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Gold Loan Default: सोना गिरवी रख लिया कर्ज, चुकाने में छूटे पसीने, 5 महीने में डबल हुए डिफॉल्टर

गोल्ड लोन का ट्रेंड जिस तेजी से बढ़ा, उसी तेजी से लोन डिफॉल्ट के मामले बढ़ रहे हैं। ट्रांस यूनियन सिबिल की नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 महीने में गोल्ड डिफॉल्टर का रेट डबल हो गया है।

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गोल्ड लोन डिफॉल्टर की संख्या बढ़ी

Gold Loan Default: घर में रखा सोना मुश्किल वक्त में काम आए, इसलिए लोग इसे गिरवी रखकर गोल्ड लोन लेते हैं। लेकिन अब इसी गोल्ड लोन मार्केट में कर्ज चुकाने को लेकर दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले 5 महीनों में गोल्ड लोन की किस्तें चुकाने में चूक का अनुपात करीब दोगुना हो गया है। हालांकि, कुल गोल्ड लोन के मुकाबले डिफॉल्ट का स्तर अभी कम है, लेकिन तेजी से बढ़ते इस बाजार में यह बदलाव चिंता बढ़ाने वाला है।

TransUnion CIBIL की नवंबर 2026 की रिपोर्ट 'Lending Unlocked: Gold Loans' के मुताबिक, मार्च 2026 में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में 90 दिन या उससे अधिक समय से बकाया कर्ज का अनुपात करीब 0.16% था, जो अगस्त 2026 में बढ़कर 0.30% हो गया। यानी महज 5 महीने में इसमें करीब 1.9 गुना की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सालाना आधार पर देखें तो अगस्त 2025 के मुकाबले डिफॉल्ट का अनुपात अभी भी कम है।

₹22.5 लाख करोड़ लोन का बाजार

गोल्ड लोन में डिफॉल्ट का खतरा ऐसे समय बढ़ रहा है, जब इसका बाजार तेजी से फैल रहा है। अगस्त 2026 तक देश में गोल्ड लोन का कुल बकाया बढ़कर रिकॉर्ड ₹22.5 लाख करोड़ पर पहुंच गया। अगस्त 2023 में यह करीब ₹7.5 लाख करोड़ था। यानी तीन साल में गोल्ड लोन का कुल बकाया करीब तीन गुना हो गया है। अगस्त 2026 तक देश में करीब 5.5 करोड़ लोग गोल्ड लोन चुका रहे थे। यह देश के कुल क्रेडिट एक्टिव उपभोक्ताओं का करीब 21% है। यानी हर 5 क्रेडिट एक्टिव लोगों में से लगभग एक व्यक्ति गोल्ड लोन के बोझ तले है।

कम लोगों ने लिया लोन

गोल्ड लोन बाजार में एक और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है। अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में गोल्ड लोन के तहत मंजूर रकम सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹8.2 लाख करोड़ हो गई। लेकिन इस दौरान नए गोल्ड लोन की संख्या में 15% की गिरावट आई। इस तिमाही में करीब 3.7 करोड़ गोल्ड लोन बांटे गए, जबकि नए लोन लेने वाले यूनिक कर्जदारों की संख्या लगभग 2.4 करोड़ रही। इसका मतलब है कि भले ही नए लोन की संख्या घटी हो, लेकिन कर्ज लेने वाले लोग अब पहले के मुकाबले बड़ी रकम उधार ले रहे हैं। ₹2.5 लाख से अधिक के गोल्ड लोन की संख्या में सालाना आधार पर 19% की बढ़ोतरी हुई। इससे पता चलता है कि गोल्ड लोन का बाजार अब छोटे-मोटे कर्ज से आगे बढ़कर बड़ी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने का माध्यम बन रहा है।

इन पर सबसे ज्यादा खतरा

CIBIL की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि एक से ज्यादा गोल्ड लोन लेने वाले लोगों में भुगतान चूकने का जोखिम अधिक है। जिन कर्जदारों के पास 4 या उससे ज्यादा गोल्ड लोन खाते हैं, उनमें डिफॉल्ट रेट 0.45% रहा। यह पूरे गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की 0.30% दर से करीब 1.5 गुना है। ऐसे कर्जदार की हिस्सेदारी गोल्ड लोन के कुल बकाया में करीब 27% है। यानी बाजार में एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का है, जिन्होंने एक से ज्यादा बार सोना गिरवी रखकर कर्ज लिया है। TransUnion CIBIL के MD और CEO भावेश जैन के मुताबिक, डिफॉल्ट के जोखिम को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति ने कितने गोल्ड लोन लिए हैं, उसका पिछला Repayment रिकॉर्ड कैसा रहा है और उसने कितनी रकम का कर्ज लिया है।

Gen Z भी तेजी से ले रहा गोल्ड लोन

गोल्ड लोन का बाजार अब सिर्फ पुराने या पारंपरिक Borrowers तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, Gen Z यानी युवा Borrowers की संख्या में सालाना आधार पर 19% की बढ़ोतरी हुई है। गोल्ड लोन लेने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 41% रही। इसके अलावा अप्रैल-जून 2026 के दौरान बांटे गए कुल गोल्ड लोन में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों की रही। इससे साफ है कि गोल्ड लोन अब छोटे शहरों और गांवों में भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

क्यों बढ़ रहा है गोल्ड लोन का चलन?

TransUnion CIBIL के मुताबिक, गोल्ड लोन की बढ़ती मांग के पीछे कर्ज की जरूरत, आसानी से उपलब्ध होने वाला लोन और सोने की कीमतों में तेजी जैसे कारण हैं। सोना गिरवी रखने पर आमतौर पर कर्ज लेने की प्रक्रिया दूसरे कई तरह के कर्ज की तुलना में आसान हो सकती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए इस विकल्प को चुन रहे हैं। हालांकि, CIBIL की रिपोर्ट यह भी बताती है कि सिर्फ सोने की कीमत और उसकी गिरवी वैल्यू देखकर कर्ज देना पर्याप्त नहीं है। बैंक और NBFCs को यह भी देखना होगा कि ग्राहक पहले से कितने कर्ज में है और उसकी उन्हें चुकाने की क्षमता कितनी है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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