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दुबई में अचानक सस्ता हुआ सोना! ईरान जंग के बीच क्यों आई भारी गिरावट?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच जहां दुनिया में सोने की कीमतें बढ़ रही हैं वहीं दुबई में सोना भारी डिस्काउंट पर बिक रहा है। आइए आपको बताते हैं जंग के दौरान सोना महंगा होने के बजाए सस्ता क्यों मिल रहा है?

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Gold

दुनिया भर में सोने के सबसे बड़े बाजार के रूप में मशहूर दुबई (UAE) से एक हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। जहां एक तरफ ईरान और इजरायल के बीच छिड़ी जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं दुबई के व्यापारियों ने सोने पर भारी डिस्काउंट देना शुरू कर दिया है। यह स्थिति सुनने में अजीब लग सकती है, क्योंकि युद्ध के समय आमतौर पर सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन दुबई के मामले में इसके पीछे की वजह 'लॉजिस्टिक्स' और 'सप्लाई चेन' का टूटना है। आइए समझते हैं कि आखिर दुबई में सोना सस्ता क्यों मिल रहा है और इसका भारत से क्या कनेक्शन है।

डिस्काउंट के पीछे की असली वजह

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण ईरान और उसके आसपास का हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद या खतरनाक घोषित कर दिया गया है। सोना आमतौर पर यात्री विमानों (Passenger Aircraft) के जरिए एक देश से दूसरे देश भेजा जाता है। उड़ानों के रद्द होने या मार्ग बदलने की वजह से सोने की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ गई है। दुबई के ट्रेडर्स के पास सोने का भंडार तो है, लेकिन वे उसे मुख्य ट्रेडिंग हब (जैसे लंदन या न्यूयॉर्क) तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।

चूंकि सोने को स्टोर करने और उसका बीमा (Insurance) कराने की लागत लगातार बढ़ रही है, इसलिए ट्रेडर्स इसे दबाकर रखने के बजाय 30 डॉलर प्रति औंस तक के डिस्काउंट पर बेचने को मजबूर हैं। वे चाहते हैं कि अनिश्चित समय तक भारी भरकम पेमेंट करने के बजाय कम कीमत पर ही माल निकाल दिया जाए।

ट्रांसपोर्टेशन का संकट और बढ़ता जोखिम

सोने को सुरक्षित पहुंचाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। जंग के कारण शिपिंग और इंश्योरेंस की लागत 60% से 70% तक बढ़ गई है। हालांकि कुछ ट्रेडर्स ने ओमान या सऊदी अरब के रास्ते जमीन से सोना भेजने का विचार किया, लेकिन बॉर्डर पार करने में शामिल जोखिम और सुरक्षा चिंताओं की वजह से कंपनियां हिचकिचा रही हैं। जल्दी डिलीवरी की कोई गारंटी न होने के कारण कई खरीदारों ने अपने नए ऑर्डर भी रद्द कर दिए हैं।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा खरीदार है और हमारी सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा दुबई से आता है। इस संकट के दो पहलू भारत पर दिख रहे हैं. ऑगमोंट एंटरप्राइजेज और MMTC-PAMP जैसे बड़े डीलर्स का मानना है कि कई शिपमेंट फंसने की वजह से भारत में फिजिकल गोल्ड (असली सोना) की उपलब्धता में शॉर्ट-टर्म कमी आई है। भारत की सबसे बड़ी रिफाइनरी भी अपने कच्चे सोने (Dore) का करीब 10% हिस्सा मिडिल ईस्ट से लेती है, जो फिलहाल रुक गया है।

राहत की बात यह है कि भारत में फिलहाल पैनिक जैसी स्थिति नहीं है। जानकारों का कहना है कि जनवरी में भारी मात्रा में किए गए इम्पोर्ट की वजह से भारतीय डीलर्स के पास पर्याप्त इन्वेंट्री (स्टॉक) मौजूद है। चूंकि अभी शादियों का मुख्य सीजन आने में थोड़ा समय है, इसलिए शॉर्ट-टर्म मांग कम है और पुराने स्टॉक से काम चल रहा है।

आगे क्या होगा?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध कुछ हफ्तों में शांत हो जाता है, तो स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन अगर तनाव महीनों तक खिंचता है, तो भारत के बाजारों में सोने की भारी किल्लत हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है। फिलहाल, स्पॉट गोल्ड अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,000 प्रति औंस के करीब ट्रेड कर रहा है। डॉलर की मजबूती और युद्ध की अनिश्चितता ने निवेशकों को उलझन में डाल रखा है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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