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एक EMI मिस होने से कितना ख़राब होता है सिबिल स्कोर?

क्या आप जानते हैं कि लोन या क्रेडिट कार्ड की सिर्फ एक EMI मिस होने से आपका सिबिल स्कोर कितना गिर सकता है? यह एक छोटी सी लापरवाही आपके क्रेडिट इतिहास को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

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EMI Miss

आज के दौर में अपनी जरूरतों और सपनों को पूरा करने के लिए लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करना बेहद आम बात हो गई है। घर खरीदना हो, कार लेनी हो या फिर कोई नया गैजेट, लोग आसानी से ईएमआई (EMI) का विकल्प चुन लेते हैं। लेकिन इस सुविधा के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी आती है, और वह है हर महीने समय पर अपनी किस्त का भुगतान करना। कई बार लोग लापरवाही में, बैंक खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने की वजह से या फिर किसी वित्तीय तंगी के कारण अपनी EMI मिस कर देते हैं। अगर आप भी इसे एक छोटी सी चूक मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। लोन की सिर्फ एक EMI बाउंस होना आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) यानी क्रेडिट स्कोर के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है। वित्तीय मामलों के जानकारों के मुताबिक, केवल एक बार की यह चूक आपके सालों की मेहनत से बनाए गए अच्छे क्रेडिट स्कोर को चंद दिनों में जमीन पर ला सकती है।

कितना होता है नुकसान?

जब बैंकिंग और लोन की बात आती है, तो सिबिल स्कोर को आपकी वित्तीय सेहत का आईना माना जाता है। क्रेडिट ब्यूरो के नियमों के अनुसार, आपके पूरे सिबिल स्कोर का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इस बात से तय होता है कि आपका 'पेमेंट इतिहास' (Payment History) कैसा है। इसका सीधा मतलब यह है कि आप अपने पुराने कर्जों की किस्तें समय पर चुका रहे हैं या नहीं। जैसे ही आपकी कोई EMI मिस होती है, बैंक या लोन देने वाली संस्था इसकी जानकारी तुरंत सिबिल (CIBIL) जैसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों को भेज देती है। आंकड़ों की बात करें तो केवल एक EMI बाउंस होने से आपका सिबिल स्कोर एक झटके में 50 से लेकर 70 पॉइंट तक नीचे गिर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका स्कोर 750 या उससे अधिक है, जिसे बहुत अच्छा माना जाता है, तो सिर्फ एक चूक के बाद वह घटकर 680 से 700 के बीच आ सकता है, जो कि एक औसत या खराब स्कोर की श्रेणी में गिना जाता है।

कैसे खराब होता है सिबिल स्कोर?

सिबिल स्कोर में होने वाली यह गिरावट इस बात पर भी निर्भर करती है कि आपने तय तारीख (Due Date) के कितने दिनों बाद तक भुगतान नहीं किया। बैंकिंग की भाषा में इसे 'डेज पास्ट ड्यू' (DPD) कहा जाता है। अगर आप ड्यू डेट के बाद लेकिन 30 दिनों के भीतर अपनी रुकी हुई EMI चुका देते हैं, तो इसे एक मामूली चूक माना जाता है और स्कोर में बहुत ज्यादा बड़ी गिरावट नहीं आती। लेकिन जैसे ही यह देरी 30 दिन से ऊपर यानी 60 या 90 दिनों तक पहुंचती है, सिबिल स्कोर तेजी से टूटने लगता है। 90 दिनों से अधिक की देरी होने पर बैंक उस लोन को एनपीए (NPA) यानी डूबा हुआ कर्ज मान लेते हैं। एक बार जब आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर यह दाग लग जाता है, तो भविष्य में किसी भी बैंक से दोबारा लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है, क्योंकि बैंक आपको एक 'हाई-रिस्क' (ज्यादा जोखिम वाला) ग्राहक मानने लगते हैं।

और क्या क्या होते हैं नुकसान?

सिर्फ सिबिल स्कोर का खराब होना ही एकमात्र नुकसान नहीं है, बल्कि एक EMI मिस होने से आपकी जेब पर तुरंत और भी कई तरह का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है। सबसे पहले, बैंक आपसे लेट पेमेंट फीस (Late Payment Penalty) वसूलते हैं। इसके अलावा, चूंकि आजकल ज्यादातर लोन की किस्तें बैंक खाते से ऑटो-डेबिट (ECS/NACH) होती हैं, इसलिए खाता खाली होने के कारण जब वह ट्रांजैक्शन बाउंस होता है, तो बैंक आपसे ₹250 से ₹500 तक का बाउंस चार्ज भी अलग से वसूलते हैं। इसके साथ ही, देरी से चुकाई गई रकम पर भारी पेनाल्टी ब्याज (Default Interest) भी जोड़ा जाता है। इस प्रकार, एक छोटी सी लापरवाही के कारण आपको न केवल मानसिक तनाव झेलना पड़ता है, बल्कि आपके जेब से अतिरिक्त पैसे भी खर्च होते हैं और आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग पूरी तरह से गड़बड़ा जाती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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