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सोने की खरीद रोकने से नहीं, ऐसे बचेगी विदेशी मुद्रा, AIJGF ने बताए रास्ते

Gold Buying: एआईजेजीएफ ने सरकार से सोने की खरीद रोकने के बजाय घरेलू सोने के पुनः इस्तेमाल को बढ़ावा देने की मांग की। संगठन ने चेतावनी दी कि इससे करोड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।

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गोल्ड खरीदारी टालने की अपील पर ज्वेलरी उद्योग नाराज, 3.5 करोड़ रोजगार पर खतरे की चेतावनी (तस्वीर-istock)

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Gold Buying : देश में विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign exchange reserves) पर बढ़ते दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से एक साल तक सोने और कीमती धातुओं की खरीदारी टालने की अपील की है। प्रधानमंत्री का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की वजह से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और इससे भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है। ऐसे में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना जरूरी है। हालांकि, इस अपील के बाद ज्वेलरी उद्योग से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है।

AIJGF ने सरकार को लिखा पत्र

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने सरकार से कहा है कि सोने की खरीदारी कम करने की सलाह देने के बजाय घरेलू सोने के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। संगठन का मानना है कि देश में पहले से मौजूद सोने को दोबारा बाजार में लाकर विदेशी मुद्रा की समस्या का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा कि सरकार की चिंता सही है, लेकिन बिना किसी ठोस विकल्प के लोगों को सोना खरीदने से रोकने की कोशिश ज्वेलरी उद्योग को नुकसान पहुंचा सकती है। उन्होंने कहा कि मांग कम होने से कारोबार, उत्पादन और रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।

3.5 करोड़ लोगों की आजीविका पर खतरा

एआईजेजीएफ ने चेतावनी दी है कि अगर लोगों के मन में सोना खरीदने को लेकर नकारात्मक धारणा बन गई, तो बाजार में खरीदारी घट सकती है। इससे छोटे ज्वेलर्स, कारीगरों और स्वर्णकारों की आमदनी प्रभावित होगी। संगठन के अनुसार देशभर में करीब 3.5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से ज्वेलरी उद्योग से जुड़े हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में मंदी आने से लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। पंकज अरोड़ा ने कहा कि भारत में आभूषण केवल शौक या विलासिता की चीज नहीं हैं, बल्कि यह लोगों के लिए बचत और निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों में सोना आर्थिक सुरक्षा के रूप में देखा जाता है।

घरेलू सोने के इस्तेमाल पर जोर

फेडरेशन का कहना है कि भारत में बड़ी मात्रा में सोना घरों और तिजोरियों में बिना इस्तेमाल के पड़ा हुआ है। अगर इस सोने को व्यवस्थित तरीके से बाजार में लाया जाए, तो नए सोने के आयात की जरूरत कम हो सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत भी होगी और उद्योग पर भी असर नहीं पड़ेगा। एआईजेजीएफ ने सुझाव दिया कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए, जिससे लोग अपने पुराने सोने को बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था के जरिए बाजार में ला सकें। इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

‘सर्राफा बैंक’ बनाने का प्रस्ताव

फेडरेशन ने सरकार को एक विशेष ‘सर्राफा बैंक’ बनाने का सुझाव भी दिया है। इस बैंक का काम घरेलू सोने को इकट्ठा करके उसे उद्योग और बाजार में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराना होगा। संगठन का मानना है कि इससे सोने के आयात पर निर्भरता कम होगी। इसके अलावा एआईजेजीएफ ने यह भी सुझाव दिया कि गोल्ड ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) को अपनी कुल भौतिक होल्डिंग का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित व्यवस्था के तहत उधार देने की अनुमति दी जाए। इससे बाजार में सोने की उपलब्धता बढ़ेगी।

स्वर्ण मौद्रीकरण योजना फिर शुरू करने की मांग

फेडरेशन ने सरकार से स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम) को दोबारा शुरू करने की भी मांग की है। इस योजना के तहत लोग अपने घरों में रखा सोना बैंकों में जमा कर सकते हैं और बदले में ब्याज कमा सकते हैं। संगठन का कहना है कि इस योजना को आसान और आकर्षक बनाकर ज्यादा लोगों को इससे जोड़ा जा सकता है। ज्वेलरी उद्योग का मानना है कि अगर सरकार घरेलू सोने के बेहतर इस्तेमाल पर ध्यान दे, तो विदेशी मुद्रा बचाने के साथ-साथ उद्योग और रोजगार दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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