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EPFO नियम: रिटायरमेंट के 3 साल बाद PF निकालने पर जानिए कितना देना होगा टैक्स

EPFO Rules: आपके प्रॉविडेंट फंड पर मिलने वाला ब्याज केवल रिटायमेंट तक टैक्स फ्री होता है। इसके बाद, जब योगदान रुक जाता है, तो किसी भी ब्याज पर टैक्स लागू हो जाता है।

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रिटायरमेंट के बाद पीएफ पर ब्याज का टैक्स नियम (तस्वीर-istock)

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EPFO Rules : जब तक आप नौकरी में हैं और आपके व आपके नियोक्ता (employer) यानी नौकरी देने वाली कंपनी या संस्थान दोनों की तरफ से भविष्य निधि (Provident Fund - PF) में योगदान होता रहता है, तब तक पीएफ पर मिलने वाला ब्याज इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 के तहत पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है।

रिटायरमेंट के बाद क्या होता है?

नौकरी छूटते ही योगदान रुक जाता है। रिटायरमेंट के बाद आपकी ओर से और नियोक्ता की ओर से पीएफ में योगदान बंद हो जाता है। इस स्थिति में आप कर्मचारी (employee) की कटैगरी में नहीं आते हैं। ब्याज टैक्सेबल हो जाता है। इसलिए, आपकी रिटायरमेंट के बाद जो भी ब्याज आपके पीएफ खाते में जमा होता है, वह अब टैक्सेबल (टैक्स योग्य) माना जाएगा।

किस कटैगरी में टैक्स लगेगा?

रिटायमेंट के बाद मिलने वाला ब्याज Income from Other Sources (अन्य स्रोतों से आय) की कटैगरी में आता है। इसका मतलब है कि यह आपकी सैलरी इनकम या बिजनेस इनकम की तरह नहीं, बल्कि अन्य आय के रूप में गिना जाएगा।

टैक्स भरने के दो तरीके

Accrual Basis (जब ब्याज हर साल जुड़ता है, उसी साल टैक्स देना) आप हर साल पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को अपनी आय में जोड़कर टैक्स दे सकते हैं। इससे फायदा यह होगा कि आपका टैक्स बोझ हर साल थोड़ा-थोड़ा रहेगा। Receipt Basis (जब पूरी रकम निकालें, तब टैक्स देना) आप चाहें तो तीन साल बाद, जब पूरा पीएफ निकालेंगे, उसी समय कुल ब्याज पर टैक्स दे सकते हैं। लेकिन ऐसा करने पर उस साल आपकी आय अधिक दिखेगी और टैक्स स्लैब भी ऊंचा हो सकता है।

एक्सपर्ट की सलाह

चूंकि आप तीन साल बाद अपना पीएफ निकालने की योजना बना रहे हैं, इसलिए यह बेहतर रहेगा कि आप हर साल ब्याज को “Accrual Basis” पर टैक्स भरें। इससे आपको एक ही बार में भारी टैक्स नहीं देना पड़ेगा।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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