Economic Survey 2026 : देश में छोटे व्यवसायियों, स्वरोजगार करने वालों और स्ट्रीट वेंडर्स को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) और प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) प्रमुख हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य छोटे उद्यमियों को आसान लोन उपलब्ध कराना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। बीते 10 सालों में इन योजनाओं ने देश के माइक्रो-क्रेडिट क्षेत्र में बड़ी प्रगति दिखाई है।
PM मुद्रा योजना: छोटे व्यवसायियों की शक्ति
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना छोटे उद्यमियों, स्वरोजगार करने वालों और नए स्टार्टअप्स को सस्ते और आसान लोन देने के लिए शुरू की गई थी। सरकार के आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2025 तक इस योजना के जरिए 36.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। यह राशि 55.45 करोड़ से ज्यादा लोन अकाउंट्स के माध्यम से दी गई है। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की भागीदारी है। कुल माइक्रो लोन का 69 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं ने हासिल किया है। इससे महिला उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने में मदद मिली है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह आंकड़ा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सामाजिक समावेशन की दृष्टि से भी PM मुद्रा योजना काफी असरदार रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के लाभार्थियों को 15.6 लाख करोड़ रुपये की राशि 33.4 करोड़ खातों के माध्यम से दी गई है। इसका मतलब है कि अब वंचित वर्ग के लोग भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
PM SVANidhi योजना: स्ट्रीट वेंडर्स की मदद
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शहरों में रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों के लिए शुरू की गई थी। इस योजना का मकसद उन्हें माइक्रो-क्रेडिट के जरिए अपने कारोबार को दोबारा शुरू करने और आगे बढ़ाने में मदद करना है। PM SVANidhi योजना ने शहरी गरीबों और छोटे व्यापारियों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़कर उन्हें आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार दिया है।
PM SVANidhi योजना: आय में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना देश के रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदारों के लिए आर्थिक सहायता का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी है। माइक्रो-क्रेडिट के जरिए स्ट्रीट वेंडर्स को सशक्त बनाना इसका मुख्य उद्देश्य है, जिससे उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, PM SVANidhi से जुड़े लाभार्थियों की औसत वार्षिक व्यावसायिक आय में 2023 से 2025 के बीच लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ी हुई आय का सीधा असर उनके जीवन स्तर पर पड़ा है:-
- 39 प्रतिशत परिवारों ने अपने घरों में सुधार कराया।
- 55 प्रतिशत परिवारों को बेहतर भोजन की सुविधा प्राप्त हुई।
- 44 प्रतिशत लाभार्थियों को किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हुईं।
- 50 प्रतिशत परिवारों में बच्चों की शिक्षा के अवसर बेहतर हुए।
किन्हें हुआ फायदा
- PM SVANidhi योजना ने सामाजिक समावेशन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- 33 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं।
- 64 प्रतिशत लाभार्थी OBC, SC और ST वर्गों से आते हैं।
- यह दर्शाता है कि योजना ने वंचित और कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने में मदद की है।
क्रेडिट अनुशासन और वित्तीय सुदृढ़ता
क्रेडिट अनुशासन के मामले में भी योजना की स्थिति मजबूत रही है। ऋण चुकाने की दर संतोषजनक पाई गई और अनुमानित एनपीए (NPA) दर 10 प्रतिशत से कम रही। यह संकेत है कि स्ट्रीट वेंडर्स ने ऋण का सही उपयोग किया और समय पर भुगतान किया।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
इन दोनों योजनाओं के जरिए “अनफंडेड को फंड” करने का लक्ष्य काफी हद तक पूरा हुआ है। छोटे व्यवसायियों और स्ट्रीट वेंडर्स को समय पर ऋण मिलने से उनके कारोबार में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही, महिलाओं और वंचित वर्ग के लोग भी अब अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम हो रहे हैं। कुल मिलाकर PM मुद्रा योजना और PM SVANidhi ने माइक्रो-क्रेडिट के क्षेत्र में भारत की तस्वीर बदल दी है। इन योजनाओं ने न केवल छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम उठाए हैं।
कुल मिलाकर, PM SVANidhi योजना ने माइक्रो-क्रेडिट के माध्यम से लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। आय में वृद्धि, जीवन स्तर में सुधार और सामाजिक सशक्तिकरण के साथ यह योजना आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रही है।
