झांसी में कांवड़ यात्रियों पर पुष्प वर्षा के दौरान हेलीकॉप्टर के कथित तौर पर काफी नीचे उड़ने का मामला सामने आया है। हेलीकॉप्टर के नीचे आने से पैदा हुई तेज हवा के चलते सड़क किनारे लगे होर्डिंग और टेंट हिलने लगे, जबकि कुछ जगहों पर रेहड़ी-ठेले पलटने और बाइक सवारों के गिरने की घटनाएं सामने आईं। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
दरअसल, 20 अगस्त को झांसी में विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई थी। कांवड़ यात्रियों के स्वागत और पुष्प वर्षा के लिए प्रदेश सरकार की ओर से हेलीकॉप्टर भेजा गया था। पुष्प वर्षा के दौरान हेलीकॉप्टर जब सड़क और भीड़ के ऊपर काफी नीचे आया तो उसके रोटर से पैदा हुई तेज हवा का असर आसपास साफ दिखाई दिया।
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बताया जा रहा है कि तेज हवा के कारण कई होर्डिंग और स्वागत के लिए लगाए गए टेंट हिलने लगे। मिशन कंपाउंड गेट के पास चाय की रेहड़ी लगाने वाले का ठेला पलट गया। सड़क से गुजर रहे कुछ बाइक सवार भी असंतुलित होकर गिर गए। कुछ स्थानों पर पेड़ों की टहनियां टूटने की बात भी सामने आई है। लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
पूर्व पायलट ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
वायरल वीडियो को लेकर पूर्व पायलट कैप्टेन सुरेंद्र सिंह ने हेलीकॉप्टर की उड़ान को बेहद गंभीर और खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि वीडियो में जिस तरह हेलीकॉप्टर भीड़ और सड़क के काफी करीब नजर आ रहा है, उससे बड़ा हादसा हो सकता था।
कैप्टेन सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, हेलीकॉप्टर के रोटर से निकलने वाली तेज हवा जमीन के पास मौजूद लोगों, वाहनों और अस्थायी ढांचों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भीड़भाड़ वाले इलाके में कम ऊंचाई पर उड़ान भरते समय अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।
उन्होंने इस फ्लाइंग को DGCA की सुरक्षा गाइडलाइंस के विपरीत बताते हुए सवाल उठाया कि आखिर इतनी भीड़ के ऊपर हेलीकॉप्टर को इतनी कम ऊंचाई पर क्यों लाया गया। हालांकि, इस मामले में संबंधित प्रशासन या हेलीकॉप्टर ऑपरेटर की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर ही नियमों के उल्लंघन की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।
फिलहाल वायरल वीडियो ने हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा के दौरान सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि धार्मिक आयोजनों में वीआईपी या विशेष स्वागत के दौरान होने वाली हवाई गतिविधियों के लिए भीड़ और जमीन पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।
