HDFC Bank ने बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा धमाका किया है। बैंक ने अपनी एक विशेष डिपॉजिट स्कीम पर ब्याज दरों को रातों-रात 64% बढ़ा दिया है। 9 जून तक बैंक इस स्कीम पर सिर्फ 3.65% ब्याज दे रहा था। लेकिन, 10 जून से इसे 64 फीसदी बढ़ाकर 6 फीसदी कर दिया है। यह बंपर फायदा बैंक ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी FCNR (B) डिपॉजिट पर दिया है। यह एक विशेष प्रकार का फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) अकाउंट होता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें पैसे भारतीय रुपये में नहीं, बल्कि विदेशी मुद्राओं में जमा किए जाते हैं।
क्यों है ये 'खास डिपॉजिट'?
फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी FCNR (B) डिपॉजिट असल में भारत में विदेशी पूंजी लाता है। इसके अलावा इसमें ब्याज भी विदेशी पूंजी के टर्म में ही दिया जाता है। मसलन, अगर FCNR अकाउंट में 100 डॉलर जमा किए गए और 1 साल का ब्याज 6 फीसदी है, तो रिटर्न 106 डॉलर मिलेगा। इस रकम को रुपये में एक्सचेंज करके एडजस्ट नहीं किया जाएगा। HDFC बैंक में ग्राहक इसे मुख्य रूप से यूएस डॉलर ($), ब्रिटिश पाउंड (£), यूरो (€), जापानी येन (¥), कैनेडियन डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी मजबूत विदेशी करेंसी में लॉक कर सकते हैं। यह नई दरें 3 साल से लेकर 5 साल तक की अवधि (Tenure) के लिए प्रभावी की गई हैं।
कौन से ग्राहक हैं इसके लिए 'एलिजिबल'?
इस स्कीम का फायदा हर कोई नहीं उठा सकता। बैंक के नए नियमों के मुताबिक इसके लिए केवल निम्नलिखित लोग ही एलिजिबल हैं।
- अनिवासी भारतीय (NRIs): वे भारतीय नागरिक जो नौकरी, बिजनेस या किसी अन्य कारण से विदेश (जैसे अमेरिका, यूके, गल्फ देश आदि) में रह रहे हैं।
- ओवरसीज सिटिजन्स ऑफ इंडिया (OCIs): वे लोग जो विदेशी नागरिक हैं लेकिन उनके पास भारत सरकार द्वारा जारी ओसीआई कार्ड है।
- RNOR टैक्स स्टेटस वाले: जो भारतीय टैक्स कानूनों के तहत 'रेसिडेंट बट नॉट ऑर्डिनरी रेसिडेंट' की श्रेणी में आते हैं।
NRI के लिए यह क्यों है 'जैकपॉट'?
भारत में रहने वाले लोगों को नॉर्मल FD पर 7% से 8% तक का ब्याज आसानी से मिल जाता है, तो फिर डॉलर पर 6% ब्याज को महा-धमाका क्यों कहा जा रहा है? इसके पीछे 3 बड़े आर्थिक कारण हैं।
विदेशी करेंसी में बंपर रिटर्न: अगर कोई एनआरआई अमेरिका से आकर इस अकाउंट में यूएस डॉलर ($) जमा करता है, तो उसे 6% का ब्याज भी डॉलर में ही मिलेगा। अमेरिका या यूरोप के अपने स्थानीय बैंकों में डॉलर पर इतना अधिक फिक्स्ड और गारंटीड रिटर्न मिलना नामुमकिन है।
रुपये के गिरने (Depreciation) का कोई रिस्क नहीं: चूंकि पैसा विदेशी मुद्रा में ही रहता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव से निवेश के मूल मूल्य पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
100% टैक्स-फ्री (Tax-Free): फेमा (FEMA) के नियमों के तहत, इस FCNR(B) अकाउंट से होने वाली पूरी ब्याज आय पर भारत सरकार कोई टैक्स (TDS) नहीं लेती है। यह मुनाफा पूरी तरह टैक्स-मुक्त होता है।
RBI के फैसले का हुआ असर
इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक खास नीति है। RBI ने देखा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल विदेशी मुद्रा का इनफ्लो (FCNR-B Inflow) $7 बिलियन से गिरकर महज $946 मिलियन रह गया था। इसे बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने बैंकों के लिए एक 'कन्सेशनल स्वैप फैसिलिटी' शुरू की है, जिसके तहत आरबीआई बैंकों की हेजिंग कॉस्ट (लागत) खुद उठा रहा है। इसी का फायदा उठाते हुए HDFC बैंक ने तुरंत कदम आगे बढ़ाए। वर्तमान में जहां कोटक महिंद्रा बैंक 3.40%, एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा 3.35% और आईसीआईसीआई बैंक केवल 3% के आसपास ब्याज दे रहे हैं।
