Economic Survey 2026: महंगाई 2 से 4 फीसदी के बीच रहने का अनुमान, सस्ते कर्ज की उम्मीद बढ़ी
- Authored by: यतींद्र लवानिया
- Updated Jan 29, 2026, 01:01 PM IST
वित्त मंत्री की तरफ से संसद में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 में बताया गया है कि इस साल FY 27 में पूरे साल महंगाई काबू में बनी रहेगी। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि इस साल महंगाई दर 2 से 4 फीसदी के बीच में बनी रह सकती है। अगर महंगा 4 फीसदी से नीचे बनी रहती है, तो रिजर्व बैंक की तरफ से कर्ज सस्ता करने की उम्मीद बढ़ जाती है।
आर्थिक सर्वेक्षण में महंगाई काबू में रहने का अनुमान
Economic Survey 2026। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 ने महंगाई को लेकर सरकार और नीति निर्माताओं के लिए राहत भरी तस्वीर पेश की है। सर्वे के मुताबिक FY27 में भी महंगाई का रुझान बेनीन बना रहेगा और इसके 2 से 4 प्रतिशत के दायरे में सीमित रहने की उम्मीद है। मजबूत सप्लाई-साइड स्थिति, खाद्य कीमतों में लगातार नरमी और GST रेट रैशनलाइजेशन का असर महंगाई पर दबाव को कम कर रहा है।
दिसंबर में महंगाई 1.3%, RBI बैंड से नीचे
आंकड़े इस आकलन को मजबूती देते हैं। दिसंबर 2025 में खुदरा महंगाई 1.3 प्रतिशत रही, जो लगातार चौथे महीने RBI के 2–6 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड से नीचे है। आर्थिक सर्वे के अनुसार यह गिरावट मांग और आपूर्ति के बेहतर संतुलन को दर्शाती है, जहां कीमतों पर नियंत्रण के संकेत साफ नजर आते हैं।
सात महीने से फूड प्राइस डिफ्लेशन
महंगाई में नरमी का सबसे बड़ा कारण खाद्य कीमतें रही हैं। दिसंबर में फूड इंफ्लेशन -2.71 प्रतिशत दर्ज किया गया, यानी लगातार सातवां महीना जब खाद्य कीमतें डिफ्लेशन में रहीं। सर्वे में कहा गया है कि बेहतर कृषि उत्पादन, सरकारी हस्तक्षेप और सप्लाई चेन में सुधार से फूड प्राइस वोलैटिलिटी काफी हद तक काबू में आई है।
RBI का अनुमान और इकोनॉमिस्ट्स की राय
भारतीय रिजर्व बैंक को FY26 में औसत महंगाई 2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि FY27 की पहली छमाही में यह करीब 4 प्रतिशत तक जा सकती है। अक्टूबर में हुए एक सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने भी FY27 की औसत महंगाई लगभग 4 प्रतिशत के आसपास आंकी थी, जो अब आर्थिक सर्वे के अनुमानों से मेल खाती है।
GST कटौती का असर कीमतों में दिखा
आर्थिक सर्वे ने संकेत दिया है कि GST दरों में कटौती का पास-थ्रू अब साफ नजर आने लगा है। हालिया विश्लेषण के मुताबिक सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल्स की कीमतों में औसतन 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई। यह पिछले वर्षों के मुकाबले कहीं ज्यादा मजबूत असर है, जब इन्हीं महीनों में कीमतें लगभग स्थिर रही थीं।
नया CPI बेस ईयर करेगा उतार-चढ़ाव कम
12 फरवरी से CPI का नया 2024 बेस ईयर लागू होने जा रहा है। नई सीरीज में ज्यादा आइटम्स को शामिल किया गया है और नॉन-फूड कंपोनेंट्स को ज्यादा वेटेज दिया गया है। इससे खाद्य कीमतों के उतार-चढ़ाव का कुल महंगाई आंकड़ों पर असर सीमित होने की उम्मीद है। हालांकि सर्वे ने आगाह किया है कि कोर इंफ्लेशन की दिशा पर करीबी नजर जरूरी होगी, खासकर वैश्विक बेस मेटल कीमतों और मौद्रिक नीति में नरमी के संदर्भ में।
महंगाई नहीं, अब ग्लोबल रिस्क सबसे बड़ी चिंता
दिलचस्प बात यह है कि अब महंगाई को लेकर चिंताएं पीछे छूटती दिख रही हैं। प्री-बजट सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने FY27 के लिए सबसे बड़ा जोखिम अमेरिका और वैश्विक अनिश्चितता, ट्रेड प्रोटेक्शनिज्म और जियोपॉलिटिकल तनाव को बताया। CXOs के बीच भी भरोसा है कि नीति निर्माता महंगाई को RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से नीचे रखने में सफल रहेंगे।
ब्याज दर कटौती की उम्मीद मजबूत
RBI पहले ही 2025 की शुरुआत से अब तक 125 बेसिस पॉइंट की कटौती कर पॉलिसी रेट को 5.25 प्रतिशत तक ला चुका है। दो-तिहाई से ज्यादा अर्थशास्त्रियों को FY27 में और दर कटौती की उम्मीद है, जबकि बजट के बाद फरवरी की बैठक में भी एक और कट की संभावना जताई जा रही है। आर्थिक सर्वे का कुल संदेश साफ है कि महंगाई फिलहाल ग्रोथ के रास्ते में बड़ी बाधा नहीं बनने वाली।
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