बिजनेस

सैलरी आने से पहले ही मिल जाएगा Cash! क्या है Salary Account पर OD फैसिलिटी

बीच महीने में ही पैसे कम पड़ जाएं तो इसके लिए अगली सैलरी का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। आपका बैंक आपको एक्सट्रा कैश दे सकता है।

Image

Salary account overdraft facility (Photo: iStock)

क्या आप भी महीना खत्म होने के साथ अकाउंट (Salary Account) में सैलरी आने का बेसब्री से इंतजार करते हैं? क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है जब सैलरी आने से कुछ दिन पहले ही किसी मेडिकल बिल, रेंट देने या बाइक के अचानक खराब होने पर पैसों की कमी महसूस हुई हो? अगर हां तो ये जानकारी आपके काम की साबित हो सकती है। नौकरी करने वाले बहुत कम लोगों को पता होगा कि उन्हें उनके सैलरी अकाउंट पर ओवरड्राफ्ट फैसिलटी (Salary account overdraft facility) भी मिलती है। सैलरी अकाउंट पर ओवरड्राफ्ट फैसलिटी क्या है इस आर्टिकल में सभी जरूरी जानकारी देने जा रहे हैं-

सैलरी अकाउंट ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी क्या है

Salary account overdraft facility

Salary account overdraft facility (Photo: iStock)

सैलरी अकाउंट ओवरड्राफ्ट एक प्री-अप्रूव्ड लिमिट होती है, जो आपके सैलरी अकाउंट से जुड़ी होती है। इसकी मदद से आप अपने खाते में मौजूद बैलेंस से ज्यादा पैसा भी निकाल सकते हैं। आसान शब्दों में कहें तो यह एक तरह का फाइनेंशियल बैकअप है, जो अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर काम आता है। यानी पैसों की जरूरत पड़ने पर आपको नया लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ती।

कई बैंक आपकी नियमित सैलरी आने और अकाउंट के अच्छे रिकॉर्ड के आधार पर यह सुविधा खुद ही दे देते हैं या फिर जरूरत पड़ने पर उपलब्ध भी करवा देते हैं। हालांकि, ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी को लेकर ब्याज की शर्तें भी समझना जरूरी है। इस सुविधा के साथ ब्याज केवल उतनी ही राशि पर लगता है, जितना पैसा आपने इस्तेमाल किया है और सिर्फ उतने दिनों के लिए ही लगता है, जितने समय तक आपने उस पैसे का इस्तेमाल किया हो।

ओवरड्राफ्ट फैसिलटी क्रेडिट कार्ड से बेहतर

ओवरड्राफ्ट फैसिलटी को क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन से बेहतर विकल्प समझा जाता है। ओवरड्राफ्ट फैसिलटी में ब्याज दर आमतौर पर कम होती है और यह अक्सर प्री-अप्रूव्ड होने के कारण इसमें बहुत कम डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत पड़ती है। इसमें आपको पैसे तुरंत अपने बैंक अकाउंट से मिल जाते हैं और आप अपनी सुविधा अनुसार कभी भी भुगतान कर सकते हैं। वहीं, क्रेडिट कार्ड में ब्याज दर काफी ज्यादा होती है और अगर आप केवल न्यूनतम राशि भरते हैं, तो बाकी रकम पर ब्याज लगातार बढ़ता रहता है। दूसरी ओर, पर्सनल लोन में ब्याज दर मध्यम होती है, लेकिन इसके लिए आय प्रमाण और अन्य दस्तावेज देने पड़ते हैं। साथ ही, इसमें तय EMI के जरिए ही भुगतान करना होता है और पैसा भी पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिलता है।

ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी का समझदारी से इस्तेमाल

ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी को समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसे केवल वास्तविक और कम समय की जरूरतों के लिए ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए जैसे अचानक खर्च या इमरजेंसी। कोशिश होनी चाहिए कि इस्तेमाल की गई राशि को जितनी जल्दी हो सके वापस चुका दें, ताकि ब्याज कम लगे। अपने बैंकिंग ऐप के जरिए नियमित रूप से इसकी उपयोग स्थिति पर नजर रखनी चाहिए, जिससे आप अनावश्यक खर्च से बच सकें। इस सुविधा को कभी भी अतिरिक्त आय (extra income) नहीं समझना चाहिए।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

और पढ़ें
End of Article