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नो एक्स्ट्रा चार्ज, नो टेंशन: EMI बाउंस से बचने का ये है सबसे आसान फॉर्मूला!

Avoid EMI Bounce Charges: अगर कुछ खास बातों का ध्यान रखा जाए तो लोन लेने के बाद ईएमआई को लेकर बाउंस चार्जेस से बचा जा सकता है। ऑटोमेटिक पेमेंट, पर्याप्त बैलेंस, स्मार्ट बजट और निवेश के जरिए न केवल बाउंस चार्जेस से बच सकते हैं, बल्कि अपनी क्रेडिट हिस्ट्री भी मजबूत रख सकते हैं।

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ईएमआई बाउंस चार्जेस से बचने का स्मार्ट प्लान (Photo: AI Generated)

Avoid EMI Bounce Charges: जब आप लोन लेते हैं तो EMI (Equated Monthly Installment) समय पर चुकाना भी आपकी एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है। क्योंकि अगर EMI बाउंस होती है तो बैंक या लोन कंपनी EMI bounce charges वसूलना शुरू कर देती है। ईएमआई बाउंस चार्जेस से न केवल आपका आर्थिक नुकसान होता है बल्कि आपके क्रेडि स्कोर पर भी इसका असर पड़ता है। आपके साथ ऐसा न हो इसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रख सकते हैं-

EMI पेमेंट को ऑटोमेट करें

हर महीने मैन्युअली EMI देने की बजाय इसे ऑटो डेबिट पर सेट करना सबसे सुरक्षित तरीका है। बैंक को standing instruction देकर आपकी EMI राशि हर महीने तय तारीख को अपने आप लोन कंपनी के खाते में ट्रांसफर हो जाती है। इससे आप EMI चूकने की संभावना को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं और bounce charges से बच सकते हैं।

बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस रखें

EMI आमतौर पर लोन की ड्यू डेट पर सुबह खाते से डेबिट होती है। इसलिए हर महीने EMI से पहले अपने बैंक खाते का बैलेंस चेक करें और सुनिश्चित करें कि पर्याप्त राशि उपलब्ध हो। अगर खाते में पर्याप्त पैसे नहीं होंगे तो EMI बाउंस हो जाएगी और बैंक द्वारा bounce message भेजा जाएगा।

बजट प्लानिंग करें

लोन लेने से पहले ही एक मजबूत repayment plan तैयार करना बेहद जरूरी है। अनावश्यक खर्च जैसे यात्रा, डाइन-आउट या इम्पल्सिव शॉपिंग को कम करें। EMI कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर यह तय करें कि आपकी मासिक आय के अनुसार कितनी EMI आप आसानी से चुका सकते हैं। इसके आधार पर ऐसी लोन अवधि चुनें, जिसमें EMI आपकी बजट में फिट हो और आप पर वित्तीय दबाव भी न आए।

निवेश से मदद लें

अगर संभव हो तो ऐस योजनाओं में निवेश करें जिन पर रिटर्न लोन की ब्याज दर से अधिक हो। मासिक या तिमाही आधार पर payout चुनें। इस निवेश के रिटर्न का इस्तेमाल लोन की ब्याज राशि चुकाने में किया जा सकता है, जिससे EMI का भुगतान सरल हो जाता है और bounce charges से बचा सकता है।

लोन कंपनी से बातचीत करें

अगर किसी महीने वित्तीय परेशानी आ जाए तो अपने लोन प्रोवाइडर से संपर्क करें। उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट बताई जा सकती है। कई बार बैंक या लोन कंपनी EMI की तारीख बदलने या repayment term को reschedule करने की सुविधा देती है, जिससे भुगतान आसान और bounce charges से बचा जा सकता है।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनाला author

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने ... और देखें

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