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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: दुनिया भर में महंगे हुए पेट्रोल-डीजल, लेकिन लोगों को राहत दे रही है भारत सरकार, बोले हरदीप सिंह पुरी

Petrol Diesel Prices: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने बताया कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर तक पहुंच गई है। इसके कारण दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल महंगे हुए हैं। लेकिन सरकार खुद पर आर्थिक दबाव लेगी, लेकिन आम भारतीय नागरिकों राहत देगी।

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केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (तस्वीर-x/istock)

Petrol Diesel Prices: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी तेजी से बढ़ी हैं। पहले यह करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर करीब 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इस अचानक बढ़ोतरी का असर पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है। कई देशों में पेट्रोल और डीजल के दाम 20% से लेकर 50% तक बढ़ चुके हैं।

दुनिया भर में बढ़े ईंधन के दाम

मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30% से 50% तक बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उत्तर अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में करीब 20% तक कीमतें बढ़ी हैं। अफ्रीकी देशों में यह बढ़ोतरी 50% तक पहुंच गई है। यानी साफ है कि महंगे कच्चे तेल का असर वैश्विक स्तर पर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

सरकार के सामने कठिन फैसला

ऐसे हालात में भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे। पहला, अन्य देशों की तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी जाए, जिससे आम जनता पर सीधा बोझ पड़े। दूसरा, सरकार खुद आर्थिक नुकसान उठाकर नागरिकों को इस महंगाई से बचाए।

प्रधानमंत्री का फैसला

मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने दूसरे विकल्प को चुना। उन्होंने निर्णय लिया कि सरकार खुद पर आर्थिक दबाव लेगी, ताकि आम भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत मिल सके। यह फैसला सरकार की पिछले कुछ वर्षों से चली आ रही नीति के अनुरूप है, जिसमें जनता को प्राथमिकता दी गई है।

सरकार और तेल कंपनियों पर असर

इस फैसले के तहत सरकार ने अपने टैक्स से होने वाली आय में कमी स्वीकार की है। इसके अलावा, तेल कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अनुमान के मुताबिक, इस समय पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर करीब 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। सरकार ने इस नुकसान को कम करने के लिए कदम उठाए हैं ताकि कंपनियों पर पूरा बोझ न पड़े।

एक्सपोर्ट पर लगाया गया टैक्स

सरकार ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों को देखते हुए इनके निर्यात (एक्सपोर्ट) पर टैक्स लगा दिया गया है। इसका मतलब यह है कि जो रिफाइनरी कंपनियां विदेशों में तेल बेचेंगी, उन्हें अतिरिक्त टैक्स देना होगा। इससे देश के अंदर ईंधन की उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

सरकार के फैसले की सराहना

मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) का आभार जताया। उन्होंने इसे समय पर लिया गया साहसिक और दूरदर्शी कदम बताया।

इसे साफ होता है कि बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत सरकार ने आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। हालांकि इससे सरकार और तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, लेकिन इसका उद्देश्य देश के नागरिकों को महंगाई से बचाना है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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