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Finance Ministry: वित्त मंत्रालय ने फेमा के तहत ‘कम्पाउंडिंग' नियमों में संशोधन किया, जानें क्या होगा फायदा

Compounding: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी निवेश के लिए नियमों को सरल बनाने को लेकर केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषणा की थी। इसके अनुरूप, वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग कार्यवाही) नियम, 2024 को अधिसूचित किया है।

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वित मंत्रालय

Photo : PTI

Compounding: वित्त मंत्रालय ने विदेशी विनिमय प्रबंधन कानून (फेमा) के तहत किये गये अपराधों के लिए ‘कम्पाउंडिंग’ नियमों में संशोधन किया है। इसके तहत मामले के भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा औपचारिक निपटान को लेकर मौद्रिक सीमा बढ़ायी गयी है और ऑनलाइन भुगतान की अनुमति दी गयी है।‘कम्पाउंडिंग’ से तात्पर्य स्वेच्छा से नियमों के उल्लंघन को स्वीकार करने, दोषी होने की दलील देने और निवारण की मांग करने की प्रक्रिया से है।विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग कार्यवाही) नियम, 2024 के अनुसार, कम्पाउंडिंग आवेदन दाखिल करने का शुल्क पहले के 5,000 रुपये से दोगुना होकर 10,000 रुपये जमा जीएसटी कर दिया गया है।

आरबीआई अधिकारियों को मिले ज्यादा अधिकार

अधिसूचना में कहा गया है कि आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी 60 लाख रुपये तक के ‘कम्पाउंडिंग’ आवेदन पर निर्णय ले सकते हैं। यह पहले 10 लाख रुपये था।इसी तरह, उप-महाप्रबंधक और महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों के लिए मौद्रिक सीमा क्रमशः 2.5 करोड़ रुपये और पांच करोड़ रुपये कर दी गई है।आरबीआई में मुख्य महाप्रबंधक पांच करोड़ रुपये से अधिक के ‘कम्पाउंडिंग’ मामलों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत होंगे।वित्त मंत्रालय ने बयान में कहा कि विदेशी मुद्रा (कम्पाउंडिंग कार्यवाही) नियम, 2024, 2000 में जारी नियमों की जगह लेगा।

बिजनेस करना होगा आसान

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी निवेश के लिए नियमों को सरल बनाने को लेकर केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषणा की थी। इसके अनुरूप, वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग कार्यवाही) नियम, 2024 को अधिसूचित किया है।

इसमें कहा गया है कि व्यापार करने में आसानी को और इसे अधिक सुगम बनाने के लिए मौजूदा नियमों और विनियमों को सुव्यवस्थित तथा तर्कसंगत बनाने की एक व्यापक पहल के तहत रिजर्व बैंक के परामर्श से कम्पाउंडिंग कार्यवाही नियमों की व्यापक समीक्षा की गई।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘कम्पाउंडिंग आवेदनों के प्रसंस्करण में तेजी लाने और उसे दुरुस्त करने को लेकर संबंधित प्रावधानों पर जोर दिया गया है। इसके तहत, आवेदन शुल्क और कम्पाउंडिंग राशि के लिए डिजिटल भुगतान विकल्पों की शुरुआत और अस्पष्टता को खत्म करने तथा प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए प्रावधानों को सरल और तर्कसंगत बनाने पर ध्यान दिया गया है।’’

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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