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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता घटाने के लिए आईएमईसी, हिंद-प्रशांत मार्ग बेहद अहम: रिपोर्ट

ईवाई की ’इकॉनमी वॉच’ की मई रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट और बदलती वैश्विक व्यापार एवं आर्थिक व्यवस्था से उत्पन्न दबावों को देखते हुए भारत को अपनी वृद्धि रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनियाभर के लिए एक जरूरी व्यापारिक मार्ग है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

देश को होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करने के लिए अपने व्यापार मार्गों में विविधता लाने और भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) तथा मलक्का जलडमरूमध्य के जरिये हिंद-प्रशांत मार्ग जैसे वैकल्पिक संपर्क गलियारों के विकास में तेजी लाने की जरूरत है। वित्तीय परामर्श कंपनी ईवाई की एक रिपोर्ट में यह कहा गया।

ईवाई की ’इकॉनमी वॉच’ की मई रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया संकट और बदलती वैश्विक व्यापार एवं आर्थिक व्यवस्था से उत्पन्न दबावों को देखते हुए भारत को अपनी वृद्धि रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है, ताकि मध्यम और दीर्घकालिक वृद्धि पथ को नुकसान से बचाया जा सके।

इस महीने की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोने के आयात में कमी, विदेशी यात्राओं में कटौती और घरेलू ईंधन खपत घटाने जैसे मितव्ययिता उपायों का आह्वान किया था। रिपोर्ट में कहा गया कि भविष्य में भारत को अप्रत्याशित आर्थिक झटकों और कमजोरियों से निपटने की तैयारी करनी होगी। इसके तहत सरकार कच्चे तेल, एलपीजी, उर्वरक, प्रसंस्कृत एवं अप्रसंस्कृत दुर्लभ खनिज पदार्थों, दवाओं और महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों के रणनीतिक भंडार तैयार करने पर विचार कर सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रत्याशित परमाणु और जैविक खतरों के प्रभाव को कम करने के लिए दोहरे उपयोग वाले बुनियादी ढांचे के निर्माण तथा चालू खाते और राजकोषीय घाटे को टिकाऊ स्तर पर बनाए रखने की रणनीति पर भी नए सिरे से काम करने की जरूरत है।

इसमें कहा गया कि हरित और परमाणु ऊर्जा, विशेष रूप से थोरियम आधारित उत्पादन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने, स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के विकास और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेज बदलाव की भी आवश्यकता हो सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि पेट्रोलियम स्रोतों में हालिया विविधीकरण से भारत की होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कुछ कम हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, ’’भारत को व्यापार के वैकल्पिक मार्गों में और विविधता लाने तथा भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) और मलक्का जलडमरूमध्य वाले हिंद-प्रशांत गलियारे के विकास में तेजी लाने की दिशा में काम करना चाहिए।’’

(इनपुट- भाषा)

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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