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क्या महीने की इन तारीखों पर SIP करने से सच में मिलता है ज्यादा रिटर्न?

क्या सही तारीख चुनने से आपका रिटर्न बढ़ जाता है? अक्सर लोग 1 या 25 तारीख के फेर में उलझे रहते हैं, लेकिन ऐतिहासिक आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। आइए जानते हैं क्या है इसका असली गणित

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SIP

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश करना आज के समय में हर वर्ग के लोगों के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प बन चुका है। अनुशासित बचत और लॉन्ग टर्म में एक बड़ा फंड बनाने के लिए एसआईपी को सबसे बेहतरीन जरिया माना जाता है। लेकिन जब भी कोई नया निवेशक अपनी एसआईपी शुरू करता है, तो उसके मन में एक बड़ा सवाल हमेशा घूमता है कि 'महीने की कौन सी तारीख को एसआईपी के लिए चुना जाए, जिससे सबसे ज्यादा रिटर्न मिल सके?' बाजार में अक्सर यह चर्चा चलती रहती है कि महीने की शुरुआत, मध्य या आखिरी तारीखों में से किसी एक विशेष दिन निवेश करने पर एनएवी (NAV) कम मिलती है, जिससे फायदा बढ़ जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या SIP की डेट आपके रिटर्न पर असर डालती है?

क्या इन तारीखों को SIP में पैसा डालने से मिलता है ज्यादा रिटर्न?

बहुत से निवेशकों का यह मानना होता है कि महीने के आखिरी दिनों में, यानी जब ज्यादातर लोगों की जेब खाली होती है और बाजारों में लिक्विडिटी कम होती है, तब म्यूचुअल फंड की कीमतें (NAV) गिर जाती हैं। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि महीने के पहले हफ्ते में सैलरी आने के कारण बाजारों में तेजी रहती है, इसलिए तब निवेश करने पर नुकसान हो सकता है। लेकिन ऐतिहासिक आंकड़ों और लंबी अवधि के म्यूचुअल फंड रिटर्न का विश्लेषण करने पर यह बात पूरी तरह से एक मिथक (Myth) साबित होती है। वित्तीय विशेषज्ञों ने जब पिछले 10 से 15 सालों के मार्केट डेटा का अध्ययन किया और महीने की अलग-अलग तारीखों (जैसे 1, 5, 10, 15, या 25 तारीख) को होने वाली एसआईपी के रिटर्न की तुलना की, तो नतीजों में कोई खास अंतर देखने को नहीं मिला। लॉन्ग टर्म में सभी तारीखों का औसत रिटर्न लगभग एक समान ही रहता है।

इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि शेयर बाजार हमेशा एक तय ढर्रे पर नहीं चलता। बाजार में उतार-चढ़ाव (Volatility) दैनिक, साप्ताहिक और मासिक आधार पर लगातार होता रहता है। एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा ही यही है कि यह 'रुपी कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee Cost Averaging) के सिद्धांत पर काम करता है। इसका मतलब है कि जब बाजार ऊपर होता है तो आपको कम यूनिट्स मिलती हैं, और जब बाजार नीचे गिरता है तो आपको उसी पैसे में ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं। जब आप 5, 7 या 10 साल जैसी लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं, तो महीने के किसी एक विशेष दिन का उतार-चढ़ाव पूरी तरह से न्यूट्रलाइज (बेअसर) हो जाता है। इसलिए, यह सोचना कि 1 तारीख के बजाय 25 तारीख चुनने से आप बाजार को मात दे देंगे, वित्तीय रूप से सही नहीं है।

तो फिर सवाल उठता है कि एक निवेशक के लिए सबसे सही एसआईपी डेट कौन सी होनी चाहिए? इसका सीधा और व्यावहारिक जवाब है—वह तारीख जो आपकी आर्थिक सहूलियत के हिसाब से सबसे उपयुक्त हो। पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स की सलाह है कि आपकी एसआईपी डेट हमेशा आपकी सैलरी या रेगुलर इनकम आने की तारीख के ठीक 3 से 5 दिनों के भीतर होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि आपकी सैलरी हर महीने की 1 तारीख को बैंक खाते में आती है, तो आपको अपनी एसआईपी के लिए 3 से 5 तारीख के बीच का समय चुनना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होता है कि महीना शुरू होते ही सबसे पहले आपके निवेश का पैसा ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) हो जाता है, और आप बचे हुए पैसों से अपने बाकी के खर्चों को प्लान करते हैं। इसे वित्तीय भाषा में 'पे योरसेल्फ फर्स्ट' (Pay Yourself First) का नियम कहा जाता है।

इसके विपरीत, यदि आप अपनी सैलरी आने के बहुत दिनों बाद (जैसे महीने के आखिरी हफ्ते) की एसआईपी डेट चुनते हैं, तो कई बार एक व्यावहारिक समस्या खड़ी हो जाती है। अक्सर महीने के अंत तक आते-आते फिजूलखर्ची या अन्य घरेलू खर्चों के कारण बैंक खाते का बैलेंस कम हो जाता है। ऐसे में यदि एसआईपी की तारीख पर आपके खाते में पर्याप्त पैसे नहीं हुए, तो आपकी एसआईपी बाउंस हो सकती है। एसआईपी बाउंस होने पर म्यूचुअल फंड कंपनियां तो कोई चार्ज नहीं लगातीं, लेकिन आपका बैंक आपसे 'इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विस' (ECS) बाउंस होने का भारी जुर्माना वसूल सकता है। साथ ही, लगातार निवेश टूटने से आपका लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का लक्ष्य भी प्रभावित होता है।

संक्षेप में कहें तो, म्यूचुअल फंड में इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप महीने की किस तारीख को निवेश कर रहे हैं, बल्कि फर्क इस बात से पड़ता है कि आप कितने लंबे समय तक बाजार में टिके रहते हैं। बाजार को टाइम करने की कोशिश करने के बजाय, बाजार में समय बिताना (Time in the market is more important than timing the market) कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए, तारीखों के फेरबदल की उलझन को छोड़ें, अपनी सैलरी के तालमेल के हिसाब से एक सुविधाजनक तारीख चुनें और अपनी एसआईपी को बिना रोके लगातार चलने दें। यही आपकी निवेश यात्रा को सफल बनाने और बेहतर रिटर्न पाने का सबसे सही और आजमाया हुआ फॉर्मूला है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठी author

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिच... और देखें

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