2026 अब आधा बीतने को आया है। साल के शुरुआती 5 महीने खासतौर पर शेयर बाजार के लिहाज से बेहद निराशाजनक रहे हैं। जून 2026 में अब बाजार की दिशा मोटे तौर पर 5 अहम फैक्टर पर तय होगी। इनमें महीने की शुरुआत 3 से 5 जून के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक की पॉलिसी मीटिंग
(June 2026 RBI MPC Meeting) से होगी। इसके साथ ही महीने के शुरुआती दौर में ही भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India US Trade Deal) को लेकर बड़ी घोषणा देखने को मिल सकती है। वहीं, मानसून (Monsoon) के लिहाज से भी यह महीना अहम रहने वाला है। इसके बाद 16-17 जून को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पॉलिसी मीटिंग (US Fed Meeting) का असर भी ग्लोबल बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है।
रिजर्व बैंक की पॉलिसी मीटिंग
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की मीटिंग 3 जून से 5 जून, 2026 तक होनी है। इस अहम बैठक के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार, 5 जून, 2026 को पॉलिसी के फैसलों के साथ ही महंगाई के अनुमानों का ऐलान करेंगे। यह घोषणाएं न केवल शेयर बाजार के लिए अहम होंगी। बल्कि, देश की पूरी इकोनॉमी की दिशा तय करेंगी।
क्या है बाजार की उम्मीद : जून 2026 की मीटिंग को लेकर बाजार और इकोनॉमिस्ट को उम्मीद है कि बेंचमार्क रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। इस तरह रेपो रेट 5.25% पर बनी रह सकती है। आखिरी बार रेपो रेट में दिसंबर 2025 में बदलाव किया गया था। इसके बाद फरवरी और अप्रैल में MPC ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि, माना जा रहा है कि पॉलिसी को लेकर अब रुख न्यूट्रल से सतर्क या सख्त हो सकता है। हालांकि, 2026 के आखिर तक रेट में बढ़ोतरी की संभावना भी बढ़ रही है।
मानसून
IMD के अनुमानों के लिहाज से मानसून के कमजोर रहने की आशंका बढ़ रही है। आमतौर पर मानसून मई के आखिरी वीक में शुरू हो जाता है। लेकिन, फिलहाल इसमें देरी होती दिख रही है। जून में पूरे महीने निवेशकों की नजर मानसून के आंकड़ों पर रहेगी। क्योंकि, भारत की इकोनॉमी में मानसून बेहद अहम होता है। मानसून में कमजोरी और देरी दोनों ही इकोनॉमी की रफ्तार को सुस्त करने के साथ ही महंगाई बढ़ाने वाले फैक्टर होते हैं। ऐसे में न केवल जून बल्कि आगे पूरे साल के लिए बाजार पर मानसून के आंकड़ों का असर रहेगा।
India-US ट्रेड डील
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील लंबे समय से अंतिम चरण में अटकी है। 1 जून से नई दिल्ली में दोनों देशों के वार्ताकार इस मामले में 4 दिन की अहम बैठक शुरू कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि जून में इस डील को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है। शेयर बाजार और खासतौर पर देश के एक्सपोर्ट आधारित कारोबारों के लिए यह बेहद अहम है। अगर डील फाइनल हो जाती है, तो यह एक इकोनॉमिक बूस्टर होगा।
होर्मुज पर फैसला
यह इस महीने के सबसे अहम फैक्टर में शामिल है। फिलहाल, ईरान और अमेरिका के बीच कोई ऑफिशियल डील नहीं हुई है। लेकिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ईरान को 300 अरब डॉलर का रिकंस्ट्रक्शन फंड ऑफर किए जाने के बाद डील की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि, अब भी दोनों तरफ से पूरी तरह पॉजिटिव संकेत नहीं मिल रहे हैं। इसकी वजह से निवेशकों के बीच सतर्कता बनी हुई है।
यूएस फेड मीटिंग
16-17 जून को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पॉलिसी मीटिंग होनी है। अमेरिका में भी महंगाई और बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं। यूएस फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता में यह पहली फेड मीटिंग होनी है। वार्श हो ट्रंप का हैंड पिक्ड सलेक्शन कहा जा रहा है। ऐसे में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या वार्श ट्रंप की मांग के मुताबिक ब्याज दर में कटौती करते हैं या महंगाई के आंकड़ों को देखते हुए रेट हाइक या स्टांस बदलते हैं।
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