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Economic Survey 2026: भारत का ट्रेड गेम प्लान, 8 बड़े देश के साथ व्यापारिक समझौते, अब अमेरिका की बारी

Economic Survey 2026: इकोनॉमिक सर्वे 2026 में सरकार की ओर से बताया गया है कि भारत सरकार बीते कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। देश का फोकस अब ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA/ECTA) करने पर है, ताकि निर्यात बढ़े, निवेश आए और घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा सके।

Economic Survey 2026: India Free Trade Agreement

Economic Survey 2026: India Free Trade Agreement

Economic Survey 2026: बजट 2026 से ठीक पहले सरकार ने इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey 2026) पेश कर दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण में पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था का पूरा लेखा-जोखा रहता है। इसमें सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान के अलावा कई तरह की आर्थिक जानकारियां शामिल होती हैं। इकोनॉमिक सर्वे वित्त मंत्री ने निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पेश किया है। इकोनॉमिक सर्वे में भारत के व्यापारिक कूटनीति और दूसरे देशों के साथ साझेदारी को लेकर भी विस्तार से जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं...

भारत का व्यापारिक कूटनीति पर जोर

भारत सरकार बीते कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है। देश का फोकस अब ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA/ECTA) करने पर है, ताकि निर्यात बढ़े, निवेश आए और घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा सके।

पिछले पांच वर्षों में बड़ी उपलब्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने पिछले पांच सालों में 8 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इनमें भारत-मॉरीशस CECPA (2021), भारत-यूएई CEPA (2022) और भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA (2022) प्रमुख हैं। इसके अलावा भारत-EFTA TEPA (2024) जैसे अहम समझौते भी शामिल हैं। वर्ष 2025 में भारत-यूके CETA और भारत-ओमान CEPA को अंतिम रूप दिया गया है, हालांकि इन्हें अभी लागू किया जाना बाकी है। वहीं भारत-न्यूजीलैंड FTA और भारत-यूरोपीय संघ FTA की वार्ताएं भी पूरी हो चुकी हैं।

Economic Survey 2026

Economic Survey 2026

बातचीत के दौर में कई अहम समझौते

भारत कई देशों और आर्थिक समूहों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इनमें भारत-ऑस्ट्रेलिया CECA, भारत-श्रीलंका ETCA, भारत-पेरू FTA और भारत-चिली CEPA शामिल हैं। इसके अलावा भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता, भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन FTA और भारत-कोरिया CEPA (अपग्रेड बातचीत) भी चर्चा के चरण में हैं। साथ ही आसियान-भारत (AITIGA) समझौते की समीक्षा भी जारी है।

व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

इन समझौतों का सीधा फायदा भारतीय निर्यातकों, MSME सेक्टर और किसानों को मिलने की उम्मीद है। टैरिफ में कटौती से भारतीय उत्पाद विदेशों में सस्ते होंगे, जबकि विदेशी कंपनियों के लिए भारत में निवेश करना आसान बनेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत होती भूमिका

विशेषज्ञों का मानना है कि इन व्यापार समझौतों से भारत वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बनेगा। सरकार का उद्देश्य भारत को एक भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करना है। कुल मिलाकर, भारत की यह रणनीति आर्थिक विकास को गति देने और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की स्थिति मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

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Pradeep Pandey
Pradeep Pandey author

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिय... और देखें

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