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ईरान की कमाई कहां से होती है? कौन-कौन से सेक्टर हैं दांव पर, जानें सबकुछ

ईरान पर इजराइल और अमेरिका के संयुक्त हमलों से सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। सर्वोच्च नेतृत्व का खत्म होना ईरान की अर्थव्यवस्था अब ढहने की कगार पर है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ईरान की कमाई कहां से होती है, उसके खजाने का मुख्य स्रोत क्या है और इस महायुद्ध में उसके कौन-कौन से आर्थिक सेक्टर दांव पर लगे हैं।

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Iran Earning

इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हालिया भीषण हमलों ने न केवल ईरान के सैन्य ठिकानों को दहला दिया है, बल्कि ईरान ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है। लंबे इंतजार और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व इजरायल के दावों के बाद अब ईरानी मीडिया ने भी इस बात को कन्फर्म किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में खामेनेई मारे जा चुके हैं। ईरान के सरकारी टीवी ने अभी कन्फर्म किया है कि देश के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत इजराइल-US के हमले में हुई। तेहरान ने रविवार को इस खबर को कन्फर्म किया।

एक तरफ युद्ध की आग और दूसरी तरफ सर्वोच्च नेतृत्व का खत्म होना ईरान की अर्थव्यवस्था अब ढहने की कगार पर है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ईरान की कमाई कहां से होती है, उसके खजाने का मुख्य स्रोत क्या है और इस महायुद्ध में उसके कौन-कौन से आर्थिक सेक्टर दांव पर लगे हैं।

सबसे बड़ा कमाई का जरिया

ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल भंडार है। उसके पास करीब 209 बिलियन बैरल तेल है। यही उसकी कमाई का असली सोर्स है। इसके अलावा प्राकृतिक गैस निर्यात से भी आय आती है। साल 2024 में करीब 22.18 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जिसमें तेल और पेट्रोकैमिकल्स का हिस्सा सबसे ज्यादा रहा। 2025 में प्रतिबंध और निर्यात में कमी की वजह से व्यापार का घाटा 15 बिलियन डॉलर तक पहुंचा।

ईरान चीन, तुर्की, UAE और इराक को सबसे ज्यादा निर्यात करता है। अकेले चीन को ही 90% तक तेल निर्यात करता है। ईरान ने INSTC कॉरिडोर और चीन के नए ट्रांजिट रूट्स खोलने की भी कोशिश की है। बावजूद इसके प्रतिबंध और परमाणु समझौते की अनिश्चितता के कारण व्यापार और मुद्रा स्टेबल नहीं हो पा रहे हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा जरिया उसका विशाल तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार है। दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक होने के नाते, ईरान की 80% से अधिक विदेशी मुद्रा की कमाई कच्चे तेल (Crude Oil) के निर्यात से आती है। हालांकि, पश्चिमी प्रतिबंधों ने इसकी राह मुश्किल की है, लेकिन चीन जैसे देशों को तेल बेचकर ईरान अपना गुजारा चलाता रहा है। इजरायल-अमेरिका के हमलों ने अब सीधे तौर पर ईरान के रिफाइनिंग सेंटर्स और तेल के कुओं को खतरे में डाल दिया है। अगर इन ठिकानों को नुकसान पहुंचता है, तो ईरान की कमाई का मुख्य जरिया पूरी तरह बंद हो सकता है, जिससे देश के पास युद्ध लड़ने के लिए भी पैसा नहीं बचेगा।

इन चीजों पर भी निर्भर है इकोनॉमी

तेल के बाद ईरान की कमाई का दूसरा बड़ा जरिया उसका खनिज क्षेत्र है। ईरान तांबा (Copper), लोहा (Iron Ore), और जस्ता (Zinc) के उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। इस्पात (Steel) उद्योग ईरान के औद्योगिक राजस्व में बड़ी भूमिका निभाता है। इजरायल के साथ युद्ध लंबा खिंचने पर इन उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों की कमी और लॉजिस्टिक्स की रुकावटें उत्पादन को ठप कर सकती हैं। इसके अलावा, युद्ध के कारण बिजली की आपूर्ति बाधित होने से इन भारी उद्योगों का संचालन नामुमकिन हो जाएगा।

रिवॉल्यूशनरी गार्ड का आर्थिक साम्राज्य

ईरान की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा सरकारी नहीं, बल्कि 'इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) के नियंत्रण में है। यह संस्था निर्माण, बैंकिंग, दूरसंचार और बुनियादी ढांचे के बड़े प्रोजेक्ट्स चलाती है। चूंकि IRGC सीधे तौर पर युद्ध में शामिल है, इसलिए इजरायली हमलों में इनके आर्थिक मुख्यालयों को भी निशाना बनाया गया है। सुप्रीम लीडर खामनेई की अनुपस्थिति में इस संस्था के भीतर सत्ता संघर्ष और आर्थिक कुप्रबंधन ईरान को गृहयुद्ध जैसी स्थिति में धकेल सकता है, जिससे विदेशी निवेश और व्यापार पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

खतरे में इकोनॉमी

युद्ध और नेतृत्व के संकट ने ईरानी मुद्रा 'रियाल' (Rial) को ऐतिहासिक रूप से कमजोर कर दिया है। इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद रियाल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कौड़ियों के भाव हो गई है। देश में महंगाई दर (Inflation) 50% से ऊपर जा चुकी है, जिससे आम जनता के लिए रोटी-कपड़ा जुटाना भी दूभर हो गया है। खामनेई की मौत की खबरों ने जनता के बीच डर पैदा कर दिया है, जिससे लोग बैंकों से अपना पैसा निकाल रहे हैं और सोने या विदेशी मुद्रा की जमाखोरी कर रहे हैं। यह 'बैंक रन' जैसी स्थिति ईरान के बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह तबाह कर सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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