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Gold Price: अगले हफ्ते सोने की कीमतों में आ सकती है भारी उथल-पुथल, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

Gold Price: आने वाले सप्ताह में सोने की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव संभव है, क्योंकि निवेशक 9 जुलाई की शुल्क समयसीमा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंकों की नीतियों और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखेंगे। ट्रंप द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए शुल्क की 90 दिन की छूट खत्म हो रही है, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है।

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सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव की संभावना

Gold Price: आने वाले सप्ताह में सोने की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी मुख्य वजह 9 जुलाई को समाप्त हो रही अमेरिकी शुल्क निलंबन की समयसीमा, फेडरल रिजर्व सहित प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले, और महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक आंकड़े हो सकते हैं।

निवेशकों की नजर अमेरिका पर

विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारत समेत कई देशों से आयात पर लगाए गए 26% अतिरिक्त शुल्क का 90 दिन का निलंबन 9 जुलाई को खत्म हो रहा है। इससे भारतीय सामानों पर फिर से शुल्क लगने की आशंका है, जो वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर सकता है।

ब्याज दरों और आर्थिक आंकड़ों पर निगाह

जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के प्रणव मेर ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दरों में कटौती, अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच बातचीत, और आगामी वैश्विक आर्थिक आंकड़े निकट भविष्य में सोने की दिशा तय करेंगे। निवेशक यूएस फेड की एफओएमसी बैठक पर भी करीबी नजर बनाए हुए हैं।

एमसीएक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल

पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी के लिए सोने की कीमत में ₹1,563 (1.61%) की वृद्धि हुई। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह फिलहाल करीब $3,345 प्रति औंस है। वेंचुरा कमोडिटी डेस्क प्रमुख एन. एस. रामास्वामी का मानना है कि मजबूत अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के चलते फेड की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हुई हैं, जिससे बिकवाली का दबाव रह सकता है।

अस्थिरता की आशंका बरकरार

रामास्वामी ने कहा कि अल्पकालिक तौर पर थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन व्यापक तौर पर गिरावट की प्रवृत्ति बनी रह सकती है। हालांकि, अमेरिका का राजकोषीय घाटा और शुल्क से जुड़े फैसले बाजार में नई अस्थिरता ला सकते हैं और इससे सोने की मांग में इजाफा हो सकता है।

केंद्रीय बैंकों की गतिविधि और डॉलर की कमजोरी का असर

मई में केंद्रीय बैंकों ने वैश्विक स्वर्ण भंडार में 20 टन सोना जोड़ा। एंजेल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि कमजोर अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनाव सोने की कीमतों को समर्थन दे रहे हैं। उनका मानना है कि डॉलर की कमजोरी 2024 और 2025 में भी सोने के लिए सकारात्मक कारक बनी रहेगी। (इनपुट भाषा)

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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