जाने-माने उद्योगपति और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी लगभग 1.2 अरब डॉलर की हाइफा बंदरगाह डील के बाद इजरायल में और अधिक निवेश की तैयारी में हैं। यह संकेत उनके उस कदम से मिलता है, जिसके तहत उनका समूह तेल अवीव (इजरायल में) में कृत्रिम मेधा (एआई) प्रयोगशाला की स्थापना करेगा। 60 बरस के अडानी ने यह भी कहा कि उनका ग्रुप हाइफा में रियल एस्टेट परियोजना भी विकसित करेगा।
अडानी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हम तेल अवीव में एआई प्रयोगशाला भी स्थापित करने की प्रक्रिया में हैं, जो भारत और अमेरिका में स्थित हमारी नई एआई प्रयोगशालाओं के साथ करीबी सहयोग बनाकर काम करेगी।’’ दरअसल, अडानी ने इजरायली पीएम बेंजामिन नेतान्याहू की मौजूदगी में इजरायल के हाइफा बंदरगाह के अधिग्रहण का समझौता किया। साथ ही उनके साथ निवेश से जुड़े अवसरों के बारे में बातचीत की।
अडानी समूह ने पिछले छह साल में एल्बिट सिस्टम्स, इजरायल वेपन सिस्टम्स और इजरायल इनोवेशन अथॉरिटी जैसी कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियां की हैं। इस बीच, इजराइली पीएम नेतन्याहू ने ग्रुप के साथ हाइफा बंदरगाह समझौते को ‘‘बड़ा मील का पत्थर’’ करार दिया है। वह बोले हैं कि इससे दोनों देशों के बीच संपर्क में कई तरह से सुधार होगा।
नेतन्याहू ने अडानी के साथ ‘पोर्ट बुक’ पर साइन करने के बाद कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह बहुत बड़ा मील का पत्थर है। 100 से ज्यादा साल पहले और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, बहादुर भारतीय सैनिकों ने हाइफा शहर को मुक्त कराने में मदद की थी। आज बहुत मजबूत भारतीय निवेशक हाइफा बंदरगाह को आजादी दिलाने में मदद कर रहे हैं।’’
इजरायली पीएम ने बताया कि उन्होंने अपने ‘‘अच्छे दोस्त’’ और भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी के साथ ‘‘दोनों देशों के बीच परिवहन लाइन, हवाई मार्गों और समुद्री मार्गों समेत कई माध्यमों से संपर्क बढ़ाने के बारे में चर्चा की...और यह आज हो रहा है।’’ उनके मुताबिक, आज जो हो रहा है, उसका ऐतिहासिक महत्व है क्योंकि ‘‘हम जो देख रहे हैं, वह शांति को बढ़ावा देता है। यह क्षेत्र बड़ी संख्या में सामानों के लिए एक प्रवेश बिंदु और निकास बिंदु बनेगा। दरअसल, सीधे बोलूं, तो यह बहुत अच्छा निवेश है।
