जब भी लोग पर्सनल लोन लेने का सोचते हैं, उनके दिमाग में सबसे पहला सवाल यही आता है कि लोन कितने साल के लिए लेना चाहिए। कम समय का लोन EMI बढ़ा देता है, जबकि लंबी अवधि का लोन EMI को तो कम करता है लेकिन कुल ब्याज बहुत ज़्यादा देना पड़ता है। ऐसे में सही टेन्योर चुनना जरूरी है ताकि आपकी जेब पर कम बोझ पड़े और आप आराम से EMI चुका सकें। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि आपको कितने साल के लिए पर्सनल लोन लेना चाहिए?
कितने साल के लिए मिलता है PL?
पर्सनल लोन आमतौर पर 1 साल से लेकर 5 साल तक की अवधि में मिलता है। कुछ बैंक 6 या 7 साल तक का भी टेन्योर देते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग 2 से 5 साल के बीच का लोन ही चुनते हैं। लोन लेते समय सबसे पहले अपनी मासिक आय, खर्च और बचत का आकलन करें। आपको यह देखना होगा कि EMI आपकी सैलरी के 35–40% से ज़्यादा न हो, वरना बाकी खर्चों पर खतरा आ सकता है।
अब समझते हैं EMI और ब्याज का हिसाब। जब आप कम अवधि का लोन लेते हैं मान लीजिए 1 या 2 साल तो EMI थोड़ी बड़ी होती है, लेकिन अच्छा यह होता है कि आप कुल ब्याज बहुत कम चुकाते हैं। वहीं अगर आप लोन को 4 या 5 साल तक बढ़ा देते हैं, तो आपकी EMI तो काफी कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज दोगुना तक बढ़ सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि लोन की अवधि बहुत लंबी न रखें। EMI भले थोड़ी ज़्यादा हो, लेकिन ब्याज कम लगेगा।
ऐसे समझें EMI और इंटरेस्ट का कैलकुलेशन
मान लीजिए अगर किसी ने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 10% ब्याज पर लिया है तो 2 साल में EMI ज्यादा होगी, लेकिन कुल ब्याज लगभग 55–60 हजार ही लगेगा। वहीं 5 साल के लिए EMI कम हो जाएगी, लेकिन कुल ब्याज 1.3 लाख रुपये से भी ज़्यादा हो सकता है।
यानी EMI में थोड़ी राहत के चक्कर में आप ब्याज का बड़ा बोझ ले लेते हैं। इसलिए लोन की अवधि वही चुनें, जिसे आप बिना दबाव के चुका सकें और जिसमें ब्याज भी कम लगे।
इन चीजों से भी महंगा होता है लोन
इसके अलावा, लोन लेने से पहले प्रीपेमेंट चार्ज, प्रोसेसिंग फीस, और लेट पेमेंट पेनल्टी जरूर देख लें। कोशिश करें कि ऐसा लोन चुनें जिसमें पहले चुकाने पर ज्यादा शुल्क न लगे, ताकि जब भी आपको बोनस या अतिरिक्त पैसे मिलें, आप लोन जल्दी बंद कर सकें।
अंत में, पर्सनल लोन एक अच्छा वित्तीय विकल्प है, लेकिन सही अवधि चुनना ही असली समझदारी है। EMI आपकी क्षमता के अनुसार होनी चाहिए और कुल ब्याज जितना कम हो सके, उतना बेहतर है। सही प्लानिंग करके लिया गया लोन आपकी जरूरतें पूरी करता है, और गलत अवधि चुनी तो वही लोन बोझ बन सकता है।
