Gold Price Journey : आज 15 अगस्त 2026 को पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ था, तब भारत में 10 ग्राम सोने की कीमत सिर्फ 88.62 रुपये थी। आज करीब आठ दशकों के बाद, वही 10 ग्राम सोना 1.5 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है। ऐसे में सोने और चांदी के भाव में आई यह ऐतिहासिक तेजी भारत की बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 'हैंडबुक ऑफ स्टैटिस्टिक्स ऑन इंडियन इकोनॉमी' के आंकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त 2026 तक घरेलू बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत 1,51,594.68 रुपये पर पहुंच गई है। यानी आजादी से लेकर अब तक सोने के दाम में 1700 गुना से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
1000 रुपये का सोना आज 17 लाख रुपये का
अगर इस गणित को आसान शब्दों में समझें, तो जिस व्यक्ति ने 1947 में 1,000 रुपये का सोना खरीदा होगा, उस सोने की कीमत आज के भाव के हिसाब से करीब 17.1 लाख रुपये हो चुकी है। बीते 79 सालों के दौरान सोने की कीमतों में औसतन 9.9 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि, सोने का यह सफर हमेशा एक सीधी रेखा में ऊपर नहीं बढ़ा है। इसमें कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।
88 रुपये से 1.5 लाख रुपये तक का सफर
- 1950 से 1970 का दशक: साल 1950 में सोना 99.18 रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 1964 में घटकर 63.25 रुपये पर आ गया। लेकिन 1970 तक यह उछलकर 184.50 रुपये पर पहुंच गया।
- 1980 से 2000 का दौर: 1980 में सोने ने पहली बार 1,000 रुपये का आंकड़ा पार किया और 1,330 रुपये पर पहुंचा। इसके बाद 2000-01 में यह 4,473.60 रुपये प्रति 10 ग्राम बिकने लगा।
- 2010 से 2026 तक की तूफानी तेजी: 2010-11 में 10 ग्राम सोने की कीमत 19,227.08 रुपये हुई, जो 2020-21 में बढ़कर 48,723.22 रुपये हो गई। 2024-25 में यह औसतन 75,841.87 रुपये पर रही और अगस्त 2026 में 1.5 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई।
चांदी की चाल: 1970 से अब तक 370 गुना उछाल
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी निवेशकों को तगड़ा रिटर्न दिया है। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, साल 1970-71 में 1 किलो चांदी की औसत कीमत केवल 536.08 रुपये थी। 14 अगस्त 2026 तक 1 किलो चांदी की कीमत बढ़कर 1,98,461 रुपये पहुंच चुकी है। यानी चांदी अपने 1970-71 के स्तर से करीब 370 गुना महंगी हो चुकी है। चांदी ने 1979-80 में 2,000 रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था, और 2011-12 में यह 57,315.87 रुपये पर पहुंची थी। इसके बाद 2015-16 में इसमें गिरावट आई और यह 36,318.10 रुपये तक नीचे गिरी, जिसके बाद फिर से इसमें तेजी देखने को मिली।
सोना बनाम चांदी: किसने दिया ज्यादा रिटर्न?
अगर 1984-85 के बाद के आंकड़ों की तुलना करें, तो सोने ने चांदी के मुकाबले ज्यादा बेहतर रिटर्न दिया है।
- सोना: 1984-85 में 1,983.92 रुपये से बढ़कर 1,51,594.68 रुपये प्रति 10 ग्राम हुआ (करीब 76 गुना बढ़त)।
- चांदी: 1984-85 में 3,593.59 रुपये से बढ़कर 1,98,461 रुपये प्रति किलोग्राम हुई (करीब 55 गुना बढ़त)।
निवेशकों के लिए सबक
यह ऐतिहासिक आंकड़े निवेशकों को एक महत्वपूर्ण सीख भी देते हैं। लंबी अवधि में शानदार रिटर्न देने का मतलब यह नहीं है कि कीमतों में कभी गिरावट नहीं आएगी। सोने और चांदी दोनों ही संपत्तियों ने दशकों के इस सफर में कई सालों तक ठहराव और गिरावट के दौर देखे हैं।
(ध्यान दें: ये आंकड़े RBI और PIB के ऐतिहासिक डेटा पर आधारित हैं। इनमें टैक्स, मेकिंग चार्ज या अन्य लेनदेन शुल्क शामिल नहीं हैं।)
