भारत में लंबी दूरी की यात्रा के लिए Indian Railway ट्रेन आज भी सबसे भरोसेमंद और सस्ता साधन है। लेकिन समस्या तब आती है जब त्योहारों, छुट्टियों या शादियों के सीजन में टिकट बुक करने की बारी आती है। IRCTC की वेबसाइट पर बुकिंग शुरू होते ही कुछ ही सेकंड्स में टिकटें 'वेटिंग' (Waiting Ticket) में चली जाती हैं। ऐसे में यात्री अक्सर इंटरनेट पर वायरल होने वाले तरह-तरह के ‘जुगाड़’ और ट्रिक्स का सहारा लेते हैं। इन ट्रिक्स का उद्देश्य बस एक ही होता है किसी भी तरह एक कंफर्म बर्थ मिल जाए। लेकिन क्या ये तरीके सच में जादुई रूप से काम करते हैं या ये सिर्फ समय की बर्बादी हैं?
समय बचाने का सबसे सटीक तरीका
टिकट बुकिंग में सबसे महत्वपूर्ण होता है 'समय'। जब आप तत्काल या ओपनिंग बुकिंग (120 दिन पहले) करते हैं, तो यात्री का नाम, उम्र और अन्य जानकारी भरने में जो 30-40 सेकंड लगते हैं, वही तय करते हैं कि टिकट कंफर्म होगी या नहीं। यहाँ काम आती है 'मास्टर लिस्ट'। अनुभवी यात्री IRCTC के 'My Profile' सेक्शन में जाकर पहले से ही सभी यात्रियों की जानकारी सेव कर लेते हैं। बुकिंग के समय उन्हें बस नाम सिलेक्ट करना होता है। यह कोई गलत तरीका नहीं है, बल्कि IRCTC द्वारा दी गई एक सुविधा है जो सच में काम आती है और कंफर्म टिकट की संभावना को 80% तक बढ़ा देती है।
ऑटो-अपग्रेडेशन
टिकट बुक करते समय एक छोटा सा चेकबॉक्स होता है 'Consider for Auto-Upgradation'। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह एक बेहतरीन जुगाड़ है। इसका मतलब यह है कि अगर आपने स्लीपर क्लास की टिकट बुक की है और वह वेटिंग में है, लेकिन थर्ड एसी (3AC) में सीटें खाली हैं, तो रेलवे आपको बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के थर्ड एसी में कंफर्म सीट दे सकता है। यह तरीका पूरी तरह से भाग्य पर निर्भर है, लेकिन इसे चुनना हमेशा फायदेमंद रहता है क्योंकि इसमें खोने के लिए कुछ नहीं है।
विकल्प (VIKALP) स्कीम
रेलवे की 'विकल्प' योजना उन यात्रियों के लिए है जिनकी टिकट वेटिंग में रह जाती है। इस जुगाड़ के तहत, आप उसी रूट पर चलने वाली अन्य ट्रेनों (जैसे राजधानी या दुरंतो) को चुन सकते हैं। अगर आपकी मूल ट्रेन में टिकट कंफर्म नहीं होती, तो रेलवे आपको दूसरी ट्रेन में कंफर्म सीट दे सकता है। लोग अक्सर इसे इसलिए नहीं चुनते क्योंकि उन्हें लगता है कि शायद दूसरी ट्रेन का समय उनके अनुकूल न हो, लेकिन कंफर्म टिकट के लिए यह एक बहुत ही व्यावहारिक तरीका है।
बोर्डिंग पॉइंट बदलना और अल्टरनेटिव रूट्स
एक बहुत पुराना और मशहूर जुगाड़ है 'बोर्डिंग पॉइंट' बदलना। मान लीजिए आपको दिल्ली से पटना जाना है और दिल्ली से टिकट वेटिंग है, तो लोग अक्सर उससे पिछले स्टेशन (जैसे आनंद विहार या पुरानी दिल्ली के बजाय किसी अन्य शुरुआती स्टेशन) से टिकट चेक करते हैं। कभी-कभी पिछले स्टेशनों का कोटा अलग होता है जहाँ सीटें खाली मिल जाती हैं। आप टिकट पिछले स्टेशन से बुक करके अपना बोर्डिंग पॉइंट दिल्ली रख सकते हैं। इसके अलावा, लोग सीधे रूट के बजाय 'ब्रेक जर्नी' का जुगाड़ भी लगाते हैं, जहाँ दो अलग-अलग ट्रेनों के जरिए मंजिल तक पहुँचा जाता है।
पेमेंट के लिए UPI का उपयोग
तत्कल बुकिंग में सबसे ज्यादा समय पेमेंट गेटवे पर खराब होता है। लोग अक्सर डेबिट या क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स भरने बैठ जाते हैं, तब तक टिकट खत्म हो जाती है। स्मार्ट यात्री 'UPI' (Google Pay, PhonePe) का उपयोग करते हैं। जैसे ही आप अपना UPI ID डालते हैं, आपके फोन पर नोटिफिकेशन आता है और एक पिन डालते ही पेमेंट हो जाता है। यह सेकंड्स का अंतर ही कंफर्म और वेटिंग टिकट के बीच की दीवार होता है।
