Power Consumption in India: भारत की बिजली खपत फरवरी में बढ़कर 131.54 अरब यूनिट्स हो गई है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 127.34 अरब यूनिट्स थी। यह जानकारी आधिकारिक आंकड़ों से मिली। उच्च मांग को पूरा करने के लिए फरवरी में एक दिन में अधिकतम 238.14 गीगावाट की बिजली की आपूर्ति की गई है, जो कि फरवरी 2024 में 222 गीगावाट थी। मई 2024 में बिजली की अधिकतम मांग लगभग 250 गीगावाट के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू गई थी। इससे पहले सर्वकालिक उच्च बिजली मांग 243.27 गीगावाट की सितंबर 2023 में दर्ज की गई थी।
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बिजली की अधिक मांग की उम्मीद
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 270 गीगावाट को छू सकती है। आईएमडी के ताजा अनुमानों के अनुसार, मार्च के सामान्य से अधिक गर्म रहने की उम्मीद है। इस कारण बिजली की भी अधिक मांग देखने को मिल सकती है।
क्यों बढ़ रही बिजली की खपत
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जिसके कारण बिजली की खपत में भी तेज वृद्धि हुई है। चुनौती उच्च आर्थिक विकास और लगभग 1.3 अरब लोगों की बिजली की जरूरतों को पूरा करने की है।
भारत में बिजली उत्पादन का सबसे बड़ा स्रोत कोयला है, जबकि देश अक्षय ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ रहा है जिसमें सौर, पवन, जलविद्युत और बायोमास शामिल हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
214 गीगावाट है भारत की अक्षय ऊर्जा क्षमता
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। 2024 तक भारत 214 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित कर चुका है।
अकेले 2024 के अप्रैल और नवंबर के बीच, भारत ने लगभग 15 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान जोड़े गए 7.57 गीगावाट से लगभग दोगुनी है। (इनपुट - आईएएनएस)
