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ग्रीन होम्स होते हैं महंगे, लेकिन बिजली-पानी के बिल में बड़ी बचत, रिपोर्ट का दावा

Green Homes: ग्रीन होम्स 3.5-4% महंगे होते हैं, लेकिन 20-30% बिजली और 30-50% पानी की बचत करते हैं, जिससे लंबे समय में लागत कम और पर्यावरण को लाभ मिलता है।

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भारत में ग्रीन हाउसिंग की बढ़ती जरुरत

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Green Homes : भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच टिकाऊ घरों (sustainable housing) की मांग बढ़ रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन होम सामान्य घरों की तुलना में थोड़े महंगे हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय में ये घर परिवारों के लिए ज्यादा किफायती साबित होते हैं। प्रॉपटेक कंपनी Square Yards की रिपोर्ट बताती है कि ग्रीन घर बनाने में करीब 3.5 से 4 प्रतिशत तक ज्यादा लागत आती है, लेकिन इससे भविष्य में भारी बचत होती है।

बिजली और पानी की खपत में बड़ी कमी

रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीन घरों में पानी की खपत 30 से 50 प्रतिशत तक कम हो सकती है। वहीं बिजली की खपत में भी 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी देखने को मिलती है। इसका मतलब है कि शुरुआत में थोड़ी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है, लेकिन हर महीने के बिल में लगातार राहत मिलती है। लंबे समय में यह बचत घर के कुल खर्च को काफी कम कर देती है।

तेजी से बढ़ता शहरी दबाव

रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत आने वाले दशकों में बड़े शहरी बदलाव से गुजरने वाला है। 2050 तक करीब 40 करोड़ (400 मिलियन) अतिरिक्त लोग शहरों में रहने आ सकते हैं। वहीं 2070 तक देश में शहरी आवासीय ढांचा दोगुना होने की संभावना है। ऐसे में पर्यावरण के अनुकूल घरों की जरूरत और भी बढ़ जाएगी।

निर्माण क्षेत्र और प्रदूषण की चुनौती

भारत में निर्माण क्षेत्र पर्यावरण पर बड़ा असर डालता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्षेत्र देश के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का करीब एक-तिहाई हिस्सा जिम्मेदार है। इसलिए अगर नए घर पर्यावरण के अनुकूल बनाए जाएं, तो प्रदूषण कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

भारत में ग्रीन बिल्डिंग का विस्तार

भारत अब दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन बिल्डिंग बाजारों में से एक बन चुका है। देश में 19,700 से ज्यादा ग्रीन प्रोजेक्ट हैं और 16 अरब वर्ग फुट से अधिक क्षेत्र ग्रीन सर्टिफाइड है। इन प्रोजेक्ट्स से हर साल अरबों लीटर पानी और भारी मात्रा में बिजली की बचत हो रही है। साथ ही लाखों टन कार्बन उत्सर्जन भी कम किया जा रहा है।

जानकारी की कमी बनी बड़ी समस्या

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में खरीदारों के लिए यह समझना मुश्किल है कि कौन सा प्रोजेक्ट कितना ग्रीन या टिकाऊ है। अभी तक इसकी तुलना करने के लिए कोई आसान और एक समान सिस्टम नहीं है। अलग-अलग सर्टिफिकेट, तकनीकी रिपोर्ट और मार्केटिंग जानकारी के कारण आम खरीदार भ्रमित हो जाते हैं।

नया इंडेक्स देगा आसान तुलना

इस समस्या को दूर करने के लिए Square Yards ने “Green Living Index” (SYGLI) लॉन्च किया है। यह एक स्कोरिंग सिस्टम है, जो घरों को उनकी पर्यावरणीय गुणवत्ता, रहने की सुविधा और लंबे समय की परफॉर्मेंस के आधार पर रेट करेगा। इसमें पानी-बिजली की बचत, घर की सुरक्षा, आराम और आसपास की सुविधाओं जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

भविष्य की ओर बढ़ता भारत

एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में सिर्फ लोकेशन और कीमत ही नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय प्रभाव भी खरीद निर्णय का अहम हिस्सा बनेंगे। भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रहा है, ऐसे में ग्रीन हाउसिंग की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।

रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि ग्रीन घर शुरुआत में थोड़े महंगे जरूर हैं, लेकिन ये भविष्य में बिजली-पानी के बिल कम करके आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित होते हैं। साथ ही ये पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहतर विकल्प हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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