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इंश्योरेंस क्लेम के लिए मरीज का भर्ती होना नहीं है जरूरी, कंज्यूमर फोरम का फैसला

  • Authored by: आशीष कुशवाहा
  • Updated Mar 15, 2023, 07:24 PM IST

अगर मरीज को भर्ती नहीं किया जाता है, या नई तकनीकों के कारण भर्ती होने के बाद कम समय में इलाज किया जाता है, तो बीमा कंपनी यह कहकर दावा खारिज नहीं कर सकती है कि मरीज को भर्ती नहीं किया गया था।

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Medical Claim terms: घटना वडोदरा में रमेशचंद्र जोशी नाम के शख्स के साथ हुई।

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Medical Claim terms: आपने सुना ही होगा कि इंश्योरेंस का क्लेम तभी मिलता है जब आप हॉस्पिटल में 24 घंटे के लिए भर्ती हों। यदि आप ओपीडी से आ जाते हैं तो इस स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी क्लेम नहीं देती है। पर हाल ही में उपभोक्ता फोरम ने जो फैसला सुनाया है उसमें क्लेम के लिए ये सब जरूरी नहीं है। ये घटना वडोदरा में रमेशचंद्र जोशी नाम के शख्स के साथ हुई।

कम समय में इलाज हुआ फिर भी मिला क्लेम

वडोदरा शहर उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने पाया कि नई टेक्नोलॉजी के आने से मरीजों का इलाज कम समय में या अस्पताल में भर्ती हुए बिना किया जा सकता है। फोरम ने कहा, 'अगर मरीज को भर्ती नहीं किया जाता है, या नई तकनीकों के कारण भर्ती होने के बाद कम समय में इलाज किया जाता है, तो बीमा कंपनी यह कहकर दावा खारिज नहीं कर सकती है कि मरीज को भर्ती नहीं किया गया था।

क्या है पूरा मामला

जोशी ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेडके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। अगस्त 2017 में फर्म ने उनके दावे को खारिज कर दिया था। जोशी की पत्नी को 2016 में डर्मेटोमायोसाइटिस हुआ था और उन्हें अहमदाबाद के लाइफकेयर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर में भर्ती कराया गया था। अगले दिन इलाज के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। जोशी ने 44,468 रुपये के बीमा दावे के लिए दायर किया, लेकिन फर्म ने सेगमेंट 3.15 का हवाला देते हुए इसे खारिज कर दिया और तर्क दिया कि उन्हें पॉलिसी में क्लॉज के अनुसार लगातार 24 घंटे तक भर्ती नहीं किया गया था।

केस लड़ने में हुआ खर्च भी मिला

उन्होंने उपभोक्ता फोरम को सभी डॉक्यूमेंट दिखाए और कहा कि उनकी पत्नी को 24 नवंबर, 2016 को शाम 5.38 बजे भर्ती कराया गया और 25 नवंबर, 2016 को शाम 6.30 बजे छुट्टी दे दी गई, जो 24 घंटे से अधिक थी। फोरम ने कहा कि भले ही यह मान लिया जाए कि मरीज को 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था पर आज आधुनिक युग में नए उपचार और दवाएं विकसित की गई हैं और डॉक्टर उसी के अनुसार इलाज करते हैं। बीमाकर्ता को मानसिक उत्पीड़न के लिए जोशी को 3,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 2,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था।

आशीष कुशवाहा
आशीष कुशवाहाauthor

<p>आशीष कुमार कुशवाहा Timesnowhindi.com में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। वह 2023 से Timesnowhindi.com के साथ जुड़े हैं। वह यहां शेयर बाजार, स्टॉक्स, IPO, पर्सनल फाइनेंस, बिजनेस न्यूज, कंपनी डेवलपमेंट, सक्सेस स्टोरी, यूटिलिटी, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और गैजेट से जुड़ी स्टोरी पर काम करते हैं। उनके पास पिछले 3 साल के भारतीय बजट को भी कवर करने का एक्सपीरियंस है। उनके पास ऑटो एक्सपो 2023 को कवर करने का अनुभव है। इसके अलावा ग्राउंड की स्टोरी और रिसर्च बेस्ड स्टोरी करने में विशेष रुचि रखते हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया में कुल 3 साल से ज्यादा का एक्सपीरियंस है। इससे पहले इन्होंने वन इंडिया, दैनिक भास्कर डिजिटल में काम किया है। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं ग्रेजुएशन की पढ़ाई रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर से मास कम्यूनिकेशन में की है। उन्हें शुरू से ही डिबेट करने, सामाजिक मुद्दों पर बात करने और शेयर बाजार में रुचि थी। उन्हें बचपन से ही अखबार के संपादकीय पेज और न्यूज पढ़ने का सौख था। स्कूल के समय उन्होंने कई क्विज कंपटीशन में भी हिस्सा लिया और प्राइज जीते हैं।</p>

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