Dollar vs Rupee: ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में क्रूड के दाम में आई तेजी से जहां डॉलर निखर रहा है, वहीं रुपया बिखरता दिख रहा है। मंगलवार को ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली बातचीत टलने के बाद से ही क्रूड के दाम में तेजी बनी हुई है। इसकी वजह से डॉलर की डिमांड बढ़ रही है, नतीजतन डॉलर इंडेक्स में मजबूती आ रही है। वहीं, क्रूड के दाम बढ़ने से रुपया दबाव में है। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया कमजोर होकर 94.30 के पार फिसल गया, जबकि डॉलर इंडेक्स हल्की मजबूती के साथ स्थिर बना रहा, जिससे करेंसी मार्केट में सतर्कता बढ़ी है।
क्रूड की तेजी ने बढ़ाया दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी ने भारतीय रुपये की चाल बिगाड़ दी। डॉलर इंडेक्स 98.84 के स्तर पर मामूली बढ़त के साथ स्थिर नजर आया, जो यह संकेत देता है कि ग्लोबल करेंसी बास्केट के मुकाबले डॉलर में मजबूती बरकरार है। वहीं, USD/INR 94.30 के ऊपर ट्रेड करता दिखा, जो पिछले क्लोज 94.12 से साफ कमजोरी को दर्शाता है।
इंट्राडे में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव
दिन के कारोबार में USD/INR ने 94.21 से 94.31 के बीच सीमित रेंज में मूव किया। ओपन 94.21 पर हुआ और ऊपरी स्तर 94.31 तक गया, जिससे यह साफ है कि बाजार फिलहाल बड़े ट्रिगर का इंतजार कर रहा है। हालांकि, लोअर लेवल पर खरीदारी और ऊपर मुनाफावसूली का ट्रेंड जारी है।
फ्यूचर्स मार्केट में बढ़ी हलचल
करेंसी डेरिवेटिव सेगमेंट में USDINR मई कॉन्ट्रैक्ट में अच्छी एक्टिविटी देखने को मिली। 3 लाख से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ वॉल्यूम मजबूत रहा और ओपन इंटरेस्ट 5.47 लाख के पार पहुंच गया। अप्रैल एक्सपायरी में भी 16 लाख से ज्यादा ओपन इंटरेस्ट बताता है कि ट्रेडर्स शॉर्ट टर्म दिशा को लेकर पोजिशन बना रहे हैं। लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स में प्रीमियम बढ़ता दिख रहा है, जो आगे और कमजोरी की आशंका को दर्शाता है।
अन्य करेंसी में मिला-जुला रुख
रुपये के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं का रुख मिला-जुला रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया 94.08 से गिरकर 94.30 के आसपास पहुंचा, जबकि यूरो और येन में मामूली स्थिरता दिखी। पाउंड में हल्की मजबूती रही, जो 126.95 के करीब ट्रेड करता दिखा। यह संकेत देता है कि डॉलर की तुलना में अन्य करेंसी में उतनी आक्रामक मजबूती नहीं है।
आगे क्या हैं संकेत
करेंसी मार्केट फिलहाल क्रूड ऑयल, यूएस बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल जोखिम भावनाओं पर निर्भर है। अगर क्रूड की तेजी जारी रहती है तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। वहीं, डॉलर इंडेक्स में स्थिर मजबूती विदेशी निवेशकों के रुख को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे शॉर्ट टर्म में USD/INR का ऊपरी स्तर बना रह सकता है।
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