सरकार ने देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार के लिए 7 नए कॉरिडोर प्रस्तावित किए हैं। इन कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 4,000 किलोमीटर होगी और अगले दशक में इन पर करीब ₹16 लाख करोड़ का निवेश होने का अनुमान है। इस बड़े रेलवे अपग्रेड साइकिल में जिन कंपनियों पर सबसे ज्यादा नजर है, उनमें Titagarh Rail Systems का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। यह भारत की इकलौती कंपनी है जो फ्रेट वैगन के साथ-साथ पैसेंजर रेल कोच भी बनाती है। भारतीय वैगन मैन्युफैक्चरिंग बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 25% है, जिससे इसकी मजबूत स्थिति दिखाई देती है।
क्यों चर्चा में है ये कंपनी?
यह देश की उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है जो फ्रेट वैगन के साथ-साथ पैसेंजर रेल कोच और ट्रेनसेट भी बनाती हैं। कंपनी ने हाल के वर्षों में मेट्रो ट्रेन, वंदे भारत जैसे पैसेंजर रोलिंग स्टॉक पर अपना फोकस बढ़ाया है। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में अहमदाबाद मेट्रो के लिए भारत की पहली स्वदेशी स्टेनलेस स्टील ड्राइवरलेस ट्रेनसेट तैयार की है। यह उपलब्धि कंपनी की तकनीकी क्षमता को दिखाती है और भविष्य में हाई-स्पीड रेल और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स में इसकी दावेदारी को मजबूत बनाती है।
एल्यूमिनियम कोच प्लांट से बड़ा कदम
हाई-स्पीड ट्रेन निर्माण में हल्के और मजबूत एल्यूमिनियम कोच बेहद अहम होते हैं। इसी को देखते हुए कंपनी एक अत्याधुनिक एल्यूमिनियम कोच मैन्युफैक्चरिंग सुविधा स्थापित कर रही है। यह नई यूनिट FY27 की पहली छमाही तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही कंपनी 1.6 किलोमीटर का टेस्ट ट्रैक भी तैयार कर रही है। कंपनी को हाल ही में रेलवे मंत्रालय से Wagon Leasing License भी मिला है। इससे Titagarh अब केवल वैगन बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि खुद वैगन खरीदकर उन्हें निजी कंपनियों को लीज पर भी दे सकेगी। इससे मेंटेनेंस और सर्विस से भी कमाई के नए अवसर बनेंगे।
अब भी सस्ता नहीं वैल्यूएशन
वैल्यूएशन के लिहाज से देखें, तो टीटागढ़ रेल सिस्टम्स को पूरी तरह सस्ता स्टॉक नहीं कहा जा सकता। कंपनी का P/E लगभग 40–45 के आसपास है, जो कई इंजीनियरिंग और रेलवे कंपनियों के मुकाबले प्रीमियम माना जाता है। हालांकि, शेयर अपने 52-वीक हाई से करीब 34% नीचे ट्रेड कर रहा है, इसलिए हालिया गिरावट के बाद इसमें कुछ वैल्यूएशन कंफर्ट जरूर आया है। लेकिन, इसके बावजूद निवेशक इसमें रुचि इसलिए दिखा रहे हैं, क्योंकि रेलवे सेक्टर में बढ़ते कैपेक्स, हाई-स्पीड रेल और पैसेंजर रोलिंग स्टॉक के बड़े ऑर्डर अवसर से कंपनी की ग्रोथ मजबूत रहने की उम्मीद है।
क्या मल्टीबैगर बनेगा स्टॉक
किसी भी स्टॉक के बारे में निश्चित तौर पर यह कहना संभव नहीं होता कि वह मल्टीबैगर बनेगा। लेकिन Titagarh Rail Systems के मामले में कुछ ऐसे फैक्टर हैं, जो इसमें लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावना दिखाते हैं। कंपनी रेलवे वैगन के साथ-साथ पैसेंजर कोच और मेट्रो ट्रेनसेट बनाती है और अब हाई-स्पीड रेल व एल्यूमिनियम कोच मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेगमेंट में भी विस्तार कर रही है।
सरकार का रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा कैपेक्स, नए हाई-स्पीड कॉरिडोर और पैसेंजर रोलिंग स्टॉक की बढ़ती मांग कंपनी के लिए ऑर्डर अवसर बढ़ा सकते हैं। हालांकि, स्टॉक का वैल्यूएशन पहले से प्रीमियम पर है और प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन लंबी होती है, इसलिए इसमें उतार-चढ़ाव भी संभव है। ऐसे में इसे संभावित ग्रोथ स्टोरी माना जा सकता है, लेकिन यह मल्टीबैगर बनेगा या नहीं, यह कंपनी की ऑर्डर बुक, कमाई की रफ्तार और प्रोजेक्ट एक्सीक्यूशन पर निर्भर करेगा।
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