आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में कई कंपनियों ने अपने काम में एआई का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इस बीच, विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे AI अपनाने के बावजूद फ्रेश ग्रेजुएट्स की भर्ती जारी रखें। संगठन का कहना है कि अगर कंपनियां एंट्री-लेवल भर्ती कम करती हैं तो भविष्य में उन्हें कुशल कर्मचारियों और नेतृत्व तैयार करने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।
एआई और मानव संसाधन मिलकर करें काम
WEF ने अपनी नई रिपोर्ट Artificial Intelligence and the Future of Entry-Level Work: A Framework for Safeguarding and Reinventing Early Career Pathways में कहा है कि AI एंट्री-लेवल नौकरियों की प्रकृति को बदल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इन पदों को खत्म कर दिया जाए। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों को इन भूमिकाओं को नई जरूरतों के हिसाब से दोबारा डिजाइन करना चाहिए, ताकि एआई और मानव संसाधन दोनों मिलकर बेहतर परिणाम दे सकें।
एंट्री-लेवल भर्ती में दिख रही है सुस्ती
रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती स्तर की भर्तियों में फिलहाल सुस्ती देखने को मिल रही है। हालांकि WEF का मानना है कि इसके लिए केवल AI को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन नौकरियों में AI का प्रभाव अधिक है, वहां भर्ती में गिरावट जरूर ज्यादा देखने को मिली है, लेकिन इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी एक महत्वपूर्ण कारण हैं।
भविष्य के लिए जरूरी हैं फ्रेशर्स
WEF ने कंपनियों को सलाह दी है कि वे एंट्री-लेवल भर्ती को अपनी वर्कफोर्स योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों को AI अपनाने के साथ-साथ ऐसे स्पष्ट लक्ष्य तय करने चाहिए, जिनसे फ्रेशर्स की भर्ती बनी रहे या उसमें बढ़ोतरी हो। अगर कंपनियां आज एंट्री-लेवल नौकरियां कम कर देती हैं, तो भविष्य में उनके पास अनुभवी कर्मचारियों और नेतृत्व की मजबूत श्रृंखला तैयार नहीं हो पाएगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एंट्री-लेवल भूमिकाएं केवल मौजूदा उत्पादकता के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनियों की दीर्घकालिक क्षमता और विकास के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
युवाओं की बदल रही है पसंद
रिपोर्ट में श्रम बाजार में एक नया बदलाव भी सामने आया है। AI के कारण पारंपरिक व्हाइट-कॉलर करियर में बदलाव आने के साथ अब अधिक युवा ब्लू-कॉलर और स्किल्ड ट्रेड से जुड़ी नौकरियों की ओर रुख कर रहे हैं। रिपोर्ट में यूएस रिसर्च का हवाला देते हुए कहा गया है कि Gen Z के 42 प्रतिशत युवा या तो ब्लू-कॉलर और स्किल्ड ट्रेड नौकरियों में काम कर रहे हैं या फिर ऐसे करियर की तैयारी कर रहे हैं। इनमें 37 प्रतिशत ऐसे युवा भी शामिल हैं, जिनके पास बैचलर की डिग्री है। वहीं, अमेरिका के पेरोल आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 के बाद से 20 से 24 वर्ष की आयु वाले कर्मचारियों में ब्लू-कॉलर रोजगार की हिस्सेदारी लगभग 2.3 प्रतिशत पॉइंट बढ़ी है।
मिलकर करना होगा काम
WEF का कहना है कि एआई के कारण व्हाइट-कॉलर नौकरियों तक पहुंचने के पारंपरिक रास्ते पहले की तुलना में अधिक बिखर रहे हैं। ऐसे में कंपनियों, शिक्षण संस्थानों और नीति-निर्माताओं को मिलकर काम करना होगा, ताकि युवाओं के लिए एंट्री-लेवल अवसर सुरक्षित रह सकें और उन्हें एआई आधारित भविष्य के लिए तैयार किया जा सके।
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