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विदेशी निवेशकों की दमदार वापसी! फरवरी महीने में की ₹16,912 करोड़ की खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का महीना राहत और उत्साह लेकर आया है। जनवरी की भारी बिकवाली के बाद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताते हुए शानदार वापसी की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने इस महीने अब तक 16,912 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है।

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भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत उतार-चढ़ाव भरी रही थी, लेकिन फरवरी महीने के आंकड़ों ने निवेशकों और विशेषज्ञों के चेहरे पर खुशी ला दी है। वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का भरोसा भारतीय अर्थव्यवस्था पर फिर से मजबूत होता दिख रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 16,912 करोड़ रुपये की बड़ी शुद्ध खरीदारी (Net Buying) की है। यह रुझान दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय फंड्स एक बार फिर भारत को लंबी अवधि के निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और आकर्षक बाजार मान रहे हैं।

जनवरी की बिकवाली के बाद दमदार वापसी

इस निवेश के महत्व को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है। जनवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला था, जिससे बाजार में काफी दबाव देखा गया था। लेकिन फरवरी में यह ट्रेंड पूरी तरह बदल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियों के तीसरी तिमाही (Q3) के शानदार नतीजों और भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ ने विदेशी निवेशकों को फिर से आकर्षित किया है। जब दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती से जूझ रही हैं, तब भारत की 7% से अधिक की विकास दर विदेशी निवेशकों के लिए एक 'चुंबक' का काम कर रही है।

किन सेक्टरों में हुई सबसे ज्यादा खरीदारी?

विदेशी निवेशकों का पैसा इस बार कुछ खास सेक्टरों पर केंद्रित रहा है। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं (BFSI), आईटी (IT) और ऑटोमोबाइल सेक्टर में सबसे ज्यादा खरीदारी देखी गई है। विशेष रूप से बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और बैंकों के बढ़ते मुनाफे ने एफपीआई को भरोसा दिलाया है। इसके अलावा, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों में भी विदेशी फंड्स ने अच्छी खासी दिलचस्पी दिखाई है। सरकार द्वारा बजट में किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के वादों ने भी इस निवेश को गति देने में बड़ी भूमिका निभाई है।

ग्लोबल मार्केट और डॉलर इंडेक्स का असर

विदेशी निवेशकों की इस वापसी के पीछे कुछ वैश्विक कारण भी जिम्मेदार हैं। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में स्थिरता और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों को लेकर आए स्पष्ट संकेतों ने निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है। जब अमेरिका में ब्याज दरें स्थिर होती हैं, तो निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) जैसे भारत की ओर रुख करते हैं, जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना होती है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूत स्थिति और नियंत्रण में रहती महंगाई ने भी इस भरोसे को और पुख्ता किया है।

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Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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