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सोने का आयात घटाने का रास्ता भारत के लाखों घरों में! गोल्ड एक्सपर्ट ने दिया यह गेम चेंजर प्लान

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, लेकिन यही चमक हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती भी बन रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक, भारतीय घरों में रखा हजारों टन सोना अगर सही तरीके से सर्कुलेशन में आ जाए तो भारत को बाहर से सोना मंगवाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी

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PM Modi gold appeal (Photo: iStock)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है। पीएम मोदी ने कहा कि घर में किसी भी तरह का फंक्शन हो लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना है कि देश हित के लिए सोने की खरीदारी नहीं की जाए। उन्होंने कहा कि अगर सोने की मांग कम होगी तो भारत को विदेश से सोना आयात करने पर अधिक डॉलर खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। सोने की खरीदारी घटने से गोल्ड कम आयात करना होगा। इससे गोल्ड आयात बिल घटेगा और डॉलर कम खर्च करने होंगे। डॉलर की मांग कम होने से रुपये पर दबाव भी कम पड़ेगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को बढ़ावा दिया जाए

ऑल बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिसमें सोना प्रमुख है। भारत में सोने की मांग बहुत अधिक होने के कारण हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करना पड़ता है, जिससे डॉलर में भुगतान बढ़ता है और चालू खाते घाटा पर दबाव पड़ता है। हालांकि, सरकार को इस 12 महीने की समस्या को देखते हुए केवल अपील करना काफी नहीं है बल्कि दूसरे विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।

योगेश सिंघल ने कहा, "भारत में घरों में बड़ी मात्रा में सोना रखा हुआ है, जिसे अर्थव्यवस्था में इस्तेमाल करने के लिए गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसमें ज्वैलर्स को भी बीच में जोड़ा जा सकता है, ताकि लोग अपना सोना जमा करें और उसके बदले गोल्ड लोन जैसी सुविधा मिल सके। इससे लोगों का सोना सुरक्षित तरीके से आर्थिक गतिविधियों में इस्तेमाल होगा और ज्वैलर्स को भी वर्किंग कैपिटल मिल सकेगा। सरकार को इस प्रक्रिया से करीब 1 प्रतिशत तक का फायदा हो सकता है, वहीं सोने के आयात पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।"

एकमद से मांग में कमी की संभावना कम

वहीं, कई गोल्ड एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भी सोने की मांग में बड़ी कमी की संभावना कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में शादियों में सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक महत्व भी रखता है। सोने को शुभ, समृद्धि और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। शादी के दौरान दुल्हन को सोने के गहने देना परिवार की प्रतिष्ठा और सुरक्षा से भी जोड़कर देखा जाता है।

चांदनी चौक में दरीबा ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुण गुप्ता का कहना है कि हर पिता अपनी बेटी को सोने के गहनों के साथ विदा करता है। ऐसे में पीएम मोदी की अपील का जनता पर कुछ असर तो होगा लेकिन गहनों को लेकर हमेशा से चली आने वाली परंपरा अचानक नहीं बदल सकती। शादियों पर लोग सोना-चांदी अचानक खरीदना कम नहीं कर सकते।

Shivani Kotnala
शिवानी कोटनालाauthor

शिवानी कोटनाला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के करियर में 3 साल से ज्यादा के अनुभव के साथ शिवानी ने बिजनेस और टेक से जुड़ी खबरों पर काम किया है। यूटीलिटी, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग से जुड़ी खबरों पर वह लगातार लिख रही हैं। शिवानी ने डिजिटल के साथ-साथ न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।

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