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Economic Survey 2026: लोकसभा में पेश हुआ इकोनॉमिक सर्वे, 10 पॉइंट में जानें बड़ी बातें

Economic Survey 2026: इकोनॉमिक सर्वे पिछले वित्त वर्ष की अर्थव्यवस्था का कच्चा चिट्ठा होता है। इसमें जीडीपी (GDP) ग्रोथ, महंगाई दर, रोजगार के आंकड़े, विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय घाटे जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है। यह रिपोर्ट बताती है कि भारत की आर्थिक सेहत फिलहाल कैसी है।​

Economic Survey 2026

Economic Survey 2026

Economic Survey 2026: बजट सत्र के दूसरे दिन, गुरुवार (29 जनवरी) को संसद के पटल पर इकोनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) 2025-26 पेश किया गया। यह दस्तावेज सरकार का वह आधिकारिक रिपोर्ट कार्ड है, जो बताता है कि पिछले एक साल में देश की अर्थव्यवस्था ने कैसा प्रदर्शन किया है और आने वाले समय में हमारी विकास की रफ्तार क्या रहने वाली है। इकोनॉमिक सर्वे पिछले वित्त वर्ष की अर्थव्यवस्था का कच्चा चिट्ठा होता है। इसमें जीडीपी (GDP) ग्रोथ, महंगाई दर, रोजगार के आंकड़े, विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय घाटे जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का विस्तार से विश्लेषण किया जाता है। यह रिपोर्ट बताती है कि भारत की आर्थिक सेहत फिलहाल कैसी है।

GDP ग्रोथ अनुमान

लोकसभा में आर्थिक सर्वे 2025-26 पेश किया गया। इसमें कारोबारी साल 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8 प्रतिशत से 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। आर्थिक सर्वे में अलग-अलग आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर कुल 16 चैप्टर शामिल किए गए हैं।

यह रिपोर्ट वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। सर्वे के मुताबिक, भारत की घरेलू मांग बेहद मजबूत है, जिसके दम पर चालू वित्त वर्ष (FY26) में देश की जीडीपी (GDP) ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, अगले वित्त वर्ष (FY27) के लिए विकास दर 6.8% से 7.2% के बीच रहने की उम्मीद है।

महंगाई पर लगाम और मजबूत राजकोषीय स्थिति

आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि खुदरा महंगाई दर में कमी आई है। सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में महंगाई आरबीआई (RBI) के 4% के लक्ष्य के करीब रहेगी। सरकार का मानना है कि कम महंगाई और स्थिर रोजगार से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता (Purchasing Power) बढ़ेगी। वहीं, राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को लेकर भी अच्छी खबर है; महामारी के बाद से सरकार ने इसे लगभग आधा कर दिया है और वित्त वर्ष 2026 के लिए इसके 4.4% रहने का अनुमान है। सरकार अब अपना पूरा ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बुनियादी ढांचे पर निवेश करने पर लगा रही है।

विदेशी निवेश और व्यापार में बढ़त

भारत के बाहरी व्यापार और निवेश के मोर्चे पर भी सर्वे ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है। सर्विस सेक्टर में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश (FDI) आ रहा है और भारत के कुल निर्यात (सामान + सेवाएं) में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए 'फ्री ट्रेड एग्रीमेंट' को निर्यात के अवसरों को बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम बताया गया है। सर्वे के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और इन्वेस्टमेंट इस साल विकास के मुख्य इंजन रहे हैं, जबकि सर्विस सेक्टर ने अपनी मजबूती बरकरार रखी है।

रोजगार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर जोर

भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए, सर्वे में कौशल विकास (Skill Development) और नियमों को आसान बनाने पर जोर दिया गया है। विशेष रूप से फैक्ट्रियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नियमों में ढील देने की बात कही गई है। सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0' के तहत सिस्टम को और सरल बनाना चाहती है, ताकि नए स्टार्टअप और निवेश को बढ़ावा मिल सके। यह पूरा दस्तावेज अब आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जो आने वाले बजट की दिशा तय करेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर बना निर्यात का पावरहाउस

आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर एक बड़ी सफलता की कहानी बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2022 (FY22) में जो सेक्टर देश की सातवीं सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी था, वह वित्त वर्ष 2025 (FY25) तक तीसरा और सबसे तेजी से बढ़ने वाला निर्यात क्षेत्र बन गया है। आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में ही इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात $22.2 बिलियन तक पहुंच गया है। सर्वे के मुताबिक, यह सेक्टर अब भारत का दूसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बनने की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

आर्थिक सर्वे में AI के लिए समर्पित चैप्टर

इस बार के आर्थिक सर्वे की एक और बड़ी विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक अलग और विशेष चैप्टर है। यह चैप्टर इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्वरूप को बदल रहा है। भारत जैसी बड़ी युवा आबादी वाले देश के लिए एआई जहां विकास के नए अवसर लेकर आ रहा है, वहीं यह रोजगार और तकनीक के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती भी पेश करता है। सरकार ने इस चैप्टर के जरिए संकेत दिया है कि भविष्य की आर्थिक नीतियों में एआई की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।

किसानों की आय सुरक्षा

आर्थिक सर्वेक्षण में किसानों की आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दी गई है। सरकार का मुख्य ध्यान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और फसल बीमा योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन पर है, ताकि किसानों की आय स्थिर बनी रहे। इसके साथ ही, पारंपरिक खेती के अलावा दालों, तिलहन, बागवानी और अधिक मुनाफा देने वाली 'हाई-वैल्यू' फसलों को बढ़ावा देने की नीति अपनाई गई है।

कृषि और जुड़े क्षेत्र का शानदार प्रदर्शन

कृषि क्षेत्र का शानदार प्रदर्शन और तकनीकी नवाचार: सर्वेक्षण के अनुसार, कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों ने इस साल बेहतरीन प्रदर्शन किया है। अच्छे मानसून की बदौलत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली है। अब सरकार का पूरा जोर उत्पादकता (Productivity) बढ़ाने पर है। इसके लिए डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, रिमोट सेंसिंग और डेटा-आधारित तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि खेती में दक्षता और उत्पादन दोनों को बेहतर बनाया जा सके।

ट्रेड डील का विशेष अध्ययन

ट्रेड डील और वैश्विक चुनौतियां: रिपोर्ट में दुनिया के विभिन्न देशों के साथ की गई ट्रेड डील पर एक विशेष अध्ययन शामिल किया गया है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 (FY27) में घरेलू मांग और निवेश में मजबूती बनी रहेगी। हालांकि, सर्वे में यह भी चेतावनी दी गई है कि वैश्विक विकास और स्थिरता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनिश्चितता अभी भी कायम है।

अर्थव्यवस्था में ब्रॉड-बेस्ड डिमांड मोमेंटम

घरेलू मांग और खपत में सुधार: भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ी ताकत घरेलू मांग से मिल रही है। खेती के अच्छे प्रदर्शन ने ग्रामीण इलाकों में खपत (Consumption) को बढ़ाया है, वहीं टैक्स में सुधार के चलते लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा (Disposable Income) बचने से शहरों में भी मांग बढ़ी है। कम महंगाई और स्थिर रोजगार के कारण देश की अर्थव्यवस्था में अब ब्रॉड-बेस्ड डिमांड मोमेंटम (चौतरफा मांग) देखने को मिल रहा है।

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रिचा त्रिपाठी
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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