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ट्रंप की लाख कोशिशें नाकाम! भारत-रूस की दोस्ती और मजबूत, रूस से रिकॉर्ड तेल की हुई खरीद

रिपोर्ट के अनुसार, मई में रूस के कच्चे तेल के निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही, जबकि भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद तुर्किये और यूरोपीय संघ का स्थान रहा।

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रूस से तेल आयात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव भारत पर चल नहीं पा रहा है। अमेरिका की लाख कोशिशों के बावजूद भारत और रूस की दोस्ती दिन प्रतिदिन और मजबूत हो रही है। अमेरिका की सख्ती को ठेंगा दिखाते हुए भारत ने रूस से रिकॉर्ड तेल का आयात किया है। बता दें कि भारत मई, 2026 में रूसी ईंधन का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा है।

यूरोपीय शोध संस्थान सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा खरीद बढ़ाए जाने से रूस से कुल कच्चे तेल और अन्य ईंधन का आयात बढ़कर अनुमानित 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मई में रूस से भारत के कुल आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी लगभग 83 प्रतिशत रही, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था। इसके अलावा तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमश: 55 करोड़ यूरो और 42.9 करोड़ यूरो रहा।

रूस से तेल आयात में 21% की बढ़ोतरी

सीआरईए ने कहा कि मई में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में मासिक आधार पर आठ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसका एक प्रमुख कारण रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी रहा। गुजरात स्थित देश के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी कच्चे तेल की आवक में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक रूसी तेल उतारा गया, जबकि जामनगर रिफाइनिंग परिसर में यह वृद्धि 14 प्रतिशत रही।

सरकारी कंपनियों ने रूस से तेल खरीद बढ़ाई

रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरी कंपनियों ने भी इस वर्ष की शुरुआत में आयात दोबारा शुरू करने के बाद खरीद बढ़ाई है। नवंबर, 2025 के अंत में रूसी तेल आयात रोकने वाली न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरी ने मार्च से दोबारा खरीद शुरू की थी।मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति मासिक आधार पर 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में इसमें 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी में भी पिछले दो साल में रूसी कच्चे तेल की सर्वाधिक मात्रा उतारी गई है। इससे संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक और प्रतिबंध संबंधी दबावों के बावजूद रियायती दरों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय रिफाइनरी इकाइयों के लिए आकर्षक बना हुआ है।

यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और व्यापारिक प्रतिबंधों से वैश्विक ऊर्जा कारोबार में बदलाव आया था। इसके बाद भारत, रूसी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गया। भारतीय रिफाइनरी इकाइयों ने रियायती रूसी तेल की खरीद बढ़ाकर ऊर्जा लागत कम करने के साथ रिफाइनिंग मार्जिन और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को भी सहारा दिया है।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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