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शुल्क वापसी के लिए अमेरिकी बायर्स से बढ़ाएं बातचीत, निर्यातकों के लिए खुलेगी मुनाफे की नई राह: FIEO

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) ने भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में मजबूती दिलाने के लिए एक नई रणनीति सुझाई है।

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FIEO (Photo: iStock)

निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो (FIEO) ने अपने सदस्यों को अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत करने की सलाह दी है ताकि वे शुल्क वापसी में हिस्सेदारी हासिल कर सकें। अमेरिका ने 20 अप्रैल से जवाबी शुल्क की वापसी की प्रक्रिया शुरू की है। पीटीआई (भाषा) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने मंगलवार को कहा कि इन शुल्क वापसी पर भारतीय निर्यातकों का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि यह केवल अमेरिकी कंपनियों को मिल रहा है।

अमेरिकी खरीदार से अच्छे संबंध का उठाएं फायदा

उन्होंने कहा, "लेकिन अगर किसी भारतीय निर्यातक के अपने अमेरिकी खरीदार से अच्छे संबंध हैं, तो उसे कुछ हिस्सा मिल सकता है।" चमड़ा क्षेत्र के एक उद्योग अधिकारी ने कहा कि व्यवसाय इस मुद्दे पर अमेरिकी आयातकों के साथ चर्चा करेंगे। एक चमड़ा निर्यातक ने कहा, "हम इस बारे में अपने खरीदारों से बात कर रहे हैं।"

जवाबी शुल्क व्यवस्था दो अप्रैल 2025 को 10 प्रतिशत से शुरू हुई थी, जिसे लगातार तेजी से बढ़ाया गया। भारत के लिए दरें सात अगस्त 2025 तक 25 प्रतिशत और 28 अगस्त तक 50 प्रतिशत तक पहुंच गईं और फरवरी 2026 की शुरुआत तक इसी स्तर पर बनी रहीं।

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को दिए फैसले में ट्रंप के शुल्क के पूरे ढांचे को अमान्य कर दिया, जिससे ये शुल्क कानूनी रूप से शून्य हो गए और इसकी वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इन उच्च शुल्कों से प्रभावित हुआ है।

शोध संस्थान जीटीआरआई के अनुसार, कुल शुल्क वापसी की राशि करीब 166 अरब डॉलर है, जिसमें से करीब 12 अरब डॉलर भारतीय वस्तुओं से संबंधित हैं।

भारतीय निर्यातकों का इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, "भारत से जुड़े अनुमानित 12 अरब अमेरिकी डॉलर में से, वस्त्र एवं परिधान का हिस्सा करीब चार अरब डॉलर, इंजीनियरिंग सामान का हिस्सा लगभग चार अरब डॉलर और रसायन का हिस्सा करीब दो अरब डॉलर हो सकता है जबकि अन्य क्षेत्रों का हिस्सा कम होगा।"

उन्होंने कहा कि भारतीय निर्यातकों को ये शुल्क स्वतः वापस नहीं मिलेगा और यह राशि केवल अमेरिकी आयातकों को जाती है इसलिए निर्यातकों का इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

श्रीवास्तव ने सुझाव दिया कि निर्यातकों को अनुबंधों को पर गौर करना चाहिए और ’इनवॉइस’ एवं शुल्क आंकड़े के आधार पर यह देखना चाहिए कि लागतों को कैसे एडजस्ट किया गया था।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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