Health Insurance New Rules: नया साल 2024 में हेल्थ इंश्योरेंश के नियमों में बदलाव हो सकता है। कई शर्तें खत्म हो सकती हैं। इंश्योरेंस लेने की अधिकतम सीमा भी बढ़ सकती है क्योंकि भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) ने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए अधिकतम उम्र सीमा समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है। वर्तमान नियमों के मुताबिक अगर बीमा क्लेम करते हैं तो मरीज को सर्जरी या इलाज के लिए कम से कम 24 घंटे के लिए अस्पताल में भर्ती होना चाहिए। एक रिपोर्ट के मुताबिक उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग प्रमुख ने कहा है कि 24 घंटे के नियम के कार्यान्वयन को भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के साथ उठाया जाएगा। वर्तमान में बीमा कंपनियां 5 साल तक की अवधि की हेल्थ इंश्योरेंश पेश कर सकती हैं। जबकि सामान्य बीमा और स्टैंडअलोन कंपनी अधिकतम 3 वर्ष के लिए पॉलिसी पेश कर सकती हैं। सरकार इस नियम को बदलने पर विचार कर रही है। इसके लिए इंश्योरेंस सेक्टर के रेगुलेटर बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDA) से बातचीत भी शुरू कर दी है।
हेल्थ इंश्योरेंश नियमों के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत- NCDRC चेयरमैन
टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के चेयरमैन जस्टिस अमरेश्वर प्रसाद साही ने बीमा खंड के पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार NCDRC चेयरमैन ने मेडिकल प्रक्रियाओं में प्रगति के बारे में बात की और बताया कि कुछ ऐसे इलाज और सर्जरी कुछ ही घंटों में पूरी की जा सकती हैं। मगर हेल्थ इंश्योरेंश क्लेम के लिए मरीज का 24 घंटे अस्पताल में एडमिट रहना जरूरी है। अगर कोई मरीज इस समय सीमा को पूरा नहीं करता तो कंपनियां इंश्योरेंस क्लेम को रिजेक्ट कर देती हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों को इस बारे में अपडेट होना चाहिए।
पंजाब और केरल जिला उपभोक्ता आयोगों ने सुनाया था ऐतिहासिक फैसला
जस्टिस साही ने पंजाब और केरल के जिला उपभोक्ता आयोगों की प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने हेल्थ इंश्योरेंश क्लेम से संबंधित प्रावधानों पर ऐतिहासिक आदेश पारित किए हैं। पंजाब और केरल के जिला उपभोक्ता कोर्ट ने इस साल अगस्त में हेल्थ इंश्योरेंश क्लेम को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। कोर्ट नेहेल्थ इंश्योरेंश कंपनियों को 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहने की शर्त पर फटकार लगाई थी और भर्ती मरीज को स्वास्थ्य बीमा के लाभों को देने का आदेश दिया था। आगे बढ़ते हुए एनसीडीआरसी अध्यक्ष ने शिकायत समाधान में दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता के बारे में भी बात की। जस्टिस साही ने इन आदेशों के निष्पादन में आने वाली बाधाओं पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि उपभोक्ता न्याय की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए ऐसे आदेशों के निष्पादन के लिए एक मानकीकृत योजना की आवश्यकता है।
आसान होगी हेल्थ इंश्योरेंश रिन्युअल प्रक्रिया
इरडा ने जीवन बीमा कंपनियों को लाभ आधारित नीतियों की पेशकश करने की सलाह दी है। इसके तहत पॉलिसी के अंतर्गत आने वाली बीमारी होने पर निश्चित लागत मुहैया कराई जाती है। वहीं इसके दायरे से अस्पताल के खर्चों की भरपाई करने वाली क्षतिपूर्ति आधारित नीतियां बाहर होंगी। संस्था ने हेल्थ इंश्योरेंश रिन्युअल प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कहा है। कंपनियों को सुझाव दिया कि पॉलिसी रिन्युअल के दौरान समय, बीमा राशि में बदलाव न हो तो पॉलिसीधारक की स्वास्थ्य जांच कराने से बचें। इससे पॉलिसी रिन्यूवल कराने का अनुभव बेहतर होगा। इरडा ने बीमा कंपनियों से कहा है कि पॉलिसीधारकों को विभिन्न बीमाकर्ताओं से विभिन्न दावा करने की मंजूरी मिले। इससे बीमा लेने वाले को कई विकल्प मिलेंगे।
