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Sugar MSP: चीनी की मिनिमम रेट 31 से बढ़ाकर 42 रुपये/KG करने की मांग, क्यों बढ़ाई जानी चाहिए कीमत?

Sugar MSP: अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (AISTA) ने चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 31 से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किग्रा करने की मांग की है। संगठन ने गन्ने के एफआरपी का समर्थन करते हुए एथनॉल प्रोजेक्ट्स पर राहत की सिफारिश की।

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चीनी की मिनिमम कीमत बढ़ाने की उठी मांग

Photo : iStock

Sugar MSP : देश में चीनी कारोबारियों के प्रमुख संगठन 'अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ' (AISTA) ने सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (Minimum Selling Price) जो फिलहाल 31 रुपये प्रति किलो है, उसे बढ़ाकर 42 रुपये प्रति किलो (यानी 4,200 रुपये प्रति क्विंटल) किया जाए। यह मांग ऐसे समय पर सामने आई है जब एक उच्चस्तरीय समिति देश के कुछ राज्यों में गन्ना किसानों के असंतोष और उनकी शिकायतों के कारणों की बारीकी से जांच कर रही है।

गन्ने के मूल्य का समर्थन और समिति के सामने प्रस्तुति

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ (एआईएसटीए) ने सरकार द्वारा तय किए गए गन्ने के मूल्य को पूरी तरह से उचित और न्यायसंगत बताते हुए उसका पुरजोर समर्थन किया है। संगठन ने यह मांगें और अपने सुझाव 13 अक्टूबर को गठित की गई चार सदस्यीय समिति के सामने एक विशेष प्रस्तुति के दौरान रखीं। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में बनाई गई इस विशेष समिति का मुख्य उद्देश्य कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों में प्रदर्शन कर रहे गन्ना किसानों की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित समाधान निकालना है। इस समिति ने हाल ही में 4 नवंबर को बेंगलुरु और उसके बाद पुणे में गन्ना किसानों से सीधी मुलाकात की थी, जिसमें AISTA का एक प्रतिनिधिमंडल भी पुणे की बैठक में शामिल हुआ था।

क्यों बढ़ाई जानी चाहिए चीनी की कीमत?

AISTA के चेयरमैन प्रफुल विठलानी ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) फरवरी 2019 के बाद से एक बार भी नहीं बदला गया है। उन्होंने कहा कि इसे बढ़ाकर कम से कम 4,200 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि देश की चीनी मिलें अपनी उत्पादन लागत से कम कीमत पर खुले बाजार में चीनी बेचने के लिए मजबूर न हों।

सरकार ने पिछले दिनों 2026-27 के चीनी सत्र (अक्टूबर से सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था। यह मूल्य 10.25 प्रतिशत की मूल चीनी 'रिकवरी दर' से जुड़ा हुआ है। विठलानी का कहना है कि जब सरकार ने यह तय किया था, तब संबंधित सभी पक्षों ने इसे व्यापक रूप से स्वीकार किया था। उनका मानना है कि जब एफआरपी तय है, तो इस पर अनावश्यक आंदोलन करने का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता, क्योंकि भारत में गन्ने की कीमतें दुनिया भर में मिलने वाली कीमतों में सबसे ज्यादा हैं।

गुजरात मॉडल अपनाने का आग्रह

संगठन ने समिति के समक्ष सुझाव दिया है कि किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए गुजरात में पहले से इस्तेमाल की जा रही भुगतान व्यवस्था का गहराई से अध्ययन किया जाना चाहिए। गुजरात के इस प्रस्तावित दो-स्तरीय मॉडल के तहत किसानों को एक बेहतरीन विकल्प मिलता है। इसके अनुसार किसान यह चुन सकते हैं कि उन्हें गन्ने की आपूर्ति के महज 7 से 14 दिनों के भीतर उनका पूरा एफआरपी नकद मिल जाए, या फिर वे तीन किस्तों में भुगतान स्वीकार करने का विकल्प चुनें जिसके बदले उन्हें तय एफआरपी के साथ 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि का लाभ मिले। यह मॉडल किसानों के आर्थिक हितों की रक्षा करने में काफी मददगार साबित हो सकता है।

एथनॉल संयंत्रों के कर्ज और ब्याज पर राहत की मांग

चीनी उद्योग से जुड़े संगठनों ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत एथनॉल आसवन संयंत्र (डिस्टिलरी) स्थापित करने के लिए लिए गए कर्ज के मामले में भी सरकार से बड़ी राहत मांगी है। AISTA ने आशंका जताई है कि खराब मौसम के चलते चालू और आगामी चीनी सत्र के दौरान अतिरिक्त 'सुक्रोज' की उपलब्धता काफी सीमित रहने की संभावना है। इससे सीधे तौर पर एथनॉल के उत्पादन पर असर पड़ेगा और वह घटेगा, जिसके चलते चीनी मिलों के लिए बैंकों का कर्ज चुकाना काफी मुश्किल हो जाएगा।

इसे ध्यान में रखते हुए संगठन ने मांग की है कि प्रभावित चीनी-आधारित एथनॉल परियोजनाओं के मूलधन और ब्याज के भुगतान पर कम से कम दो साल की रोक (Moratorium) लगाई जाए। इसके साथ ही, संगठन ने यह भी सिफारिश की है कि इस संकट की अवधि में कर्ज को एनपीए (फंसे कर्ज) में बदलने से रोकने के लिए सरकार को मौजूदा ब्याज सब्सिडी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 100 प्रतिशत कर देना चाहिए ताकि उद्योग को संबल मिल सके।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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