बिजनेस

कम EMI का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता; जानिए कैसे बैंक आपको फंसाते हैं झांसे में?

अगर आप भी लोन लेने का प्लान कर रहे है तो ये खबर आपके काम की साबित हो सकती है। बैंक लोन देते समय कई तरह की बातें करते हैं ऐसे में आपको लोन अप्प्रूव होने से पहले उन बातों को समझ लेना चाहिए।

Image

Pre Approved Loan (6)

आज के समय में घर खरीदना हो, कार लेनी हो या बच्चों की पढ़ाई करानी हो, लोन लेना एक आम बात हो गई है। बैंक और फाइनेंशियल कंपनियां भी ग्राहकों को लुभाने के लिए आए दिन नए-नए ऑफर्स लाती रहती हैं। जब भी हम लोन लेने किसी बैंक या वित्तीय संस्थान में जाते हैं, तो उनका सबसे पहला और बड़ा फोकस इस बात पर होता है कि आपकी मासिक किस्त यानी ईएमआई (EMI) कितनी कम रखी जाए। वे आपको बड़े-बड़े विज्ञापनों में दिखाते हैं कि "सिर्फ इतनी कम EMI पर पाएं शानदार लोन"।

एक आम आदमी के लिए कम ईएमआई का ऑफर बेहद आकर्षक होता है, क्योंकि उसे लगता है कि हर महीने उसकी जेब पर कम बोझ पड़ेगा और वह आसानी से अपना खर्च चला लेगा। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोन कम ईएमआई वाला दिख रहा है, क्या वह वाकई में सस्ता है? वित्तीय मामलों के जानकार और एक्सपर्ट्स हमेशा आगाह करते हैं कि कम ईएमआई का मतलब हमेशा सस्ता लोन नहीं होता है। इसके पीछे बैंकों का एक बड़ा गणित और सोची-समझी रणनीति होती है, जिसे समझे बिना अगर आपने लोन ले लिया, तो आप अनजाने में ही बहुत बड़ा नुकसान कर बैठते हैं।

बैंकों का सबसे बड़ा खेल

बैंकों का यह 'खेल' मुख्य रूप से लोन की अवधि यानी लोन टेन्योर (Loan Tenure) पर आधारित होता है। जब बैंक आपकी ईएमआई को कम करते हैं, तो वे असल में आपके लोन चुकाने के समय को काफी लंबा कर देते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का लोन लिया है। अगर आप इसे 3 साल के लिए लेते हैं, तो आपकी मंथली ईएमआई ज्यादा होगी, लेकिन आप बहुत जल्दी कर्ज से मुक्त हो जाएंगे और आपको कुल ब्याज भी कम देना पड़ेगा। वहीं, अगर बैंक इसी लोन की ईएमआई को आधा करने के लिए लोन की अवधि को 3 साल से बढ़ाकर 7 या 8 साल कर देता है, तो आपकी मासिक किस्त तो बहुत कम हो जाएगी, लेकिन इस लंबे समय के दौरान आप पर लगने वाला कुल ब्याज (Total Interest) आसमान छूने लगेगा।

कई बार तो स्थिति ऐसी होती है कि ग्राहक मूलधन (Principal Amount) से भी कहीं ज्यादा रकम सिर्फ ब्याज के रूप में बैंक को चुका देता है। इसलिए, केवल मंथली किस्त का साइज देखकर खुश होने के बजाय हमेशा यह कैलकुलेट करें कि लोन की पूरी अवधि के दौरान आपकी जेब से कुल कितना पैसा बाहर जा रहा है।

2 तरह के होते हैं लोन

इसके अलावा, लोन लेते समय ब्याज दर के प्रकार को समझना भी बेहद जरूरी है। बाजार में मुख्य रूप से दो तरह की ब्याज दरें होती हैं- फिक्स्ड (Fixed) और फ्लोटिंग (Floating)। फिक्स्ड रेट में लोन की पूरी अवधि के दौरान ब्याज दर एक समान रहती है, जबकि फ्लोटिंग रेट में रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों और बाजार के उतार-चढ़ाव के अनुसार ब्याज दरें बदलती रहती हैं। बैंक अक्सर फ्लोटिंग रेट का झांसा देकर शुरुआती ईएमआई बहुत कम रखते हैं, लेकिन जैसे ही बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं, आपकी ईएमआई या तो बढ़ जाती है या फिर आपके लोन की अवधि चुपके से लंबी कर दी जाती है।

इसके साथ ही, लोन की कुल लागत सिर्फ ब्याज दर से तय नहीं होती। बैंक लोन अप्रूव करते समय कई तरह के हिडन चार्ज (Hidden Charges) जैसे- प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन फीस और लोन प्रोटेक्शन इंश्योरेंस के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं। ये सारे खर्चे आपके लोन की वास्तविक लागत को काफी बढ़ा देते हैं, जिन पर आम तौर पर लोग ध्यान नहीं देते।

रिपेमेंट पर दें ध्यान

इस बैंकिंग जाल या झांसे से बचने के लिए उपभोक्ताओं को लोन लेते समय बेहद सतर्क और स्मार्ट बनने की जरूरत है। लोन के लिए आवेदन करने से पहले हमेशा अपनी रीपेमेंट क्षमता का सही आकलन करें। एक थंब रूल (Golden Rule) के अनुसार, आपकी सभी लोन ईएमआई को मिलाकर आपकी कुल इन हैंड सैलरी या मासिक कमाई के 35 से 40 फीसदी से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर आप इससे ज्यादा ईएमआई रखते हैं, तो आपका मासिक बजट बिगड़ सकता है और आप निवेश (Investment) नहीं कर पाएंगे। लोन लेते समय हमेशा अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और उनके द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की तुलना करें।

बैंक के प्रतिनिधि से 'इफेक्टिव इंटरेस्ट रेट' (Effective Interest Rate) और कुल देय राशि (Total Payable Amount) का लिखित विवरण मांगें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जितनी जल्दी हो सके लोन को चुकाने की कोशिश करें और यदि आपके पास बीच में कहीं से अतिरिक्त पैसा आता है, तो 'प्री-पेमेंट' (Pre-payment) या आंशिक भुगतान करके अपने लोन की अवधि को कम करवाएं। ऐसा करके आप बैंक के ब्याज के चक्रव्यूह से बच सकते हैं और अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई को फालतू खर्च होने से सुरक्षित रख सकते हैं।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

और पढ़ें
End of Article