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भारत आकर प्रॉपर्टी बेचने वाले NRIs को बड़ी राहत, ITAT के फैसले से फ्लाइट टिकट का खर्च भी ऐसे घटा सकेंगे

अगर आप विदेश में रहते हैं और भारत में अपनी प्रॉपर्टी बेचने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। ITAT ने एक अहम फैसले में बताया है कि कुछ शर्तों के साथ फ्लाइट टिकट का खर्च भी कैपिटल गेन की गणना में घटाया जा सकता है।

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भारत आकर प्रॉपर्टी बेचने वाले NRIs को बड़ी राहत, ITAT के फैसले से फ्लाइट टिकट का खर्च भी ऐसे घटा सकेंगे

विदेश में रहने वाले भारतीयों यानी NRI के लिए भारत में प्रॉपर्टी बेचना थोड़ा खर्चीला हो सकता है। प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी करने के लिए उन्हें विदेश से भारत आना पड़ता है। इस दौरान हवाई टिकट और होटल में रुकने पर भी काफी पैसा खर्च होता है। अब इन खर्चों को लेकर इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की बेंगलुरु बेंच ने अहम फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि अगर कोई NRI खास तौर पर भारत में अपनी प्रॉपर्टी की बिक्री पूरी करने या रजिस्ट्री कराने के लिए यात्रा करता है, तो कुछ शर्तों के साथ हवाई टिकट और होटल का खर्च कैपिटल गेन की गणना करते समय घटाया जा सकता है। हालांकि, हर यात्रा का खर्च अपने आप टैक्स में छूट के योग्य नहीं होगा।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला अमेरिका में रहने वाले एक NRI से जुड़ा है, जिसने भारत में अपनी प्रॉपर्टी करीब 2.63 करोड़ रुपये में बेची थी। प्रॉपर्टी की बिक्री 6 जनवरी 2020 को रजिस्टर्ड हुई थी। इस दौरान व्यक्ति ने भारत आने-जाने और होटल में ठहरने पर हुए कुल 12.01 लाख रुपये के खर्च को कैपिटल गेन की गणना में घटाने का दावा किया। लेकिन इनकम टैक्स विभाग ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया। विभाग का कहना था कि यह साबित नहीं हुआ कि पूरा खर्च सिर्फ प्रॉपर्टी बेचने के लिए ही किया गया था। इसके बाद मामला ITAT पहुंचा।

हर फ्लाइट टिकट पर नहीं मिलेगी टैक्स में राहत

ट्रिब्यूनल ने यात्रा की तारीखों और खर्च के दस्तावेजों की जांच की। पता चला कि व्यक्ति नवंबर 2019 में भी अमेरिका से भारत आया था, जबकि प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री जनवरी 2020 में हुई। कोर्ट ने करीब दो महीने पहले की गई इस यात्रा के खर्च को प्रॉपर्टी की बिक्री से जुड़ा खर्च मानने से इनकार कर दिया। वहीं, जनवरी 2020 की यात्रा के लिए पेश किए गए शिकागो से दिल्ली के फ्लाइट टिकट और बेंगलुरु में 5 से 8 जनवरी तक ठहरने के 93,125 रुपये के होटल बिल को बिक्री से जुड़ा माना। हालांकि, टिकट में परिवार के एक अन्य सदस्य का खर्च भी शामिल था। इसलिए ट्रिब्यूनल ने पूरे 12.01 लाख रुपये की छूट सीधे मंजूर नहीं की, बल्कि मामले को दोबारा जांच के लिए टैक्स अधिकारी के पास भेज दिया।

होम लोन के ब्याज पर भी मिला फायदा

इस मामले में NRI को कुछ अन्य खर्चों पर भी राहत मिली। ट्रिब्यूनल ने प्रॉपर्टी खरीदने के लिए लिए गए होम लोन पर चुकाए गए 21.60 लाख रुपये के ब्याज को प्रॉपर्टी की खरीद लागत में जोड़ने की अनुमति दी। इसके अलावा, 2.29 लाख रुपये का वन-टाइम मेंटेनेंस डिपॉजिट और 1.71 लाख रुपये का बिजली-पानी का डिपॉजिट भी खरीद लागत में शामिल करने की अनुमति दी गई। ब्याज पर इंडेक्सेशन का लाभ भी स्वीकार किया गया।

NRI किन बातों का रखें ध्यान?

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 48(i) के तहत प्रॉपर्टी बेचने से सीधे जुड़े खर्चों को कैपिटल गेन की गणना में घटाया जा सकता है। इसलिए NRI को फ्लाइट टिकट, होटल बिल, सेल एग्रीमेंट, रजिस्ट्री के दस्तावेज और दूसरे जरूरी भुगतान की रसीदें संभालकर रखनी चाहिए। अगर यात्रा में परिवार के सदस्य भी शामिल हैं या व्यक्तिगत काम किए गए हैं, तो उनके खर्च अलग रखने चाहिए। ध्यान रहे, यह फैसला हर यात्रा पर अपने आप लागू नहीं होता। खर्च का प्रॉपर्टी की बिक्री से सीधा संबंध साबित करना जरूरी है।

इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) की बेंगलुरु बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि अगर कोई NRI भारत में अपनी प्रॉपर्टी बेचने और उसकी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विदेश से यात्रा करता है, तो वह फ्लाइट टिकट पर हुए खर्च को कैपिटल गेन टैक्स की गणना में घटाने का दावा कर सकता है। इसके लिए NRI को यह साबित करना होगा कि उसकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य प्रॉपर्टी बेचना था। उसे फ्लाइट टिकट, होटल बिल, सेल एग्रीमेंट और रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेज सबूत के तौर पर पेश करने होंगे। ITAT के मुताबिक, प्रॉपर्टी की बिक्री से सीधे जुड़े और साबित किए जा सकने वाले ऐसे खर्चों को कैपिटल गेन की गणना करते समय घटाया जा सकता है। इससे NRI का टैक्स योग्य मुनाफा कम हो सकता है और उसे टैक्स में राहत मिल सकती है। हालांकि, निजी काम या घूमने-फिरने के लिए की गई यात्रा का खर्च इस छूट के दायरे में नहीं आएगा।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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