदलाव। वेतन, भत्ते और पेंशन का फाइनल स्ट्रक्चर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों और उन्हें लागू करने पर केंद्र सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।

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