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अगले 1 साल में दुनिया की आर्थिक वृद्धि होगी कमजोर, लेकिन मजबूती से खड़ा रहेगा भारत

Global Economic Growth: विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक सुस्ती और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई गई है, लेकिन मजबूत घरेलू मांग और निवेश के कारण भारत सबसे तेज बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रह सकता है।

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल, फिर भी भारत सबसे मजबूत देशों में शामिल (तस्वीर-istock)

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Global Economic Growth : विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले एक साल में दुनिया की आर्थिक वृद्धि कमजोर पड़ सकती है। दुनियाभर के मुख्य अर्थशास्त्रियों के बीच किए गए एक सर्वे के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बढ़ती भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा संकट और व्यापार मार्गों में रुकावटों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि इस मुश्किल माहौल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को मजबूत वृद्धि संभावनाओं वाला देश माना गया है।

90 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने जताई चिंता

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की रिपोर्ट की सर्वे में शामिल करीब 90 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक वृद्धि धीमी हो सकती है। वहीं 13 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने दुनिया में मंदी आने की आशंका जताई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

महंगाई बढ़ने का भी खतरा

WEF की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने से अगले एक साल में महंगाई बढ़ सकती है। सर्वे में शामिल 94 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने माना कि तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा लगातार बना हुआ है। खासकर पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता

WEF की रिपोर्ट में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका को बड़ा खतरा बताया गया है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसका असर कोविड-19 महामारी के दौरान पैदा हुई स्थिति जैसा गंभीर हो सकता है। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला टूट सकती है और ऊर्जा तथा खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

भारत और अमेरिका की स्थिति मजबूत

WEF का कहना है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बने रह सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों को घरेलू मांग, निवेश और मजबूत आर्थिक नीतियों का समर्थन मिल रहा है। खासतौर पर भारत को बड़े उभरते बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश बताया गया है।

भारत की वृद्धि संभावनाएं सबसे बेहतर

सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। इसी वजह से भारत को सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश माना गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था वर्ष 2026-27 में करीब 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। हालांकि पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को भारत के लिए भी जोखिम माना गया है।

भारत की नीतियों को मिला समर्थन

WEF ने कहा कि भारत ने व्यापार और पूंजी प्रवाह के रास्ते लगातार खोले हैं। साथ ही सरकार ने सक्रिय आर्थिक नीतियां अपनाई हैं और बाजार पहुंच का भी विस्तार किया है। यही कारण है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।

गरीब देशों पर सबसे ज्यादा असर

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक WEF की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा कि यदि मौजूदा तनाव लंबा खिंचता है तो इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो पहले से आर्थिक रूप से कमजोर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया और उत्तर अफ्रीका के देशों पर इस संकट का सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है।

वैश्विक जोखिमों के बीच भारत पर उम्मीदें कायम

रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, लेकिन भारत अपनी मजबूत घरेलू मांग, निवेश और आर्थिक सुधारों के दम पर बेहतर स्थिति में बना हुआ है। हालांकि वैश्विक तनाव और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले समय में भारत के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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