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खेती की जमीन बेची है? जानें कितना देना होगा टैक्स और ITR में कहां दें जानकारी

अगर आपने खेती की जमीन बेची है और अब रिटर्न फाइल करने की तैयारी में हैं तो कुछ बातों का खास ख्याल रखें। बिक्री की जानकारी रिटर्न फॉर्म में जरूर दें।

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कृषि भूमि

Photo : PTI

अक्सर यह माना जाता है कि खेती की जमीन बेचने पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन टैक्स का नियम इस बात पर निर्भर करता है कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत वह जमीन 'ग्रामीण खेती की जमीन' की श्रेणी में आती है या नहीं। भले ही बिक्री पर टैक्स न लगे, फिर भी टैक्सपेयर्स को जानकारी में अंतर (मिसमैच) के कारण मिलने वाले नोटिस से बचने के लिए अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इस लेन-देन की जानकारी देनी पड़ सकती है। टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, टैक्सपेयर्स सबसे आम गलतियों में से एक यह करते हैं कि वे या तो बिक्री की जानकारी गलत देते हैं या फिर इसकी जानकारी देते ही नहीं हैं।

खेती की जमीन पर कैपिटल गेन नहीं लगता

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 2(14) के तहत, गांव की खेती की जमीन को कैपिटल एसेट नहीं माना जाता है। इसलिए, इसकी बिक्री से होने वाला कोई भी फायदा कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, शहर की खेती की जमीन की बिक्री टैक्सेबल है, लेकिन सेक्शन 54B के तहत छूट के लिए एलिजिबल है। क्योंकि गांव की खेती की जमीन का ट्रांजैक्शन छूट वाला है, इसलिए इसे आम तौर पर ITR में शेड्यूल EI (छूट वाली इनकम) के तहत बताना चाहिए, न कि शेड्यूल CG (कैपिटल गेन्स) के तहत।

इन गलतियों पर मिलेगा नोटिस

टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि रिटर्न फाइल करते समय सबसे बड़ी गलतियों में से एक है लेन-देन की जानकारी ही नहीं देना, क्योंकि यह कर-मुक्त होता है। निर्धारित सीमा से अधिक संपत्ति लेन-देन की रिपोर्ट उप-पंजीयकों द्वारा की जाती है और अक्सर करदाता के वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में दिखाई देती है। बिक्री का खुलासा न करने पर नोटिस मिल सकते हैं। इसलिए रिटर्न में जानकारी जरूर दें।

कई टैक्सपेयर ऐसी बिक्री को 'कैपिटल गेन्स' शेड्यूल के तहत गलत तरीके से दिखाते हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि इसमें प्रॉपर्टी का ट्रांसफर शामिल होता है। इससे ऑटोमैटिक टैक्स कैलकुलेशन और बिना वजह कंप्लायंस से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं, भले ही यह ट्रांजैक्शन टैक्स से छूट के दायरे में आता हो।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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