फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख यानी 31 जुलाई 2026 बेहद करीब आ चुकी है। जैसे-जैसे यह डेडलाइन पास आ रही है, वैसे-वैसे टैक्सपेयर्स के बीच हलचल बढ़ती जा रही है। बहुत से लोग यह सोचते हैं कि आईटीआर (ITR) सिर्फ उन्हीं लोगों को भरना होता है जिनकी सालाना कमाई टैक्स स्लैब के दायरे में आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आपकी कमाई कम भी है, मगर आपके बैंक अकाउंट (Savings Account) में एक तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा है या आपने भारी-भरकम कैश ट्रांजैक्शन किया है, तो भी आपके लिए आईटीआर दाखिल करना अनिवार्य हो जाता है? आइए बताते हैं अगर आपके सेविंग बैंक अकाउंट में लिमिट से ज्यादा पैसा है तो आपको क्या करना होगा?
इन लेन-देन पर रहती है नजर
आयकर विभाग अब हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शंस (High-Value Transactions) पर एआई (AI) और आधुनिक तकनीकों के जरिए पैनी नजर रख रहा है। ऐसे में अगर आपने तय सीमा से ज्यादा पैसा जमा किया है और 31 जुलाई से पहले रिटर्न नहीं भरा, तो आपके घर पर इनकम टैक्स का कानूनी नोटिस आ सकता है और भारी जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
सेविंग अकाउंट में लिमिट से ज्यादा पैसा
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि सेविंग्स अकाउंट (Savings Account) में पैसा जमा करने की वो लिमिट क्या है, जिस पर टैक्स विभाग अलर्ट हो जाता है? इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति एक वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल से 31 मार्च) के दौरान अपने एक या एक से अधिक सेविंग्स बैंक अकाउंट में कुल मिलाकर ₹10 लाख या उससे अधिक नगद (Cash) जमा करता है, तो बैंक इसकी जानकारी सीधे आयकर विभाग को देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य होते हैं। इसे 'स्पेसिफाइड फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन' (SFT) कहा जाता है। केवल कैश डिपॉजिट ही नहीं, बल्कि यदि आपने ₹10 लाख से ज्यादा की एफडी (Fixed Deposit) नगद पैसों से कराई है, या फिर क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान ₹1 लाख से ज्यादा कैश में किया है, तो ये सभी लेन-देन टैक्स विभाग के रडार पर आ जाते हैं। इसके अलावा, अगर आपके करंट अकाउंट (Current Account) में सालभर में ₹50 लाख या उससे अधिक का कैश डिपॉजिट या विड्रॉल होता है, तो उसकी भी रिपोर्टिंग की जाती है।
31 जुलाई से पहले ITR फाइलिंग क्यों है जरुरी?
दरअसल, जब आप अपने खाते में ₹10 लाख या उससे ज्यादा का कैश जमा करते हैं, तो आयकर विभाग आपके एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS में इसे दर्ज कर लेता है। यदि आप समय पर यानी 31 जुलाई से पहले अपना आईटीआर फाइल कर देते हैं, तो आप उसमें अपनी इस जमा राशि के 'सोर्स' (कमाई के जरिए) को साफ-साफ घोषित कर देते हैं। इससे टैक्स अधिकारियों को पता चल जाता है कि यह पैसा आपकी वैध और टैक्स-पेड कमाई का हिस्सा है। लेकिन, अगर आप इतने बड़े ट्रांजैक्शन के बावजूद अपना आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, तो टैक्स विभाग इसे 'संदिग्ध' मानता है और यह मान लेता है कि आप अपनी ब्लैक मनी या अघोषित आय को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं। नतीजा यह होता है कि डेडलाइन खत्म होते ही विभाग आपको 'गड़बड़ी' का नोटिस (Income Tax Notice) थमा देता है।
नोटिस आ जाए तो क्या करें?
अगर नोटिस आ जाए और आप पैसों का सही सोर्स या हिसाब न दे पाएं, तो क्या होगा? यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। यदि कोई टैक्सपेयर अपने खाते में जमा बड़ी रकम का सही जरिया या कानूनी दस्तावेज (जैसे बिजनेस बिल, कृषि आय का सबूत या कोई जायदाद बिक्री के कागजात) दिखाने में नाकाम रहता है, तो आयकर विभाग उस पूरी अघोषित रकम पर भारी टैक्स लगा सकता है। नियमों के अनुसार, ऐसी अज्ञात या अघोषित आय पर धारा 115BBE के तहत करीब 60% टैक्स, 25% सरचार्ज और पेनल्टी मिलाकर कुल 78% तक का टैक्स और जुर्माना वसूला जा सकता है। यानी आपकी मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा टैक्स और पेनल्टी की भेंट चढ़ जाएगा। इसके साथ ही, 31 जुलाई के बाद रिटर्न भरने पर ₹5,000 तक की लेट फीस (Late Fees) भी भुगतनी पड़ती है।
